Tuesday, May 25, 2010

राष्ट्रिय ब्लॉग और ब्लोगर विकाश व सुरक्षा संगठन कैसा हो ------?

आज देश में लाखों संगठन हैं, जो वजूद में हैं ,जिनमे से कुछ संगठन ही हैं जो जनसहयोग से जमीनी स्तर पर सही मायने में सार्थक काम कर रही है / ज्यादातर संगठन ऐसे भी हैं जो सिर्फ NGO के सरकारी फंड और सामाजिक विकाश के योजनाओं में सरकारी भ्रष्ट व्यवस्था के लिए पैसों कि बन्दर बाँट में सिर्फ और सिर्फ दलाली के अलावा कुछ भी नहीं कर रही है और ऐसे संगठनों ने अच्छे संगठनों के साख में भी बट्टा लगाकर उसके तीब्र विकाश में बाधा खरा करने का काम किया है / 
दरअसल किसी भी संगठन के सफलता के लिए उसका पारदर्शी,जनहित से जुड़ाव,लक्ष्यों के प्रति कठोरता,कार्यकर्ताओं कि समुचित सुरक्षा और इमानदार जनसहयोग आधारित आर्थिक आधार बहुत जरूरी है /
आज सारी समस्याओं के मूल में पारदर्शिता का अभाव,निगरानी व्यवस्था का नाश और इन्सान के जमीर का खत्म हो जाना मुख्य है / आज भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है उसकी वजह है कि मंत्रियों और अधिकारियों को पता है कि कोई पूछने वाला नहीं आ रहा है /
आज समाज में किसी भी सत्य,न्याय और इंसानियत के समर्थन में उठे आवाज को तुरंत कुचल दिया जाता है या सामाजिक आतंक जिनका सम्बन्ध भ्रष्ट व्यवस्था से है ,के द्वारा अपने कुतर्क और तिकरम से सही व्यक्ति को ही गलत साबित कर दिया जाता है और सारा समाज आतंक कि वजह से एक शब्द भी नहीं बोल पाता है / हमारी न्याय व्यवस्था पर इस तरह का प्रभाव डालने वाला कोई भी संगठन नहीं है जो सत्य कि रक्षा हर हाल में हो ,चाहे उसके लिए वादी और प्रतिवादी दोनों का ही ब्रेनमेपिंग  व लाई डिटेक्टर टेस्ट क्यों न करवाना परे ,के लिए न्याय व्यवस्था को मजबूर कर सके / जरा सोचिये आप सच बोल रहें हों और तिकरम तथा आतंक कि वजह से उसे गलत साबित कर दिया जाय तो क्या दुबारा आप ऐसा सत्य बोलने का जोखिम उठाएंगे ?  आज समाज और देश में हर जगह यही हो रहा है और मानवता कराह रही है /
संगठन बन रहें हैं लेकिन इसलिए कि सभी सदस्यों को महानगर में बड़ा बंगला ,बड़ी कार और अय्यासी का साधन मिले और सत्ता के भ्रष्टाचार कि गंगा में डुबकी लगाया जाय / ऐसे संगठन समाज और देश के लिए घातक हैं /
हाँ हर व्यक्ति का इतना स्वार्थ तो होना चाहिए कि किसी भी ईमानदारी भरे कार्य को कर वह अपना,अपने दो बच्चों का सात्विक भोजन से पेट भर सके और अपनी मूल भूत जरूरतें पूरी कर सकें / हमारे देश में समाज को सार्थक बदलाव और सही दिशा देने वाला दो ही पद है और वह है IAS और IPS सिर्फ ये अगर इमानदार हो जायें या इनसे अगर हम ईमानदारी से काम किसी भी तरह करा सकें तो इस देश के भ्रष्ट मंत्री भी असहाय हो जायेंगे / लेकिन इस देश का दुर्भाग्य है कि जनता के पैसों से मोटी तनख्वाह पाने के बाबजूद ये जनता को लूटने का ही काम कर रहें हैं / आज इनके द्वारा किये गए गलत कार्यों का कोई भी संगठन ईमानदारी से जाँच कर इनके ऊपर न्यायिक  कार्यवाही हो तथा इनको सजा मिले इसके लिए ठोस प्रयास नहीं कर रही है ,जिसकी वजह से समाज में इंसानियत मरती जा रही है /
हमारा मानना है कि इमानदार पत्रकारों को आर्थिक सहायता नहीं मिलने कि वजह से मिडिया मर चुकी है या भ्रष्टाचार के तलवे चाट रही है / ऐसे में अगर हमसब ब्लॉग को एक सशक्त मिडिया,समाज में जागरूकता और हर सच्चे,अच्छे,इमानदार इन्सान को देश व्यापी सुरक्षा प्रदान करने वाले साधन के रूप में इस्तेमाल करें तो सबसे बेहतर होगा और प्रभावी भी / इसके लिए हमलोगों को राष्ट्रिय स्तर पर एक संगठन बनाना चाहिए और उसे आपस में ही नहीं हर किसी के लिए पारदर्शी भी बनाना चाहिए / रही इसके लिए आर्थिक आधार कि बात तो शुरुआत हम सब आपसी स्वेक्षिक  सहयोग से कर सकते हैं / उसके बाद अगर हमें किसी अच्छे उद्देश्य के लिए पूरे देश के नागरिकों को जोड़कर  उनसे कुछ मांगना भी परता है तो हमें शर्म नहीं करनी चाहिए / हमें किसी भ्रष्ट मंत्री ,पार्टी या भ्रष्टाचार में सहयोग देकर आर्थिक आधार बनाने में शर्म महसूस करना चाहिए / ऐसा करने से तो अच्छा रहेगा हम पूरे देश से एक बार दस रूपये का भीख मांग लें ,अगर नेक उद्देश्यों के लिए हमें पच्चीस करोड़ लोग भी दस रुपया दे देंगे तो तो हमारा ईमानदारी भरा आर्थिक आधार बन जायेगा और हम ईमानदारी व निडरता के साथ देश ,समाज और इंसानियत कि सेवा कर पाएंगे / हमारे ख्याल में ऐसा करने से  ब्लोगरों के संगठन को देश के हर गाँव तक पहुँचाया जा सकेगा और लोग इस संगठन से हार्दिक रूप से जुरेंगे  / यह हमारा विचार है वैसे इस पे बहस और आप सब के सार्थक राय से ही अमल या परिवर्तन किया जायेगा / कोई महानुभाव अगर हमें इस बारे में सुझाव देना चाहते हैं तो हमें फोन कर सकते हैं -09810752301पर या इ.मेल-honstyprojectdemocracy@gmail.com पर कर सकतें हैं / आप सबका स्वागत है एक नेक काम के एकजुटता के लिए  / हम आपके विचारों और सुझावों के लिए आपका सदा ऋणी रहेंगे /

Thursday, May 20, 2010

दिल्ली में इंसानियत बड़ा या हैवानियत ----?

 

जिसकी जान लेने कि कोशिस कि गयी वही और उसका परिवार आतंकित है ,निश्चय ही यह इंसानियत और मानवता के लिए शर्मनाक है / पिछले दिनों हमारा  सामना एक ऐसे घटना से हुआ है / जिससे हम यह पोस्ट लिखने के लिए बाध्य हुए हैं / हुआ ये कि 13 मई के रात 08:30 से 09:30 के बीच श्री वेश्य जो कि हमारे पडोस के 117 नंबर फ्लेट में रहते हैं / पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने जान लेवा हमला कर दिया / शायद हमलावर उनकी जान लेना भी चाहते थे ,लेकिन वो कहते हैं न कि जाको राखे साईया मार सके न कोई ,उनका जिन्दा बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं /  आज श्री वेश्य और उनका परिवार इतना डरा और आतंकित है कि उसे किसी से अब न्याय का आशा नहीं रहा और वह कुछ भी ऐसा बयान या नाम नहीं लेना चाहते ,जिससे समाज में आतंक फ़ैलाने वाले उनपर दुबारा हमला कर उनको पूरी तरह खत्म कर दे / दरअसल ये हमला सिर्फ श्री वेश्य पर नहीं बल्कि पूरी कानून और न्यायिक व्यवस्था पर है ,इसी तरह के हमलों से और ऐसे हमला करने वालों को नहीं पकड़ने से ही समाज में आतंक और भय का माहौल बनता जा रहा है और कानून व्यवस्था से लोगों का विश्वास उठता जा रहा है / मुझे लगता है हम और हमारी पुलिस जानबूझकर ऐसे लोगों को पकड़ना नहीं चाहती,जरा सोचिये कोई पुलिस का बड़ा अधिकारी अगर श्री वेश्य को यह विश्वास दिला पाता कि "आप घबराएँ नहीं आप सच-सच बताइए,आपका कुछ नहीं बिगार पायेगा कोई ,हम आपके साथ हैं " तो शायद श्री वेश्य और उनके परिवार को भी आतंक के खिलाप लड़ने में कुछ ताकत मिलता / लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा किसी भी पुलिस अधिकारी ने नहीं किया / रही बात शांति अपार्टमेन्ट के निवासियों कि  ,तो पता नहीं ,उनको किसका डर और भय सता रहा है ,एक दो व्यक्ति को छोड़कर कोई श्री वेश्य के अस्पताल से वापस आने के बाद उनका मानवता के नाते हाल-चाल भी पूछने नहीं गया / 

अब सवाल ये कि क्या ऐसे हमलों में ---

*अगर कोई पीड़ित  डर और आतंक से कार्यवाही नहीं करना चाहता तो, क्या कार्यवाही नहीं होनी चाहिए,दोषियों को पकड़ा नहीं जाना चाहिए ?

*क्या ये सिर्फ श्री वेश्य पर हमला है या पूरे समाज को आतंकित करने कि साजिश है ? 

*क्या कानून और प्रशासन का ये फर्ज नहीं बनता कि किसी भी कीमत पर ऐसे जघन्य अपराध करने वालों को पकड़ा जाय ?

*क्या दिल्ली पुलिस के मुखिया को खुद आकर श्री वेश्य का हाल-चाल पूछकर उनके साथ हुए इस घटना कि जाँच कि खुद निगरानी नहीं करनी चाहिए ?

*क्या ये न्याय का तकाजा नहीं कि एक पीड़ित व्यक्ति  ही अपनी व्यथा व्यक्त करने में आतंक अनुभव कर रहा है तो देश का राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और न्याय का सर्वोच्च मूर्ति को भी श्री वेश्य को न्याय दिलाकर समाज में आतंक और भय का वातावरण फ़ैलाने वालों को सख्त से सख्त सजा देने का प्रयास करना चाहिए,जिससे ऐसी शर्मनाक स्थिति को रोका जा सके / ये सिर्फ श्री वेश्य पे हमले का ही  मामला नहीं बल्कि समाज में आतंक और भय के व्याप्त   होने का गम्भीर मामला है /

हम यहाँ सबसे इंसानियत के नाते आग्रह कर रहें हैं कि आप चाहे पुलिस अधिकारी हों ,देश के प्रधानमंत्री हों ,देश के राष्ट्रपति हों , देश के सर्वोच्च न्याय मूर्ति हों या आम नागरिक / इस हमले के लिए जिम्मेवार व्यक्ति को पकड़ने और उसे सख्त से सख्त सजा दिलाने में अपना हर संभव सहयोग दें क्योंकि यह सिर्फ श्री वेश्य का मामला नहीं है बल्कि सामाजिक आतंकवाद का भी मामला है / जब आतंक से लोगों कि जुबान बंद हो जाती है तो कुछ लोग भगवान के रूप में न्याय करने आते हैं / याद रखिये हमलावर अगर आपका भाई भी है तो उसके खिलाप खड़े हो जाइये ,नहीं तो वह आपके ऊपर भी हमला एक न एक दिन जरूर करेगा / हमारी इस मुहीम का मकसद सिर्फ और सिर्फ हमलावर को पकड़कर सजा दिलाना है / क्योंकि ऐसे हमलावर पूरी इंसानियत के दुश्मन हैं ,यही बात पुलिस वालों को भी समझना चाहिए और इंसानियत को अपने कर्तव्य से भी बड़ा समझना चाहिए /

सभी ब्लोगरों से हमारा आग्रह है कि आप सब भी निम्नलिखित ईमेल पर ईमेल कर इस मेसेज को भेजकर / इंसानियत के नाते इस घटना के लिए जिम्मेवार लोगों को पकड़ने के लिए अपनी-अपनी तरह से आग्रह करें -ड्राफ्ट जो ईमेल करना है वह इस प्रकार है-----

"दिनांक 13 -05 -2010 के रात्रि लगभग 08 :30 से 09 :30 बजे के बीच नरेला थाना ,दिल्ली-40 के अंतर्गत आने वाले शांति अपार्टमेन्ट ,सेक्टर-A -5 ,पॉकेट-13 के फ्लेट नंबर 117 में श्री V.R वेश्य पे जान लेवा हमला हुआ इसकी ईमानदारी से जाँच कर जल्द से जल्द दोषियों को पकड़कर सजा देने का प्रयास करें / इंसानियत और पूरी व्यवस्था के लिए शर्मनाक है कि ,आज एक हफ्ता बाद भी हमलावरों को पकड़ा नहीं गया है / श्री  वेश्य व उनके परिवार कि समुचित सुरक्षा कि भी व्यवस्था तुरंत करें /"

इसे ईमेल करने के लिए कॉपी पेस्ट कर सकते हैं /

कुछ ईमेल जिस पर ईमेल कर आपलोगों को इंसानियत के नाते आग्रह करना है -

presidentofindia@rb.nic.in        ये राष्ट्रपति जी का ईमेल है  /
pmosb@pmo.nic.in                    ये प्रधानमंत्री जी का ईमेल है /
vpindia@sansad.nic.in               ये उपराष्ट्रपति जी का ईमेल है / 
ys.dadwal@nic.in                ये दिल्ली पुलिस के कमिश्नर जी का ईमेल है / 
jtcp-crime-dl@nic.in             ये संयुक्त आयुक्त अपराध जी का ईमेल है /
dcp-northwest-dl@nic.in    ये उपायुक्त उत्तर-पश्चिम दिल्ली जी का ईमेल है / 

आशा है आप लोग इंसानियत पे हुए हमले और समाज में आतंक व भय के खिलाप हमारे इस मुहीम में जरूर हमारा साथ देंगे / सूत्रों से पता चला है कि अभी तक श्री वेश्य को FIR कि कॉपी भी नहीं दी गयी है / राम जाने ये दिल्ली कि पुलिस ने FIR दर्ज भी किया है या नहीं / अगर नहीं दर्ज किया गया है तो ,ये पूरे मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है और इसके लिए जिम्मेवार लोगों को भी सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए /





Friday, May 14, 2010

ब्रेकिंग न्यूज़ , बेहद शर्मनाक है ,दिल्ली कि कानून व्यवस्था -----?

आज शाम शांति अपार्टमेन्ट ,सेक्टर A -5 ,POCKET -13 ,नरेला के फ्लेट नंबर -117 में कुछ बदमाश हमलावरों ने श्री V.R. VAISH के घर में घुस कर ,उनके ऊपर हमला कर उनको बुरी तरह लहूलुहान कर दिया / श्री VAISH को पीतमपुरा के MAX अस्पताल के इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है / अपुष्ट ख़बरों के अनुसार हमलावर चार थे /श्री VAISH काफी बृद्ध हैं और उनको कई लोग पहले से परेशान कर रहे थे ,जिसकी शिकायत उन्होंने नरेला थाने में पहले कई बार कि थी ,लेकिन पुलिस का लापरवाह और निक्कापन से भरा रवैया ,आज उनके इस हालत का जिम्मेवार है / अन्य ब्लोगर बंधुओं तथा प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मिडिया वालों के लिए हम उनका फोन नंबर यहाँ दे रहें  हैं  -09811163892 और 011 - 27787615 / हम कल जब श्री VAISH कि हालत में सुधार होगा तब इस घटना पर विस्तार से आप लोगों को तथ्यों पे आधारित जानकारी दुबारा देने कि कोशिस करेंगे / तब तक तो इतना ही कह सकते हैं कि " बेहद शर्मनाक है, दिल्ली कि कानून व्यवस्था"

Wednesday, May 12, 2010

कैसा हो न्यायिक जवाबदेही विधेयक------?


दोषी जजों को सजा देने के लिए सरकार न्यायिक जवाबदेही विधेयक पर काम कर रही है। निश्चय ही न्याय और न्याय करने वालों कि जवाबदेही तय होनी चाहिए ,क्योंकि आज देश और समाज कि जो हालत है ,उसका एक बड़ा कारण न्याय करने वालों कि जवाबदेही को पूरी तरह तय नहीं किया जाना और दोषियों को सख्त सजा नहीं दिया जाना भी है / हमारे हिसाब से एक कुकर्मी या अपराधी उस भ्रष्ट जज से कम गुनेहगार है ,जिस जज ने सुरा,सुन्दरी,पैसा और अपने निकम्मेपन से उन अपराधियों को सालों सजा होने से बचाने का काम किया है /

अब सवाल उठता है कि यह विधेयक कैसा हो जिससे न्याय ,जो कि आज भ्रष्टाचार कि वजह से देरी और फिर अन्याय में बदल जाता है ,को रोका जा सके / आज अदालतों कि कमी का रोना रोया जाता है ,लेकिन इस बात कि जाँच और विवेचना कोई नहीं करना चाहता है कि ,जिस केस का फैसला एक या दो तारीखों में हो जाना चाहिए था ,वही केस सालों और सैकड़ों तारीखों के बाबजूद भी ,फैसले का इंतजार करता रहता है / भ्रष्ट वकील ,भ्रष्ट जजों के साथ सांठ-गांठ कर गवाहों को डराने ,सबूतों को मिटाने और अपराधियों को बचाने जैसे गम्भीर कार्यों को अंजाम देते हैं ,यही नहीं ज्यादातर भ्रष्ट वकील और जज का इस देश में ठगी और सत्ता कि दलाली का भी धंधा जोरों पर चल रहा है / इन लोगों के साथ मिलकर कलयुगी बाबा और भ्रष्ट IAS और IPS भी समाज में आतंक का माहौल बनाकर भोले-भाले लोगों को डरा धमकाकर इस लोकतंत्र को शर्मसार करने का काम खुले आम कर रहें हैं /

अदालत एक ऐसी जगह है जिसके तरफ हर इमानदार,सच्चा और कानून का आदर करने वाला व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिए देखता है / लेकिन अगर उसी अदालत में जब किसी इमानदार,सच्चा और कानून का आदर करने वाले व्यक्ति को कानून को भ्रष्टाचार और अपराधियों के गठजोर द्वारा मसलते हुए देखने को मिलता है तो ,वह व्यक्ति कानून और न्यायालय को बेकार कि कसरत समझ कर खुद भी ,अपने तरीके से न्याय या उसकी भरपाई में लग जाता है और आज देश में यही हो रहा है /

अब क्या ऐसा किया जाय कि इस स्थिति को बदल कर न्याय और न्यायालय को एक बार फिर आम लोगों के नजर में अपराधियों के लिए खौफ और न्यायप्रिय लोगों के लिए सुरक्षा के रूप स्थापित किया जा सके ?

ऐसा हो सकता है जब सरकार इस न्यायिक जवाबदेही विधेयक को सही और ईमानदारी से तैयार कर उसमे ऐसे सख्त प्रावधान कि व्यवस्था करे कि अगर जानबूझकर किसी जज या वकील ने न्याय में देरी किया हो या न्याय को अन्याय में बदलने के लिए किसी कुकर्म जैसे  सुरा,सुन्दरी, पैसा,मकान,दुकान या किसी अन्य प्रकार से रिश्वत ली हो ,तो ऐसे वकीलों और जजों कि सेवा समाप्त कर उसपर न्याय का गला घोटने जैसे गंभीर अपराध के तहत मुकदमा चलाया जाय और इसमें सजा का प्रावधान फांसी और उम्र कैद तक हो और जिसे सख्ती से अमल में भी लाया जा सके / इस विधेयक में अगर ऐसी व्यवस्था कर दी जाय कि दो साल से ज्यादा लम्बे चल चुके मुकदमें का फैसला नहीं आने का कारण ,अगर मुकदमा करने वाले के नजर में भ्रष्टाचार और जज या वकील का निकम्मापन है तो वादी यानि मुकदमा करने वाले को जज और वकील के खिलाप न्याय में लापरवाही के तहत मुकदमा दर्ज करने का अधिकार हो / इस विधेयक में जजों को हर छः माह पर अपनी सम्पति और व्यवसाय कि जानकारी देना आवश्यक कर दिया जाय / जजों के चरित्र से सम्बंधित जानकारी भी सार्वजनिक किया जाय ,क्योंकि पारदर्शिता  लोकतंत्र  और न्याय दोनों के लिए अतिआवश्यक है /अगर किसी जज के 75% फैसले उच्च अदालतों में किसी नए सबूत के आये बिना ही पलट दिया जाय या उसे पलटने कि जरूरत परे तो उस जज को अयोग्य घोषित कर सेवा से स्वेक्षिक अवकाश दे दिया जाय / न्याय और न्यायिक व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ इमानदार,सामाजिक सोच और कानून के प्रति सम्मान रखने वालों के हाथ में सुरक्षित रहे ,इसके लिए सरकार को आम और खास इमानदार लोगों से विचार और सुझाव मंगवाकर इस विधेयक में शामिल करना चाहिए ,जिससे सही मायने में न्यायिक जवाबदेही तय कि जा सके / न्याय में किसी भी प्रकार कि भूल और लापरवाही बेहद खतरनाक है / हम इस दिशा में कानून के जानकार ब्लोगरों से आग्रह करेंगे कि वे भी इस विधेयक को ज्यादा से ज्यादा कारगर बनाने के लिए अपने विचारों और सुझावों को ब्लॉगजगत तथा सरकार दोनों को बताने का कष्ट करें /
 

Sunday, May 9, 2010

सत्यमेव जयते डे-------?


भारत के राष्ट्रिय चिन्ह में सत्यमेव जयते लिखा है ,जिसका मतलब शायद सत्य कि हमेशा विजय होती है ,ही है / लेकिन क्या वास्तव में या जमीनी हकीकत भी यह कहती है कि सत्य कि हमेशा विजय होती है ? इस सवाल का जवाब उस व्यक्ति या उस सच्चे इमानदार समाजसेवकों से जाकर पूछिये, जिनको सत्य या सत्य का साथ देने पर क्या- क्या दुःख-तकलीफ झेलनी पड़ी है और कितनी कुर्बानियां देनी पड़ी है /

सारा सरकारी तंत्र और व्यवस्था इस सत्यमेव जयते को कब्र में पहुँचाने का पूरी निष्ठां से प्रयास कर रही है /आज अगर आपने कहिं यह कह दिया कि मैं सत्यवादी और इमानदार हूँ तो समझिये आपसे ज्यादा अयोग्य व्यक्ति कोई है ही नहीं / सत्य और सत्य पर आधारित जाँच या कार्यवाही किसी को पसंद नहीं ,तभी तो किसी भी घटना कि जाँच इमानदार लोगों को सौपने कि वजाय ,ऐसे लोगों को सौपीं जाती है ,जिनका जाँच और तथ्यों को खोजने से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता / झूठि जाँच के आधार पर किसी बेकसूर और असहाय को बलि का बकरा बना कर तिकरम बाज अपना स्वार्थ सिद्ध कर लेते हैं और आम जनता सत्यमेव जयते के लिए तरसती रह जाती है / 

बाटला हाउस कांड हो या सामाजिक साजिश का शिकार निरुपमा का कांड / खोजी पत्रकारिता और सत्य के प्रति ज्यादातर लोगों का लगाव खत्म होने से सत्य का पता तो लग पाना अब एक सपना सा लगता है /

जरा सोचिये यह सरकार जिसका पहला कर्तव्य है कि सत्य कि खोज कर असल गुनाहगारों को सजा दिया जाय / वही बड़ी बेशर्मी से ,बाटला हाउस कांड कि न्यायिक जाँच को सिरे से नकार रही है / ऐसा करके वो ना सिर्फ सत्य का गला घोंटने का काम कर रही है ,बल्कि उन लोगों के दावों को और मजबूत बना रही है ,जिनका दावा है कि ये मुठभेर फर्जी और प्रायोजित था / सरकार का सत्य के प्रति ऐसा रवैया न्याय का भी खून करने का काम करती है ,होना तो ये चाहिए था कि सत्य के लिए और सत्य पे आधारित न्याय के लिए सरकारी खजाने का दरवाजा पूरी तरह खोल दिया जाता और सत्य कि रक्षा के लिए अलग से एक सामाजिक जाँच का भी प्रावधान कर देश के शिक्षित ,इमानदार,बुद्धिजीवियों,पत्रकारों और समाजसेवकों को भी इस कार्य के लिए सहयोग करने का आग्रह किया जाता / आज देश और समाज कि जो हालात हैं , उसमे सत्य कि रक्षा के लिए ठोस उपाय करना बहुत जरूरी है ,नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब सत्यमेव जयते को लोग झूठमेव जयते के रूप में पहचानने के लिए दिमागी तौर से तैयार हो जायेंगे /

इन सब हालात और सरकारी निकम्मापन को देखते हुए ,क्यों न हम लोग सत्यमेव जयते कि रक्षा के लिए अपने स्तर पे ह़र महीने में एक दिन "सत्यमेव जयते डे "के रूप में मनाकर ,उसे ह़र उस झूठ कि पोल खोलने के लिए इस्तेमाल करें ,जो हमारे आस-पास में सरकार या किसी असामाजिक तत्व द्वारा अपनाया गया है ,साथ ही इस दिन को हम अपने-अपने क्षेत्र में,सत्य के लिए लड़ रहे लोगों को ,एकजुट होकर तन,मन और धन से सहायता भी पहुँचाने का काम करें / मेरे ख्याल में ह़र महीने का 11 तारीख इसके लिए सबसे उपयुक्त रहेगा / जो भी हो ,सत्यमेव जयते कि रक्षा हम सब को मिलकर ही करना होगा ,क्योंकि सरकार तो इसकी रक्षा करने से रही / इसके लिए आज ही सोचिये और अपने क्षेत्र के लोगों को एकजुट करिये,आपका प्रयास ही सत्य और आपको बचा सकता  है /   

Friday, May 7, 2010

मार डालो इस डर को ? नहीं तो ये मार डालेगा आपको--------



आज मैं इस बात पर चर्चा करने जा रहा हूँ कि ,हमारे देश और समाज कि इस दर्दनाक अवस्था के लिए कौन सा तत्व जिम्मेवार है ?

मैंने जब गंभीरता से आज कि परिस्थितियों में लोगों के अन्याय के खिलाप आवाज को यथा संभव ताकत प्रदान करने और अपने अनुभवों तथा अपने शुभ चिंतकों से विचार विमर्श के आधार पर इस सवाल का हल ढूंढा तो पाया कि ,लोगों के अन्दर जो मृत्यु और झूठे अपमान का डर है ,यही इस देश और समाज को नरक कि ओर ले जाने वालों को ताकत प्रदान कर रहा है /

लोग अपने जान कि परवाह किये वगैर जिस दिन अन्याय,भ्रष्टाचार और इस देश को सत्ता कि उचाईयों पर बैठकर इस देश व समाज को लूटने और गरीबों कि रोटी खाने वालों के खिलाप लड़ने लगेंगे ,उस दिन से इस देश और समाज का काया पलटना शुरू हो जायेगा और ये सारे गिदर टायप लूटेरे दुम दबाकर भाग खड़े होंगे /
इसलिए मैंने तो मार दिया है इस डर को और आपसे भी आग्रह कर रहा हूँ कि "मार डालो इस डर को नहीं तो ,ये मार डालेगा आपको "-------

Thursday, May 6, 2010

ब्लोगर बतायें कि ,इस देश में न्याय कैसे जिन्दा रह सकता है ------?


हमारे द्वारा पिछले दिनों दिल्ली के आतंकवादी Resident Welfare Association के जमीनी हकीकत को जानने के अभियान में ऐसे-ऐसे मानवीय यातना और प्रतारणा के उदाहरण मिले,वो भी सिर्फ नाजायज तरीके से लगाये गए माशिक शुल्क को उसूलने के लिए / इन तरीकों और उसके खिलाप उठे आवाज को दबाने के आतंकी तरीको के बारे में जानकर हमारे जेहन में एक ही सवाल आया कि, क्या दिल्ली में सरकार और न्याय का शासन है ? कम से कम हमारे हिसाब से तो नहीं है और न्याय कि दशा बेहद खराब है /

हमने पाया कि इन Association के बेहद शातिर और असामाजिक किस्म के पदाधिकारी इन Association को समाज कल्याण कि जगह, एक व्यवसाय के रूप में प्रयोग कर रहें हैं और इमानदार और न्यायप्रिय लोगों का जीना इन्होने हराम कर रखा है / ये खुलेआम कहते घूमतें हैं कि ,हम नहीं मानते किसी कानून को यहाँ तो हमारा कानून है और वो ही चलेगा ? इन दुष्ट लोगों ने निवासियों कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति को पूरी तरह बंधक बना कर रखा हुआ है / दिल्ली के मुख्यमंत्री ,उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस के मुखिया को इस ओर गंभीरता से सोचना होगा /

ऐसा नहीं है कि इनके आतंक और अमानवीय प्रतारणा कि लोग शिकायत नहीं करते हैं / अगर दिल्ली के थानों में लिखित शिकायतों के रिकॉर्ड को जांचा जाय तो लगभग ह़र थाने में इनकी शिकायत जरूर पाई जाएगी / 

अब सवाल उठता है कि फिर न्याय क्यों नहीं होता ? इस विषय पर जब हमने लोगों से बात कि तो इसके पीछे लोगों में व्यवस्था और न्याय के प्रति अविश्वास तथा इन गुंडा टायप पदाधिकारियों के आतंक का हाथ होने कि बात सामने आई / लोगों ने बताया कि इनके खिलाप एक तो इनके आतंक से कोई शिकायत ही नहीं करता ,लेकिन अगर कोई हिम्मतवाला आगे आकर शिकायत करता है तो, ये वहाँ रह रहे निवासियों से हस्ताक्षर कराकर ,यह जवाब पुलिस या प्रशासन में दाखिल कर देते हैं कि "हमारे Association में किसी तरह का आतंक या अनियमितता नहीं है ,और हमने किसी को भी प्रतारित या उसका रास्ता रोककर या गाली गलौज कर मासिक सुरक्षा खर्च नहीं उसूला है" ऐसा लिखकर दे देने से ये लोग प्रशासन से बच जाते हैं और फिर ये लोग उस व्यक्ति कि फिर से प्रतारणा शुरू कर देते हैं ,जो व्यक्ति इनके धमकी या अनियमितताओं के चलते इनको मासिक शुल्क नहीं देता है / हस्ताक्षर ज्यादातर लोग इनके कुकर्मों को जानते हुए भी इनके आतंक से डरकर ,कर देते है / ज्यादातर लोग डरकर अपराधियों के खिलाप बयान नहीं दे पाते हैं /

अब सवाल यह है कि लोग इनके झूठे दावों पर दस्तखत क्यों कर देते हैं / इस मुद्दे पर लोगों का कहना था कि ये मानसिक रूप से लोगों को तोरने का काम करते हैं ,जो बड़ा ही असहनीय होता है / ऐसे में हमें यहाँ रहना है तो इनके ह़र बात को मानना ही परेगा क्योंकि ये इस तरह से प्रतारित करते है कि उसका सबूत जमा करना बड़ा ही मुश्किल है और फिर न्याय व प्रशासन भी इससे कहिं न कहिं भ्रष्टाचार कि वजह से जुड़े होने के कारण इनकी ही मदद करता है / शर्मनाक है ,यह पूरे देश कि व्यवस्था के लिए और दिल्ली में बैठे प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति के लिए भी /

अब जब हमने लोगों से पूछा कि आखिर इनको सजा और पीड़ित को न्याय कैसे मिल सकता है ,तो लोगों का कहना था कि अगर कोई निवासी मानसिक प्रतारणा और आतंकित करने कि शिकायत करता है तो ,तुरंत अगर पीड़ित और आरोपी पदाधिकारियों का शिकायत के आधार पर पुलिस और इमानदार समाज सेवकों के सामने ब्रेन्मेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट करा कर तथ्यों को खोज न्याय किया जाय तो इन पदाधिकारियों का पूरा आतंक का खेल समाप्त हो सकता है साथ ही ये जिन-जिन असामाजिक तत्वों से जुड़े हैं या उनका प्रयोग कर लोगों को आतंकित करते हैं ,उनको भी पकड़ा जा सकता है / इससे दिल्ली के कानून व्यवस्था में भी सार्थक सुधार हो सकता है /

कितना दुःख से भर गया है ,इमानदार,न्यायप्रिय,सच्चे और अन्याय के खिलाप आवाज उठाने वालों का जीवन / कितने शातिर हो गये हैं ,अपराधी,समाज के ठेकेदार Association के पदाधिकारी और असामाजिक तत्व / क्या ऐसे हालात में न्याय को जिन्दा रखा जा सकता है ? अगर हाँ तो कृपा कर अपने विचार और सुझाव जरूर बताएं /