प्रधानमंत्री का कुछ दिनों पहले ये बयान आया था कि देश में महंगाई तो बढ़ी है , लेकिन बेरोजगारी को बढने नहीं दिया गया है / लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश एक ऐसे दो राहे पर खड़ा है ,जिसके एक तरफ पेट भरने और अपनी शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए पढ़ी लिखी लड़कियां कलयुगी बाबाओं के साथ मिलकर देह व्यापार का सहारा ले रही है ,जिसका ज्यादातर प्रयोग सरकारी संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार कि व्यवस्था से ह़र गलत काम और कागजों में प्रोजेक्ट को पूरा दिखाकर करोड़ों रूपये के गवन के लिए भी किया जा रहा है / वहीँ दूसरी ओर पढ़े लिखे नौजवान सीधे रास्ते पेट न भरता देख ठगी और धोखेवाजी का व्यापार करने वालों के चक्रव्यूह में फ़स कर अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं / ये स्थिति देश के लिए ना सिर्फ शर्मनाक है बल्कि देश के आन्तरिक और बाहरी दोनों सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद खरनाक है / ऐसी स्थिति को रोकने के लिए लड़कियों के पढ़ाई को स्नातक स्तर तक सरकारी तथा गैर सरकारी स्कूलों और महाविद्यालयों में निःशुल्क करने के साथ-साथ ईमानदारी भरे इक्छा शक्ति के साथ ह़र गावं में उच्च विद्यालयों कि स्थापना और ह़र ब्लाक स्तर पर महाविद्यालयों कि स्थापना कर उसे ह़र माह समुचित सरकारी सहायता पहुँचाने का देश के प्रधानमंत्री कार्यालय से व्यवस्था कि जाय और उसकी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय खुद करे और संचालन का भार उस क्षेत्र के जनता को दे जिस क्षेत्र में विद्यालय और महाविद्यालय हो / रही लड़कों की बात तो स्नातक तक की शिक्षा पुड़ी कर चुके छात्रों को अस्थाई तौर पड़ सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में विशेष भ्रष्टाचार निवारण शोधकर्ता का काम दे और उन्हें देश भर में चल रहे सरकारी कार्यों के निगरानी और उसमे हो रहे अनियमितताओं तथा घोटालों की जाँच कि प्रगति रिपोर्ट प्रधानमंत्री के वेबसाइट पे ह़र हप्ते डालने को कहा जाय और उसके आधार पर दोषियों के खिलाप कार्यवाही की विवेचना करने व व्यवस्था को सुधारने का सार्थक प्रयास किया जाय / तब जाकर देश और देश के लोगों को थोडा सकून मिलेगा और भ्रष्टाचार के लिए पैसे के साथ-साथ शराब और शबाब के खतरनाक प्रयोग पड़ रोक लग सकेगा /
Saturday, April 17, 2010
भ्रष्टाचार के लिए पैसे के साथ-साथ शराब और शबाब का प्रयोग बेहद खतरनाक है -?
प्रधानमंत्री का कुछ दिनों पहले ये बयान आया था कि देश में महंगाई तो बढ़ी है , लेकिन बेरोजगारी को बढने नहीं दिया गया है / लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश एक ऐसे दो राहे पर खड़ा है ,जिसके एक तरफ पेट भरने और अपनी शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए पढ़ी लिखी लड़कियां कलयुगी बाबाओं के साथ मिलकर देह व्यापार का सहारा ले रही है ,जिसका ज्यादातर प्रयोग सरकारी संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार कि व्यवस्था से ह़र गलत काम और कागजों में प्रोजेक्ट को पूरा दिखाकर करोड़ों रूपये के गवन के लिए भी किया जा रहा है / वहीँ दूसरी ओर पढ़े लिखे नौजवान सीधे रास्ते पेट न भरता देख ठगी और धोखेवाजी का व्यापार करने वालों के चक्रव्यूह में फ़स कर अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं / ये स्थिति देश के लिए ना सिर्फ शर्मनाक है बल्कि देश के आन्तरिक और बाहरी दोनों सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद खरनाक है / ऐसी स्थिति को रोकने के लिए लड़कियों के पढ़ाई को स्नातक स्तर तक सरकारी तथा गैर सरकारी स्कूलों और महाविद्यालयों में निःशुल्क करने के साथ-साथ ईमानदारी भरे इक्छा शक्ति के साथ ह़र गावं में उच्च विद्यालयों कि स्थापना और ह़र ब्लाक स्तर पर महाविद्यालयों कि स्थापना कर उसे ह़र माह समुचित सरकारी सहायता पहुँचाने का देश के प्रधानमंत्री कार्यालय से व्यवस्था कि जाय और उसकी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय खुद करे और संचालन का भार उस क्षेत्र के जनता को दे जिस क्षेत्र में विद्यालय और महाविद्यालय हो / रही लड़कों की बात तो स्नातक तक की शिक्षा पुड़ी कर चुके छात्रों को अस्थाई तौर पड़ सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में विशेष भ्रष्टाचार निवारण शोधकर्ता का काम दे और उन्हें देश भर में चल रहे सरकारी कार्यों के निगरानी और उसमे हो रहे अनियमितताओं तथा घोटालों की जाँच कि प्रगति रिपोर्ट प्रधानमंत्री के वेबसाइट पे ह़र हप्ते डालने को कहा जाय और उसके आधार पर दोषियों के खिलाप कार्यवाही की विवेचना करने व व्यवस्था को सुधारने का सार्थक प्रयास किया जाय / तब जाकर देश और देश के लोगों को थोडा सकून मिलेगा और भ्रष्टाचार के लिए पैसे के साथ-साथ शराब और शबाब के खतरनाक प्रयोग पड़ रोक लग सकेगा /
Friday, April 16, 2010
भ्रष्टाचार अब लोगों का पैसा नहीं लूट रहा बल्कि क्या आम और क्या खास सबका खून चूस रहा है ------------ ?
जिस देश कि गावों में विधवा पेंसन के बदले लाचार और बेवस विधवाओं का भी देह शोषण किया जाता हो,गरीब और लाचार लोगों के कल्याण के विभिन्न योजनाओं का पैसा भ्रष्ट मंत्री,जनप्रतिनिधि और उसके असामाजिक चमचों द्वारा हजम कर लिया जाता हो,ऐसे में क्या जरूरत है इन लूटेरों कि जमात को सरकारी पद,मोटी तनख्वाह और बे हिसाब भत्ता देने कि ? आज क्या आम और क्या खास,ह़र किसी के जेहन में एक ही सवाल है कि -क्या आज इस देश में सरकार और सरकार द्वारा संचालित, कानून द्वारा रक्षित, और समाज द्वारा स्वीकृत व्यवस्था है ? भ्रष्टाचार अब लोगों का पैसा नहीं लूट रहा बल्कि क्या आम और क्या खास सबका खून चूस रहा है -?
आज इस बात पर चर्चा करने कि अति आवश्यकता है कि क्या यही लोकतंत्र है ,जिसे हमने देश भक्तों कि बलिदानी के कीमत के बदले अंग्रेजों से से पाया था और अब अंग्रेजों से भी बदतर और भ्रष्ट लोग इस देश कि ज्यादातर उच्च पदों पड़ बैठकर इस देश कि जनता का खून चूस रहें हैं / कौन पूछेगा ,कौन मांगेगा हिसाब,कौन मांगेगा जवाब ? बस बहुत हो चुका अब तो आम जनता को भड़ी सदन में प्रधान मंत्री,कृषि मंत्री और अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से सवाल कर जवाब मांगने का हक़ चाहिए ही चाहिए ?
यह अधिकार तब मिलेगा जब पूरे देश के इमानदार और देश भक्त लोग इसके लिए एकजुट होंगे और देश में इसके लिए वैचारिक क्रांति फैलायेंगे / इस बिषय पर अपने अमूल्य विचार और सुझाव हमारे इस पोस्ट सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए --------------के टिप्पणी बॉक्स में अपनी टिप्पणियों के रूप में दर्ज करें / आप इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी करने के साथ-साथ किसी के उम्दा टिप्पणियों पर टिप्पणी करके उसकी सराहना भी कर सकते हैं / अगर आपकी टिप्पणी उम्दा हुई और उसे सबसे ज्यादा लोगों ने सराहा तो आपको इनाम से सम्मानित भी किया जा सकता है /
अब ब्लोगरों को अपने टिप्पणियों और सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों पर ह़र हप्ते मिलेगा इनाम / इनाम कि राशी अकाउंट पेयी चेक द्वारा कुरिअर से उनके घरपर पहुँचाया जायेगा ---------
आज से ही ब्लोगरों को अपने अच्छे सोच पर इनाम के रूप में कमाने का मौका / http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/ ने अपने पोस्ट सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए -------------- पर देश हित में ईमानदारी और गंभीरता से किये गए टिप्पणियों पर और उन में से सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों को कटेगरी 1-सबसे गंभीर टिप्पणी और केटेगरी 2-सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणी इन दोनों केटेगरी में ब्लोगरों को अपने टिप्पणियों और सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों पर ह़र हप्ते मिलेगा इनाम / इनाम कि राशी अकाउंट पेयी चेक द्वारा कुरिअर से उनके घरपर पहुँचाया जायेगा / इनाम कि सूचना ह़र हप्ते के सोमबार को इस पोस्ट के सबसे ऊपर प्रकाशित किया जायेगा और इनाम का चेक मंगलवार को विजेता के पते पर ह़र हाल में भेज दिया जायेगा / ह़र हप्ते दोनों केटेगरी में इनाम कि राशी 500रुपया प्रति केटेगरी होगा / इन दोनों केटेगरी का इनाम किसी एक व्यक्ति को भी मिल सकता है अगर किसी ब्लोगर का टिप्पणी सबसे उम्दा हुआ और सबसे ज्यादा लोगों द्वारा सराहा भी गया तो /
इसमें एक ब्लोगर के लिए भाग लेने के दो मौके होंगे ,दोनों केटेगरी यानि एक बार तो आप अपनी उम्दा टिप्पणी कर सकते हैं और दूसरी बार किसी के टिप्पणी पर अपनी टिप्पणी कर सकते हैं / इस देश हित के इनामी प्रतियोगिता कि शुरूआत आज रात दिनांक 17/04/2010के ठीक 12.01 मिनट AM से होकर पूरे दो महीने यानि 13/06/2010के रात्रि 11.59PM तक होकर समाप्त होगा / इसमें कुल 16 ब्लोगर इनाम पा सकेंगे क्योंकि इस हप्ते में सिर्फ दो दिन शेष रहने कि वजह से पहले इनाम कि घोषणा 26/04/2010को और अंतिम इनाम कि घोषणा 14/06/2010को किया जायेगा और हर हाल में पहले इनाम कि राशी 27/04/2010को और अंतिम इनाम कि राशी 15/06/2010को विजेता ब्लोगर को भेज दिया जायेगा / इनाम तो इनाम कि जगह है लेकिन देश हित में आपकी सोच और विचारों को हम क्या कोइ भी किसी इनाम से नहीं तौल सकता है ? आपका देश हित का सोच अपने आप में अमूल्य और इस देश के उच्च संस्कार कि निशानी है / आशा है आप हमारे इस प्रयास में अपनी विचारों कि भागीदारी देने के साथ-साथ अपने मित्रों को भी प्रोत्साहित करेंगे / कृपा करके कम से कम 100 शब्द जरूर लिखें / आपका जय कुमार झा -09810752301 पर आपके किसी सवाल के जवाब के लिए भी हरदम तैयार बैठा है /
सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए --------------
आज जब पूरा देश भ्रष्टाचार और तर्कसंगत न्याय का अभाव नामक गंभीर बीमारी के चपेट में पूरी तरह आ चुका है और ज्यादातर मंत्री,सांसद और विधायक सौदेबाजी और भ्रष्टाचार के वजह से आम जनता के हितों और मूलभूत जरूरतों के सरोकार को भूल चुकें हैं / जिसके वजह से आम जनता के लिए देश के संसद और राज्य कि विधानसभाओं का मतलब किसी भी मुद्दे को उठाकर पक्ष और बिपक्ष द्वारा आपस में सौदेबाजी से ज्यादा कुछ भी नहीं रह गया है ? ऐसे में देश के संसद और राज्यों के विधानसभाओं पर जनता के मेहनत कि कमाई के पैसों के सदुपयोग और इन संस्थाओं कि उच्च मर्यादाओं को बनाये रखने तथा इसके असल उद्देश्यों को जनता के बीच प्रभावी बनाने के लिए,देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए, जिसमे सिर्फ जनता को मंत्रियों और अपने जनप्रतिनिधियों से प्रश्न पूछने का अधिकार होगा और संसद के सभापति जनता के प्रश्न काल को संचालित करेंगे / इस दो महीनों के दौरान देश के प्रधानमंत्री और राज्यों में मुख्य मंत्री समेत सभी सांसद,विधायक और मंत्री का सदन में मौजूद रहना अनिवार्य होगा / जिससे किसी भी क्षेत्र कि जनता को प्रश्न पूछने वक्त किसी मंत्री या प्रतिनिधियों के अनुपस्थित रहने कि वजह से अपने प्रश्न का जवाब सुनने से वंचित न रहना पड़े / इस दो महीने के दौरान प्रश्न कौन पूछेगा और प्रतिदिन कितने लोग प्रश्न पूछेंगे इसका फैसला प्रश्न पूछने वाले जनता कि संख्या पर निर्भर करेगा,लेकिन इतना तो तय रहेगा कि प्रतिदिन चालीश बिभिन्न क्षेत्रों के जनता के चालीश प्रश्नों का उत्तर मंत्रियों या जनप्रतिनिधियों (जनता जिससे जवाब मांगेगी,यह जनता तय करेगी कि उसे जवाब किससे चाहिए) उन्हें जवाब देना होगा साथ-साथ जवाब कि लिखित प्रतिया भी प्रश्न पूछने वाले जनता को मुहैया कराया जाना अनिवार्य होगा / लेकिन इस प्रश्न पूछने वालों के लिए आवेदन सिर्फ कम से कम दसवीं पास जनता ही कर पायेगी / देश भर के जनता से इस प्रश्न काल में प्रश्न पूछने के लिए आवेदन मंगवाए जायेंगे और दो महीने में औसतन ५० दिन गुना ४०जनता =२०००जनता प्रति सदन का चुनाव इस दो महीने के खास प्रश्न काल के लिए किया जायेगा / जनता का चुनाव आवेदन कि योग्यता के आधार पर चुने गए आवेदकों का देश के इमानदार सम्मानित समाजसेवकों के द्वारा किये गए ड्रा द्वारा किया जायेगा और चुने हुए प्रश्न कर्ता जनता को उनके अपने शहर के नजदीकी रेलवे स्टेशन से राज्य कि राजधानियों या दिल्ली तक का स्लीपर क्लास का मुफ्त रेल पास आने तथा जाने के लिए जारी किया जायेगा साथ ही उनके खाने के खर्च के लिए ५०० रुपया प्रतिदिन के हिसाब से कुल पाँच दिन के २५०० रुपया भी दिया जायेगा / प्रश्न करता को प्रश्न अपने क्षेत्र के सांसद,विधायक,मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री या किसी भी विभाग के मंत्री में से किसी एक से भरी सदन के सामने पूछने का अधिकार होगा / प्रश्न और उसके विषय का चयन प्रश्न कर्ता जनता को अपने प्रश्न काल के नियत दिन से दस दिन पहले या कम से कम दो दिन पूर्व सदन के उस सभापति को बताना होगा जिस सदन में वह प्रश्न पूछना चाहता है / जनता सिर्फ अपने राज्य के दोनों सदनों या देश के दोनों सदनों में से किसी एक में प्रश्न पूछ सकती है / सही मायने में ऐसा कर के ही इस लोकतंत्र में जनता के पैसों को कुछ स्वार्थी और भ्रष्ट लोगों के द्वारा लूटने और जनता को भूखे मरने से बचा सकने के साथ-साथ आम लोगों का विश्वास लोकतंत्र में बहाल करने का काम कर पाएंगे / सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस विषय पर अपने विचार और गंभीर सुझाव जरूर दें और अपने-अपने ब्लॉग पर भी लोकतंत्र के मजबूती और पारदर्शिता के लिए कम से कम एक ब्लॉग गंभीरता से जरूर लिखें जिसमे इस प्रश्न काल को और प्रभावी बनाने का सुझाव दें /
Thursday, April 15, 2010
सरकार मिले तो वार्ता अरुंधती रॉय मिले तो नक्सलियों को सहायता -----?
हिंसा को को किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता,लेकिन छतीसगढ़ में हुई हिंसा के मूल कारणों पर तर्कसंगत बिवेचना कि जरूरत है न कि अरुंधती रॉय का नक्सलियों से मिलने और न मिलने पर बहस कर इस गंभीर मुद्दे के बहस को गलत दिशा में मोड़ देने कि / नक्सलियों से किसी भी आम नागरिक को हिंसा का रास्ता त्यागने और अपनी बात अहिंसक तरीके से रखने को प्रेरित करने का हक़ है तो अरुंधती रॉय ने कौन सा नक्सलियों को हथियारों का जखीरा पहुंचा दिया जो इस पर छतीसगढ़ पुलिस अरुंधती रॉय के खिलाप कार्यवाही कि बात सोच रही है ? शर्म आती है ऐसे विचारों को सुनकर छतीसगढ़ पुलिस को अपना निकम्मापन नहीं दिखता है जिससे छतीसगढ़ में नक्सलियों कि ताकत इतनी बढ़ गयी,राष्ट्रिय ख़ुफ़िया एजेंसियों को अपना निकम्मापन नहीं दीखता है जिससे नक्सलियों के पास अत्याधुनिक हथियार पहुँच गए जिससे वे इतने बड़े हत्याकांड को अंजाम दे सके / निश्चय ही ये कुछ ऐसे कारण है जिसकी जाँच कि जाने कि जरूरत है साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं को नक्सलियों से मिलने से रोकने के बजाय भ्रष्ट राजनीतिज्ञों पर खुफिया नजर रखने कि जरूरत है क्योंकि ये अपने फायदे के लिए नक्सली क्या आतंकवादी तक का सहारा ले सकते हैं और इनको देश और समाज कि परवाह कहाँ / सही मायने में नक्सली हिंसा के लिए व्यवस्था में उच्च पदों पर बैठे भ्रष्ट और गद्दार लोग जिम्मेवार हैं ना कि अरुंधती रॉय जैसे बुद्धिजीवी / इसलिए जरूरी है कि ऐसे गद्दारों कि पहचान कि जाय और इनको हर हल में व्यवस्था से बाहर रक्खा जाय,तब जाकर नक्सली हिंसा पर काबू लग पायेगा / साथ-साथ छतीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में सामाजिक संतुलन और गरीबों के कल्याण के फंड को हर हल में गरीबों के हाथों तक पहुँचाने के ठोस उपाय और गरीबों के फंड को खाने वाले भ्रष्ट मंत्रियों के चमचों और अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने कि / सरकार इस और ध्यान दे तो अच्छा रहेगा रही नक्सलियों से वार्ता कि बात तो यह काम तो देश के इमानदार समाज सेवकों को ही करने देना चाहिए क्योंकि वे सरकार से अच्छी वार्ता कर सकते हैं ,बस जरूरत है सरकार द्वारा उस वार्ता के परिणामों को ईमानदारी से लागू करने कि ? अगर ऐसा होता है तो इस देश में सही मायने में लोकतंत्र होगा /
Wednesday, April 14, 2010
सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और कमजोर चरित्र कहिं भारत को बर्बाद न कर दे ------?
जरा सोचिये जो व्यक्ति अपने धर्म पत्नी के प्रति बफादार नहीं हो सकता,वह व्यक्ति समाज और देश के प्रति क्या बफादारी निभाएगा ? सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और उच्च पदों पर कमजोर चरित्र के लोगों कि आसान पहुंच से आज ह़र सच्चा,इमानदार,चरित्रवान और देशभक्त भारतीय नागरिक के मन में एक आशंका बलवती होती जा रही हैं कि कहीं ये सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और कमजोर होता चरित्र भारत को बर्बाद न कर दे / आज अगर आप ईमानदारी के राह पर चलकर और चरित्र कि मजबूती को आधार बनाकर किसी भी क्षेत्र में कामयाबी पाना चाहते हैं तो निश्चय ही आप भारतरत्न कि उपाधि से भी बड़े उपाधि के हक़दार हैं, क्योंकि आज दिमाग जो ह़र मनुष्य के शरीर में होता है और वह ही मनुष्य के ह़र शक्ति का केंद्र होता है,लेकिन जब शरीर भूख से तड़पता है तो ह़र दिमाग में इतनी ताकत नहीं रह जाती है कि वह अपने शरीर और अपने व्यवहार को इंसानी उसूलों के अनुसार चला सके / यही वजह है कि कई बुद्धिजीवी भी कई बार पेट भरने के लिए अमानवीय व्यापार चलाने वालों के टीम में शामिल होकर उनके व्यापार को अपनी बुद्धि के बल पर आसमान कि बुलंदियों पर पहुंचा देते हैं,ये अलग बात है कि ऐसा करके वे अपने बुद्धि का ना सिर्फ दुरूपयोग करते हैं बल्कि समूची मानवता को शर्मसार करने का काम करते हैं / आज कुछ इसी प्रकार का काम देश के कई बड़े पत्रकार कर रहें हैं जिससे खोजी पत्रकारिता लगभग बिलुप्त होती जा रही है और ह़र चेनल या अखवार पर किसी मानवीय पहलुओं को छूते हुए टिप्णियों और सार्थक विवेचनाओं कि जगह उच्च पदों पर बैठे लोगों के एक पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी या उनके अनैतिक प्यार और कमजोर चरित्र को उनके तगमे और उपाधियों कि तरह प्रचारित किया जाना निश्चय ही गंभीर सामाजिक असंतुलन और कमजोर चरित्र को बढ़ावा देने का काम कर रहा है / (काश इन पत्रकारों के मन से भगवान लोभ-लालच निकाल कर देश और समाज के भलाई का लालच भर देतें तो आज से ही देश में सामाजिक संतुलन कि शुरुआत होने लगती /) जिसके वजह से हमारे समाज के नयी पीढ़ी जिनका दिमाग परिपक्वता कि ओर अग्रसर होता है, अपने देश के उच्च पदों पर बैठे लोगों के इस कमजोर चरित्र के गुण अबगुण को समझे वगैर उसे एक रोल मोडल के रूप में अपने दिमाग में बैठाकर अपने चरित्र को कमजोर होने से नहीं रोक पाते हैं / ऐसी स्थिति किसी भी सभ्य समाज और खासकर भारतीय संस्कृति के लिए खतरे कि घंटी है /
आज कोई भी पत्रकार खोजी पत्रकारिता जैसे खतरों पे चलकर भूखे मरने और अपने बीवी बच्चों को भूखे मरने को मोहताज करने के वजाय पत्रकारिता को भ्रष्ट और सत्ता के दलालों के हाथों बेचकर अपना और अपने बच्चों का जीवन सुखी और मजेदार बनाने को तरजीह देता है / हलांकि उनके इस कदम से ना तो सही मायने में उनका और ना ही उनके बच्चों का भला होता हैं बल्कि देश के गद्दार और बेहद भ्रष्ट लोग जो सरकारी खजाने को लूटतें हैं को सरकारी खजाना जो जनता के कल्याण के लिए प्रयोग होना चाहिए था को जनता के लिए कागजों में प्रयोग हुआ दिखाकर खुलेआम लूटने कि इजाजत जरूर मिलजाती है / आज देश में आर. टी . आई कानून होने के बाबजूद लोग इस कानून का प्रयोग करने से डरतें हैं क्योंकि मिडिया ऐसे लोगों को तरजीह और समुचित जगह नहीं दे पाती है जिससे ऐसे लोगों पर भ्रष्ट लोग हमला करने से नहीं चूकते जो देश में सही मायने में लोकतंत्र को मजबूत करने का काम करना चाहते हैं वहीँ दूसरी ओर भ्रष्ट लोगों के वाहवाही और उनके कमजोर चरित्र का बखान मिडिया में सुर्खियाँ बनने कि वजह से भी इमानदार लोगों का हौसला पस्त होता है,फिर भी कुछ लोग इन बेहद विपरीत परिस्थितियों के बाबजूद निडरता से देश और समाज के भले के लिए काम कर रहें हैं / ऐसे लोगों को हमारा पूरे देश के लोगों के तरफ से सलाम और देश के लोगों से एक अपील कि अगर कोई है जो ऐसा काम आपके क्षेत्र में कर रहा तो उसकी पूरी मदद कीजिये ,क्योंकि सिर्फ ऐसे लोग ही इस देश और समाज को सामाजिक असंतुलन और कमजोर चरित्र के दलदल से बाहर निकाल सकता है / ऐसे लोगों के बारे में कृपा कर मुझे भी बताने का कष्ट करें क्योंकि ऐसे लोग निश्चय ही आज के महात्मा गाँधी ,भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे स्वतंत्रता सेनानी हैं जिनका दर्शन मात्र ही किसी को सही राह पर चलने को प्रेरित कर सकता है /
Tuesday, April 13, 2010
किसी देश का स्वेत रक्त होता है उस देश कि गुप्तचर या खुफिया संस्था -------------
जिस तरह मानव शरीर को किसी भी रोग से बचाने के लिए ह़र मानव शरीर में दो तरह के रक्त (RBC)यानि लाल रक्त कण (WBC) यानि स्वेत रक्त कण होता है /इस में से (WBC)यानि स्वेत रक्त का काम किसी भी रोग से पूरे शरीर कि रक्षा करना होता है और यह पूरी तरह मानव शरीर के दिमाग द्वारा नियंत्रित होता है और जब यह कमजोर या अप्रभावी हो जाता है तो मानव शरीर कई रोगों के चपेट में आ जाता है / ठीक उसी तरह किसी देश का स्वेत रक्त होता है उस देश कि गुप्तचर या खुफिया संस्था / क्या आप जानते हैं अपने देश के स्वेत रक्त यानि गुप्तचर संस्थाओं के नाम ? लीजिये हम आपको बता देते हैं भारत जैसे लोकतंत्र शरीर के स्वेत रक्त कण का नाम (१)RAW रिसर्च एंड अनल्यसिस विंग (२)IB इंटेलिजेंस ब्यूरो (३)DIA डिफेन्स इंटेलिजेंस एजेंसी ये तिन हमारे देश के मुख्य स्वेत रक्त कण हैं / इनकी सहायता के लिए और भी कई सरकारी एजेंसियां हमारे देश में कार्यरत हैं / अब सवाल उठता है की अड्बों रुपया इन एजेंसियों के प्रोजेक्ट और इन में कार्यरत कर्मचारियों पड़ हर साल खर्च करने के बाबजूद हमारा देश कई गंभीर रोगों जैसे भ्रष्टाचार,कानून का खौफ का ना होना,भ्रष्ट लोगों का सांसद और मंत्री पद पड़ बैठ कर अपने रिश्तेदारों और चमचों को फायदा पहुँचाने के लिए देश कि आम जनता और देश को खुलेआम लूटना ,इत्यादि से क्यों पीड़ित है ? जवाब हैं इस देश के स्वेत रक्त कण का इस देश के दिमाग यानि आम जनता द्वारा नियंत्रित ना होकर जनता के सेवक यानि प्रधानमंत्री या PMO द्वारा पूरी तरह नियंत्रित होना / हमारे देश में ऐसे देशभक्त गुप्तचरों कि कमी नहीं जो देश को ह़र बीमारी से बचा सकता है,लेकिन जब ईमानदारी से कार्यकरने के बदले दुत्कार और चमचागिरी के बदले सम्मान मिले तो कैसे कैसे देशभक्त भी चुपचाप तमाशा देखने वाले बन जाते हैं / एक प्रधानमंत्री से आज के युग में यह आशा नहीं कि जा सकती हैं कि वह इन बेहद संबेद्न्शील एजेंसियों को देश हित के बजाय अपने या अपने दल के हितों कि रक्षा के लिए प्रयोग नहीं करेगा ? ऐसे ही कारणों के वजह से CBI को कांग्रेस ब्यूरो ऑफ़ इन्भेसटीगेसन कहा जाने लगा है जो पूरे देश के साथ-साथ इमानदार गुप्तचर या जाँच अधिकारियों के लिए शर्मनाक बात है और ऐसे वातावरण की वजह से हमारे देश का स्वेत रक्त कण दूषित हो रहा है,जिसे साफ करने की जरूरत है / इसे साफ करने का एक सबसे कारगर उपाय है कि देश में जनशिकायत मंत्रालय की स्थापना कर देश के सभी जाँच एजेंसियों को इस मंत्रालय के अधीन कर दिया जाय और यह मंत्रालय देश के राष्ट्रपति के अधीन काम करे और इस मंत्रालय के तिन कार्यकारी मंत्री हो (१)प्रधानमंत्री (२)सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और (३) देश के मुख्य सुचना आयुक्त / इसके साथ ही इस मंत्रालय के लिए हर छह माह में एक बार पूरे देश के जनता के सामने अपने कार्यों का लेखा जोखा प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मिडिया के जरिये रखना अनिवार्य कर दिया जाय / इस मंत्रालय में देश के किसी कोने से कोई भी व्यक्ति कभी भी देश के शेहत को ख़राब करने वालों के खिलाफ शिकायत कर सकता हो और इस मंत्रालय को भेजे जाने वाले शिकायत के लिए देश के ह़र डाकघर को यह निर्देश जारी किया जाय कि जनशिकायत मंत्रालय को भेजे जाने वाले ह़र पत्र को बेहद गोपनीय सरकारी डाक माना जाय और बेहद गोपनीय तरीके से मंत्रालय तक पहुँचाया जाय और शिकायत भेजने वाले से कोई शुल्क ना लिया जाय / जब ऐसा होगा तब सही मायने में देश के स्वेत रक्त कण का नियंत्रण देश के असल दिमाग के द्वारा होगा जिससे देश का स्वेत रक्त कण देश को गम्भीर बीमारी से बचाने का काम सही मायने में कर पायेगा और उसकी पहुँच देश के ह़र कोने में बीमारी के पैदा होने वाने मूल कारणों तक होगा /
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