Friday, April 16, 2010

अब ब्लोगरों को अपने टिप्पणियों और सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों पर ह़र हप्ते मिलेगा इनाम / इनाम कि राशी अकाउंट पेयी चेक द्वारा कुरिअर से उनके घरपर पहुँचाया जायेगा ---------

                                            
आज  से ही ब्लोगरों को अपने अच्छे सोच पर इनाम के रूप में कमाने का मौका / http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/         ने अपने पोस्ट  सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए -------------- पर देश हित में ईमानदारी और गंभीरता से किये गए टिप्पणियों पर और उन में से सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों को कटेगरी 1-सबसे गंभीर टिप्पणी और केटेगरी 2-सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणी इन दोनों केटेगरी में ब्लोगरों को अपने टिप्पणियों और सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों पर ह़र हप्ते मिलेगा इनाम / इनाम कि राशी अकाउंट पेयी चेक द्वारा कुरिअर से उनके घरपर पहुँचाया जायेगा / इनाम कि सूचना ह़र हप्ते के सोमबार को इस पोस्ट के सबसे ऊपर प्रकाशित किया जायेगा और इनाम का चेक मंगलवार को विजेता के पते पर ह़र हाल में भेज दिया जायेगा / ह़र हप्ते दोनों केटेगरी में इनाम कि राशी 500रुपया प्रति केटेगरी होगा / इन दोनों केटेगरी का इनाम किसी एक व्यक्ति को भी मिल सकता है अगर किसी ब्लोगर का टिप्पणी सबसे उम्दा हुआ और सबसे ज्यादा लोगों द्वारा सराहा भी गया तो /
इसमें एक ब्लोगर के लिए भाग लेने के दो मौके होंगे ,दोनों केटेगरी यानि एक बार तो आप अपनी उम्दा टिप्पणी कर सकते हैं और दूसरी बार किसी के टिप्पणी पर अपनी टिप्पणी कर सकते हैं / इस देश हित के इनामी प्रतियोगिता कि शुरूआत आज रात दिनांक 17/04/2010के ठीक 12.01 मिनट AM से होकर पूरे दो महीने यानि 13/06/2010के रात्रि 11.59PM तक होकर समाप्त होगा / इसमें कुल 16 ब्लोगर इनाम पा सकेंगे क्योंकि इस हप्ते में सिर्फ दो दिन शेष रहने कि वजह से पहले इनाम कि घोषणा 26/04/2010को और अंतिम इनाम कि घोषणा 14/06/2010को किया जायेगा और हर हाल में  पहले इनाम कि राशी 27/04/2010को और अंतिम इनाम कि राशी 15/06/2010को विजेता ब्लोगर को भेज दिया जायेगा / इनाम तो इनाम कि जगह है लेकिन देश हित में आपकी सोच और विचारों को हम क्या कोइ भी किसी इनाम से नहीं तौल सकता है ? आपका देश हित का सोच अपने आप में अमूल्य और इस देश के उच्च संस्कार कि निशानी है / आशा है आप हमारे इस प्रयास में अपनी विचारों कि भागीदारी देने के साथ-साथ अपने मित्रों को भी प्रोत्साहित करेंगे / कृपा करके कम से कम 100 शब्द जरूर लिखें /  आपका जय कुमार झा -09810752301 पर आपके किसी सवाल के जवाब के लिए भी हरदम तैयार बैठा है /      

सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए --------------

                    
आज जब पूरा देश भ्रष्टाचार और तर्कसंगत न्याय का अभाव  नामक गंभीर बीमारी के चपेट में पूरी तरह आ चुका है और ज्यादातर मंत्री,सांसद और विधायक सौदेबाजी और भ्रष्टाचार के वजह से आम जनता के हितों और मूलभूत जरूरतों के सरोकार को भूल चुकें हैं / जिसके वजह से आम जनता के लिए देश के संसद और राज्य कि विधानसभाओं का मतलब किसी भी मुद्दे को उठाकर पक्ष और बिपक्ष द्वारा आपस में सौदेबाजी से ज्यादा कुछ भी नहीं रह गया है ? ऐसे में देश के संसद और राज्यों के विधानसभाओं पर जनता के मेहनत कि कमाई के पैसों के सदुपयोग और इन संस्थाओं कि उच्च मर्यादाओं को बनाये रखने तथा इसके असल उद्देश्यों को जनता के बीच प्रभावी बनाने के लिए,देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए, जिसमे सिर्फ जनता को मंत्रियों और अपने जनप्रतिनिधियों से प्रश्न पूछने का अधिकार होगा और संसद के सभापति जनता के प्रश्न काल को संचालित करेंगे / इस दो महीनों के दौरान देश के प्रधानमंत्री और राज्यों में मुख्य मंत्री समेत सभी सांसद,विधायक और मंत्री का सदन  में मौजूद रहना अनिवार्य होगा / जिससे किसी भी क्षेत्र कि जनता को प्रश्न पूछने वक्त किसी मंत्री या प्रतिनिधियों के अनुपस्थित रहने कि वजह से अपने प्रश्न का जवाब सुनने से वंचित न रहना पड़े / इस दो महीने के दौरान प्रश्न कौन पूछेगा और प्रतिदिन कितने लोग प्रश्न पूछेंगे इसका फैसला प्रश्न पूछने वाले जनता कि संख्या पर निर्भर करेगा,लेकिन इतना तो तय रहेगा कि प्रतिदिन चालीश बिभिन्न क्षेत्रों के जनता के चालीश प्रश्नों का उत्तर मंत्रियों या जनप्रतिनिधियों (जनता जिससे जवाब मांगेगी,यह जनता तय करेगी कि उसे जवाब किससे चाहिए) उन्हें जवाब देना होगा साथ-साथ जवाब कि लिखित प्रतिया भी प्रश्न पूछने वाले जनता को मुहैया कराया जाना अनिवार्य होगा / लेकिन इस प्रश्न पूछने वालों के लिए आवेदन सिर्फ कम से कम दसवीं पास जनता ही कर पायेगी / देश भर के जनता से इस प्रश्न काल में प्रश्न पूछने के लिए आवेदन मंगवाए जायेंगे और दो महीने में औसतन ५० दिन गुना ४०जनता  =२०००जनता प्रति सदन का चुनाव इस दो महीने के खास प्रश्न काल के लिए किया जायेगा / जनता का चुनाव आवेदन कि योग्यता के आधार पर चुने गए आवेदकों का देश के इमानदार सम्मानित समाजसेवकों के द्वारा किये गए ड्रा द्वारा किया जायेगा और चुने हुए प्रश्न कर्ता जनता को उनके अपने शहर के नजदीकी रेलवे स्टेशन से राज्य कि राजधानियों या दिल्ली तक का स्लीपर क्लास का मुफ्त रेल पास आने तथा जाने के लिए जारी किया जायेगा साथ ही उनके खाने के खर्च के लिए ५०० रुपया प्रतिदिन के हिसाब से कुल पाँच दिन के २५०० रुपया भी दिया जायेगा / प्रश्न करता को प्रश्न अपने क्षेत्र के सांसद,विधायक,मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री या किसी भी विभाग के मंत्री में से किसी एक से भरी सदन के सामने पूछने का अधिकार होगा / प्रश्न और उसके विषय का चयन प्रश्न कर्ता जनता को अपने प्रश्न काल के नियत दिन से दस दिन पहले या कम से कम दो दिन पूर्व सदन के उस सभापति को बताना होगा जिस सदन में वह प्रश्न पूछना चाहता है / जनता सिर्फ अपने राज्य के दोनों सदनों या देश के दोनों सदनों में  से किसी एक में प्रश्न पूछ सकती है / सही मायने में ऐसा कर के ही इस लोकतंत्र में जनता के पैसों को कुछ स्वार्थी और भ्रष्ट लोगों के द्वारा लूटने और जनता को भूखे मरने से बचा सकने के साथ-साथ आम लोगों का विश्वास लोकतंत्र में बहाल करने का काम कर पाएंगे / सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस विषय पर अपने विचार और गंभीर सुझाव जरूर दें और अपने-अपने ब्लॉग पर भी लोकतंत्र के मजबूती और पारदर्शिता के लिए कम से कम एक ब्लॉग गंभीरता से जरूर लिखें जिसमे इस प्रश्न काल को और प्रभावी बनाने का सुझाव दें /

Thursday, April 15, 2010

सरकार मिले तो वार्ता अरुंधती रॉय मिले तो नक्सलियों को सहायता -----?

 हिंसा को को किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता,लेकिन छतीसगढ़ में हुई हिंसा के मूल कारणों पर तर्कसंगत बिवेचना कि जरूरत है न कि अरुंधती रॉय का नक्सलियों से मिलने और न मिलने पर बहस कर इस गंभीर मुद्दे के बहस को गलत दिशा में मोड़ देने कि / नक्सलियों से किसी भी आम नागरिक को हिंसा का रास्ता त्यागने और अपनी बात अहिंसक तरीके से रखने को प्रेरित करने का हक़ है तो अरुंधती रॉय ने कौन सा नक्सलियों को हथियारों का जखीरा पहुंचा दिया जो इस पर छतीसगढ़  पुलिस अरुंधती रॉय के खिलाप कार्यवाही कि बात सोच रही है ? शर्म आती है ऐसे विचारों को सुनकर छतीसगढ़  पुलिस को अपना निकम्मापन नहीं दिखता  है जिससे छतीसगढ़ में नक्सलियों कि ताकत इतनी बढ़ गयी,राष्ट्रिय ख़ुफ़िया एजेंसियों को अपना निकम्मापन नहीं दीखता है जिससे नक्सलियों के पास अत्याधुनिक हथियार पहुँच गए जिससे वे इतने बड़े हत्याकांड को अंजाम दे सके / निश्चय ही ये कुछ ऐसे कारण है जिसकी जाँच कि जाने कि जरूरत है साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं को नक्सलियों से मिलने से रोकने के बजाय भ्रष्ट राजनीतिज्ञों पर खुफिया नजर रखने कि जरूरत है क्योंकि ये अपने फायदे के लिए नक्सली क्या आतंकवादी तक का सहारा ले सकते हैं और इनको देश और समाज कि परवाह कहाँ / सही मायने में नक्सली हिंसा के लिए व्यवस्था में उच्च पदों पर बैठे भ्रष्ट और गद्दार लोग जिम्मेवार हैं ना कि अरुंधती रॉय जैसे बुद्धिजीवी / इसलिए जरूरी है कि ऐसे गद्दारों कि पहचान कि जाय और इनको हर हल में व्यवस्था से बाहर रक्खा जाय,तब जाकर नक्सली हिंसा पर काबू लग पायेगा / साथ-साथ छतीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में सामाजिक संतुलन और गरीबों के कल्याण के फंड  को हर हल में गरीबों के हाथों तक पहुँचाने के ठोस उपाय और गरीबों के फंड को खाने वाले भ्रष्ट मंत्रियों के चमचों और अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने कि / सरकार इस और ध्यान दे तो अच्छा रहेगा रही नक्सलियों से वार्ता कि बात तो यह काम तो देश के इमानदार समाज सेवकों को ही करने देना चाहिए क्योंकि वे सरकार से अच्छी वार्ता कर सकते हैं ,बस जरूरत है सरकार द्वारा उस वार्ता के परिणामों को ईमानदारी से लागू करने कि  ? अगर ऐसा होता है तो इस देश में सही मायने में लोकतंत्र होगा /

Wednesday, April 14, 2010

सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और कमजोर चरित्र कहिं भारत को बर्बाद न कर दे ------?

                       
जरा सोचिये जो व्यक्ति अपने धर्म पत्नी के प्रति बफादार नहीं हो सकता,वह व्यक्ति समाज और देश के प्रति क्या बफादारी निभाएगा ? सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और उच्च पदों पर कमजोर चरित्र के लोगों कि आसान पहुंच से आज ह़र सच्चा,इमानदार,चरित्रवान और देशभक्त भारतीय नागरिक के मन में एक आशंका बलवती होती जा रही हैं कि कहीं ये सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और कमजोर होता चरित्र भारत को बर्बाद न कर दे / आज अगर आप ईमानदारी के राह पर चलकर और चरित्र कि मजबूती को आधार बनाकर किसी भी क्षेत्र में कामयाबी पाना चाहते हैं तो निश्चय ही आप भारतरत्न कि उपाधि से भी बड़े उपाधि के हक़दार हैं, क्योंकि आज दिमाग जो ह़र मनुष्य के शरीर में होता है और वह ही मनुष्य के ह़र शक्ति का केंद्र होता है,लेकिन जब शरीर भूख से तड़पता है तो ह़र दिमाग में इतनी ताकत नहीं रह जाती है कि वह अपने शरीर और अपने व्यवहार को इंसानी उसूलों के अनुसार चला सके / यही वजह है कि कई बुद्धिजीवी भी कई बार पेट भरने के लिए अमानवीय व्यापार चलाने वालों के टीम में शामिल होकर उनके व्यापार को अपनी बुद्धि के बल पर आसमान कि बुलंदियों पर पहुंचा देते हैं,ये अलग बात है कि ऐसा करके वे अपने बुद्धि  का ना सिर्फ दुरूपयोग करते हैं बल्कि समूची मानवता को शर्मसार करने का काम करते हैं / आज कुछ इसी प्रकार का काम देश के कई बड़े पत्रकार कर रहें हैं जिससे खोजी पत्रकारिता लगभग बिलुप्त होती जा रही है और ह़र चेनल या अखवार पर किसी मानवीय पहलुओं को छूते हुए टिप्णियों और सार्थक विवेचनाओं कि जगह उच्च पदों पर बैठे लोगों के एक पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी या उनके अनैतिक प्यार और कमजोर चरित्र को उनके तगमे और उपाधियों कि तरह प्रचारित किया जाना निश्चय ही  गंभीर सामाजिक असंतुलन और कमजोर चरित्र को बढ़ावा देने का काम कर रहा है / (काश इन पत्रकारों के मन से भगवान लोभ-लालच निकाल कर देश और समाज के भलाई का लालच भर देतें तो आज से ही देश में सामाजिक संतुलन कि शुरुआत होने लगती /) जिसके वजह  से हमारे समाज के नयी पीढ़ी जिनका दिमाग परिपक्वता कि ओर अग्रसर होता है, अपने देश के उच्च पदों पर बैठे लोगों के इस कमजोर चरित्र के गुण अबगुण को समझे वगैर उसे एक रोल मोडल के रूप में अपने दिमाग में बैठाकर अपने चरित्र को कमजोर होने से नहीं  रोक पाते हैं / ऐसी स्थिति किसी भी सभ्य समाज और खासकर भारतीय संस्कृति के लिए खतरे कि घंटी है /
                          आज कोई भी पत्रकार खोजी पत्रकारिता जैसे खतरों पे चलकर भूखे मरने और अपने बीवी बच्चों को भूखे मरने को मोहताज करने के वजाय पत्रकारिता को भ्रष्ट और सत्ता के दलालों के हाथों बेचकर अपना और अपने बच्चों का जीवन सुखी और मजेदार बनाने को तरजीह देता है / हलांकि उनके इस कदम से ना तो सही मायने में उनका और ना ही उनके बच्चों का भला होता हैं बल्कि देश के गद्दार और बेहद भ्रष्ट लोग जो सरकारी खजाने को लूटतें हैं को सरकारी खजाना जो जनता के कल्याण के लिए प्रयोग होना चाहिए था को जनता के लिए कागजों में प्रयोग हुआ दिखाकर खुलेआम लूटने कि इजाजत जरूर मिलजाती है / आज देश में आर. टी . आई कानून होने के बाबजूद लोग इस कानून का प्रयोग करने से डरतें हैं क्योंकि मिडिया ऐसे लोगों को तरजीह और समुचित जगह नहीं दे पाती है जिससे ऐसे लोगों पर भ्रष्ट लोग हमला करने से नहीं चूकते जो देश में सही मायने में लोकतंत्र को मजबूत करने का काम करना चाहते हैं वहीँ दूसरी ओर भ्रष्ट लोगों के वाहवाही और उनके कमजोर चरित्र का बखान मिडिया में सुर्खियाँ बनने कि वजह से भी इमानदार लोगों का हौसला पस्त होता है,फिर भी कुछ लोग इन बेहद विपरीत परिस्थितियों के बाबजूद निडरता से देश और समाज के भले के लिए काम कर रहें हैं / ऐसे लोगों को हमारा पूरे देश के लोगों के तरफ से सलाम और देश के लोगों से एक अपील कि अगर कोई है जो ऐसा काम आपके क्षेत्र में कर रहा तो उसकी पूरी मदद कीजिये ,क्योंकि सिर्फ ऐसे लोग ही इस देश और समाज को सामाजिक असंतुलन और कमजोर चरित्र के दलदल से बाहर निकाल सकता है / ऐसे लोगों के बारे में कृपा कर मुझे भी बताने का कष्ट करें क्योंकि ऐसे लोग निश्चय ही आज के महात्मा गाँधी ,भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे स्वतंत्रता सेनानी हैं जिनका दर्शन मात्र ही किसी को सही राह पर चलने को प्रेरित कर सकता है /

Tuesday, April 13, 2010

किसी देश का स्वेत रक्त होता है उस देश कि गुप्तचर या खुफिया संस्था -------------


     
जिस तरह मानव शरीर को किसी भी रोग से बचाने के लिए ह़र मानव शरीर में दो तरह के रक्त (RBC)यानि लाल रक्त  कण  (WBC) यानि स्वेत रक्त कण होता है /इस में से (WBC)यानि स्वेत रक्त का काम किसी भी रोग से पूरे शरीर कि रक्षा करना होता है और यह पूरी तरह मानव शरीर के दिमाग द्वारा नियंत्रित होता है और जब यह कमजोर या अप्रभावी हो जाता है तो मानव शरीर कई रोगों के चपेट में आ जाता है / ठीक उसी तरह किसी देश का स्वेत रक्त होता है उस देश कि गुप्तचर या खुफिया संस्था / क्या आप जानते हैं अपने देश के स्वेत रक्त यानि गुप्तचर संस्थाओं के नाम ? लीजिये हम आपको बता देते हैं भारत जैसे लोकतंत्र शरीर के स्वेत रक्त कण का नाम (१)RAW रिसर्च एंड अनल्यसिस विंग (२)IB इंटेलिजेंस ब्यूरो (३)DIA डिफेन्स इंटेलिजेंस एजेंसी  ये तिन हमारे देश के  मुख्य स्वेत रक्त कण हैं / इनकी सहायता के लिए और भी कई  सरकारी एजेंसियां हमारे देश में कार्यरत हैं / अब सवाल उठता है की अड्बों रुपया इन एजेंसियों के प्रोजेक्ट और इन में कार्यरत कर्मचारियों पड़ हर साल खर्च करने के बाबजूद हमारा देश कई गंभीर रोगों जैसे भ्रष्टाचार,कानून का खौफ का ना होना,भ्रष्ट लोगों का सांसद और मंत्री पद पड़ बैठ कर अपने रिश्तेदारों और चमचों को फायदा पहुँचाने के लिए देश कि आम जनता और देश को खुलेआम लूटना ,इत्यादि से क्यों पीड़ित है ? जवाब हैं इस देश के स्वेत रक्त कण का इस देश के दिमाग यानि आम जनता द्वारा नियंत्रित ना होकर जनता के सेवक यानि प्रधानमंत्री या PMO द्वारा पूरी तरह नियंत्रित होना / हमारे देश में ऐसे देशभक्त गुप्तचरों कि कमी नहीं जो देश को ह़र बीमारी से बचा सकता है,लेकिन जब ईमानदारी से कार्यकरने के बदले दुत्कार और चमचागिरी के बदले सम्मान मिले तो कैसे कैसे देशभक्त भी चुपचाप तमाशा देखने वाले बन जाते हैं / एक प्रधानमंत्री से आज के युग में यह आशा नहीं कि जा सकती हैं कि वह इन बेहद संबेद्न्शील एजेंसियों को देश हित के बजाय अपने या अपने दल के हितों कि रक्षा के लिए प्रयोग नहीं करेगा  ? ऐसे ही कारणों के वजह से CBI को कांग्रेस ब्यूरो ऑफ़ इन्भेसटीगेसन कहा जाने लगा है जो पूरे देश के साथ-साथ इमानदार गुप्तचर या जाँच अधिकारियों के लिए शर्मनाक बात है और ऐसे वातावरण की वजह से हमारे देश का स्वेत रक्त कण दूषित हो रहा है,जिसे साफ करने की जरूरत है / इसे साफ करने का एक सबसे कारगर उपाय है कि देश में जनशिकायत मंत्रालय की स्थापना कर देश के सभी जाँच एजेंसियों को इस मंत्रालय के अधीन कर दिया जाय और यह मंत्रालय देश के राष्ट्रपति के अधीन काम करे और इस मंत्रालय के तिन कार्यकारी मंत्री हो (१)प्रधानमंत्री (२)सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश  और (३) देश के मुख्य सुचना आयुक्त / इसके साथ ही इस मंत्रालय के लिए हर छह माह में एक बार पूरे देश के जनता के सामने अपने कार्यों का लेखा जोखा प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मिडिया के जरिये रखना अनिवार्य कर दिया जाय / इस मंत्रालय में देश के किसी कोने से कोई भी व्यक्ति कभी भी देश के शेहत को ख़राब करने वालों के खिलाफ शिकायत कर सकता हो और इस मंत्रालय को भेजे जाने वाले शिकायत के लिए देश के ह़र डाकघर को यह निर्देश जारी किया जाय कि जनशिकायत मंत्रालय को भेजे जाने वाले ह़र पत्र को बेहद गोपनीय सरकारी डाक माना जाय और  बेहद गोपनीय तरीके से मंत्रालय तक पहुँचाया जाय और शिकायत भेजने वाले से कोई शुल्क ना लिया जाय /  जब ऐसा होगा तब सही मायने में देश के स्वेत रक्त कण का नियंत्रण देश के असल दिमाग के द्वारा होगा जिससे देश का स्वेत रक्त कण देश को गम्भीर बीमारी से बचाने का काम सही मायने में कर पायेगा और उसकी पहुँच देश के ह़र कोने में बीमारी के पैदा होने वाने मूल कारणों तक होगा /         

Monday, April 12, 2010

प्राइवेट स्कूलों को फ़ीस देने कि जरूरत नहीं-------------------?

                       
प्राइवेट स्कूलों को फ़ीस देने कि जरूरत नहीं क्योंकि ये लालची और शिक्षा के नाम पड़ शिक्षा का सत्यानाश कर रहें हैं / इस देश में और शिक्षा का खासकर दिल्ली में सत्यानाश जितना इन प्राइवेट स्कूलों ने किया है उतना तो इन स्कूलों को बंद कर दिया जाय तो भी नहीं होगा / अब तो इनको ठीक करना है तो सभी अभिभावक आज से एकजुट होकर इनको फ़ीस देना बंद कर दें / उसके बदले अगर ये आपके बच्चे को परेशान करने या स्कूल से निकालने कि धमकी देते हैं तो डरें नहीं बल्कि इनको अपनी फ़ीस को एक शिक्षण संस्थान के चरित्र के आधार पर तय करने और नहीं करने पड़ कानूनी कार्यवाही करने से पहले दिया जाने वाला नोटिस हर अभिभावक स्कूल को दे और उसमे स्कूल द्वारा अभिभावकों को तरह-तरह से लूटने जैसे फ़ीस नहीं देने या पीछे पे कमिशन के नाम पड़ हर बच्चों से २००० से लेकर ८०००  तक उसूला गया और इसके लिए किसी का अडमित कार्ड नहीं देने कि धमकी दी गयी तो किसी को परीक्षा का रिजल्ट नहीं दिया गया ये सारी प्रतारणा कि बातें जरूर लिखें और एकजुट होकर ऐसे स्कूल कि खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए लोगों को एकजुट करें,ऐसा करने पड़ ही दिल्ली में शिक्षा वयवस्था सुधरेगी / खैर थक हार कर लोगों ने इनके धमकी के आगे घुटने टेक दिए ,ये स्कूल नहीं बल्कि शिक्षा के नाम पर लोगों का खून चूसने वाले भेडिये है / ऐसे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने से अच्छा तो अनपढ़ रखना होगा क्योंकि ऐसे स्कूल में पढ़कर तो बच्चा कम से कम इन्सान और इंसानियत के उसूलों को तो भूल ही जाएगा लेकिन अनपढ़ रहकर कम से कम इंसानियत को तो नहीं भूलेगा / हमारे देश के राष्ट्रपति महोदया और प्रधान मंत्री महोदय कृपया ध्यान दें, इस ओर / सिर्फ शिक्षा का कानून लाने से नहीं होगा बल्कि शिक्षा में और शिक्षा के व्यवसाय में इन्सान और इंसानियत को भी लाना होगा / आज देश को पढ़ा लिखा वयक्ति से ज्यादा इन्सान और इंसानियत कि जरूरत है ? जरा सोचिये क्या यही इंसानियत है कि ॐ और सदाचार को अपना आधार कहने वाला नरेला का एक स्कूल चौथी क्लास के बच्चे से हर माह १२३५ रुपया टिउशन फ़ीस ,१५० रुपया डेवेलोपमेंट फंड ,७५ रुपया पुपिल्स फंड ,४५० रुपया छह किलोमीटर के लिए यातायात शुल्क और १९०० रुपया ह़र साल सालाना शुल्क उसूलती है , क्या ऐसे शुल्क उसूलने वालों को स्कूल चलाने कि इजाजत सरकार को देनी चाहिए ? ऊपर दिए गए फ़ीस का विवरण चौथी कक्षा के चार दिन पहले जारी किये गए फ़ीस बुक के प्रमाणिक आधार पर आधारित है / आज से फ़ीस देना बंद और पैसों के लालची भेडियों के खिलाफ जंग शुरू , क्या आप हैं इस जंग के लिए तैयार ? अगर हाँ तो हमसे सलाह मशवरे के लिए कभी भी फोन करें -09810752301 हमें लगता है कि देश के महामहिम राष्ट्रपति महोदया को इस बेहद गंभीर मुद्दे पड़ हस्तक्षेप कर दोषी स्कूलों के खिलाफ जरूर कार्यवाही करना चाहिए / आप भी अगर ऐसा ही सोचतें हैं तो इस ब्लॉग पड़ देश के राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए अपनी पीड़ा और उसके समाधान महामहिम को बताएं या राष्ट्रपति भवन ,न्यू दिल्ली -११०००४ के पते पड़ पत्र लिखें और दिल्ली में शिक्षा कि दुर्दशा के बारे में बताएं / आप महामहिम को अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने में इन लालची स्कूलों द्वारा फ़ीस के नाम पड़ लूटने कि पीड़ा को presidentofindia@rb.nic.in पड़ इ मेल भी कर सकते हैं / देश के महामहिम तक इस गंभीर मुद्दे को पहुँचाना हमारा नागरिक कर्तव्य है / देश के राष्ट्रपति अगर चाहें तो एक दिन में इन स्कूलों को बंद किया जा सकता है और दिल्ली सरकार जो इन लालची स्कूलों के फायदे के लिए सरकारी स्कूलों को बदहाल करके रखती है और कडोरो रुपया शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा निदेशालय पड़ खर्च करती है का भी हिसाब दिल्ली सरकार को देना होगा /

Tuesday, April 6, 2010

भारत में लोकतंत्र नही बल्कि खुलेआम मंत्रितंत्र है --------------

भारत में लोकतंत्र को किस पार्टी ने खुलेआम मंत्रितंत्र में बदल कर रख दिया है यह तो मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता लेकिन हम क्या आज पूरा देश यह महसूस कर रहा है क़ी भारत मैं लोकतंत्र नहीं बल्कि मंत्रितंत्र है /कहते है दिल्ली भारत का दिल है और जिस लोकतंत्र का दिल सड़ गया हो वहाँ लोकतंत्र क़ी उम्मीद करना सबसे बड़ी मुर्खता कही जाएगी /अगर हमारी  बातों पर किसी को यकीन ना आये तो हमारी बातों पर गौर करने के साथ-साथ जरा संजीदगी से सोचिये -दिल्ली में कोई भी काम लोकतंत्र क़ी मर्यादा के दायरे में नहीं हो रहा है /उदाहरण कई है जैसे -शिक्षा मंत्री का काम होता है ,शिक्षा व्यवस्था को सही कर उसके व्यवसायीकरन को रोकना लेकिन पिछले तीन वर्षों में  दिल्ली में देश और प्रदेश दोनों के शिक्षा मंत्री के होते हुए भी दिल्ली में जितना शिक्षा का व्यवसायीकरन कर उसके स्तर को गिराया गया है उतना तो कभी किसी इन्सान ने सपने में भी नहीं  सोचा था /इसके कारण पर जब आप गौर करेंगे ,जिसकी चर्चा हर घर में होती है और लोग कहते हैं क़ी जब शिक्षामंत्री निजी स्कूलों से मिलकर अपना और अपने पार्टी के फंड को अरबों तक पहुँचाने का काम करेंगे तो शिक्षा और शिक्षा का असल मकसद ''बच्चों को संस्कार और चरित्र निर्माण क़ी ओर आगे बढाकर देश और समाज को मजबूत आधार प्रदान करना ''दोनों का सत्यानाश होना निश्चित है /शिक्षा व्यवस्था को सही मायने में हमारे देश क़ी सरकार सुधारना ही नहीं चाहती है क्योंकि लोग शिक्षित और विद्वान होंगे तो भ्रष्टाचार और सरकारी पैसे को भ्रष्ट मंत्रियों द्वारा अपने जागीर क़ी तरह इस्तेमाल करने के खिलाफ आवाज उठायेंगे जिससे देश में सुशासन आएगा जो भ्रष्ट और निकम्मे मंत्रियों का सेहत  ख़राब कर सकता है और इस देश में,देश और समाज क़ी सेहत बेशक ख़राब हो जाय लेकिन भ्रष्ट मंत्रियों के सेहत क़ी पूरी गारंटी के लिए इस देश का खजाना और आम लोगों क़ी जेब दोनों पूरी तरह खुली है /शर्म आती है ऐसे मंत्रियों पड़ और ऐसी व्यवस्था पड़ /ऐसे मंत्रियों को रखने से अच्छा तो किसी विभाग का कोई मंत्री ना हो तो अच्छा होगा / इसी भारत के दिल दिल्ली में किसी भी सरकारी विभाग का कामकाज दिल्ली के लोगों के सेहत को ठीक करने वाला नहीं बल्कि लोगों को मानसिक यातना देने वाला है /दिल्ली के बिभिन्न ट्रांसपोर्ट ऑथरिटी में स्टाफ क़ी कमी के कारण लोगों को लाएसेंस बनाने और उसे पाने में हजारों रूपये शुल्क देने के बाबजूद महीनों चक्कर काटना पड़ता है /इसी दिल्ली में अगर समाज सेवकों के समूह द्वारा हर सरकारी विभाग के कर्मचारियों के संख्या क़ी जाँच क़ी जाय तो हर विभाग में फर्जी कर्मचारियों क़ी संख्या पायी जाएगी जिन फर्जी नामों पर हर महीने में लाखों का भुगतान होता है जो भ्रष्ट मंत्रियों और अधिकारियों में बंदरबाँट किया जाता है और आम जनता जो सरकारी खजाने को एक माचिस के खरीदने से लेकर विभिन्न प्रकार के टेक्स देकर हर रोज भरती है,उसे सेवा और सुविधा के नाम पड़ हर जगह ठगा और परेशान किया जाता है /वहीँ दूसरी ओर उसी पैसे से भ्रष्टमंत्री और अधिकारी जनता का शोषण और अपना और अपने रिश्तेदारों का खूब सेवा करते हैं /यही है हमारा लोकतंत्र ,अब इसे लोकतंत्र कहें या मंत्रितंत्र ? हमारे नजर में ऐसी स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक है और ऐसी स्थिति का एक ही इलाज है क़ी जनता  द्वारा  हर सरकारी विभाग का हर दो महीने में सामाजिक जाँच जरूरी कर दिया जाय और जनता को किसी भी भ्रष्टमंत्री के ऊपर कभी भी भ्रष्टाचार का शक होने पर देश के इमानदार समाजसेवकों द्वारा जाँच कराने का अधिकार दिया जाय / ये कैसा लोकतंत्र है जहाँ आमआदमी आज अंग्रेजों क़ी जगह भ्रष्टमंत्रियों और अधिकारियों क़ी गुलामी का दंश झेल-झेल कर भूखे मरने को मजबूर है / आम जनता जो अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति तक को चुनती है,उसी जनता  के विचारों और सुझावों  को मंत्रिमंडल के किसी भी निर्णय में शामिल करना और आमलोगों पड़ उस निर्णय से पड़ने वाले दुष्प्रभाव से समाज में उत्पन्न होने वाली असंतुलन से देश को होने वाला भयंकर नुकसान के बारे में कोई भी शोध नहीं किया जाता है ,और ऐसा इसलिए होता है क़ी मंत्रिमंडल में बैठे लोगों के स्वार्थ सिद्धि का शोध और लोगों को कैसे अपने दो वक्त के रोटी के बारे में दिन-रात सोचते रहने और देश व समाज के बारे में नहीं सोचने का शोध किसी भी निर्णय से पहले जरूर कर लिया जाता है / हमारे ख्याल से तो आज के हालात से अच्छा तो इस देश में कोई भी मंत्री और मंत्रालय नहीं होता और जनता खुद खुले आसमान के नीचे एक इमानदार प्रतिनिधि को चुनकर उसे कोई कार्य करने को देती और उससे हर महीने खुले आसमान के नीचे भरी सभा में सवाल-जबाब करती / सही मायने में लोकतंत्र तब होता /इसलिए अगर इस मंत्रीतंत्र  को बदलना है तो सारे मंत्री को हटाकर सभी मंत्रालय को बंद कर दिया जाना चाहिए ,क्योंकि इन पड़ होने वाला खर्चा जनता के पैसों क़ी खुलेआम बर्बादी है /