क्या आप समझते हैं कि जनता को सरकार को संयुक्त हस्ताक्षर अभियान के जरिए,आदेश देने का अधिकार है?

Wednesday, April 6, 2011

5 अप्रेल 2011 का पावन दिन और अन्ना हजारे जी द्वारा आजादी की दूसरी लड़ाई का शंखनाद.....

5 अप्रेल 2011 का पावन दिन और अन्ना हजारे जी द्वारा आजादी की दूसरी लड़ाई का शंखनाद तथा दिल्ली के जंतर-मंतर समेत पूरे देश में आमरण अनसन के साथ ये साबित हो गया की ये देश गुलाम है सिर्फ अंग्रेजों के चेहरे और नाम बदल गये हैं....अब अंग्रेजों के नाम जनरल डायर की जगह सोनिया गाँधी,मनमोहन सिंह,प्रतिभा पाटिल,शरद पवार,मुकेश अम्बानी इत्यादि हो गये हैं...



अतः आपलोगों से आग्रह है की आपलोग अपने घरों से निकलकर सड़कों पे आइये तथा आजादी की इस दूसरी लड़ाई में जान की बाजी लगाइये... 

इस आजादी की दूसरी लड़ाई का शंखनाद तस्वीरों की जुवानी... 




















11 comments:

  1. हमें वर्तमान व्यवस्था को बदलने के लिए प्रयास करना चाहिए और यह प्रयास अब अपने चरम रूप को छु रहा है जहाँ पर इतने जज्बे वाले व्यक्ति इस व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए प्रयासरत हैं निश्चित रूप से सफलता जयादा दूर नहीं और वह दिन भी अवश्य आएगा जब इस देश का प्रत्येक नागरिक साधन संपन्न होगा ...आपका आभार

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  2. जयकुमार जी, सादर अभिनन्दन, आपके प्रयास अति सराहनीय हैं / आपका निस्वार्थ समर्पण आपके संपर्क में आनेवाले लोगो को राष्ट्र भक्ति की तरफ प्रेरित करता हैं /हम श्री अन्ना जी के साथ हैं / भारत माता की जय /

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  3. इस देश में गुलामी का अंदाजा किस हद तक है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं की उत्तरप्रदेश के रामपुर में विजय वर्मा जो की अपने साथियों के साथ अन्ना हजारे जी के समर्थन पे अनसन पे बैठे थे को ग्यारह बजे रात में उत्तर प्रदेश के कुकर्मी मुख्यमंत्री मायावती की कुकर्मी पुलिस गिरफ्तार कर थाने ले गयी और जबरदस्ती अनसन को तोरने के लिए बाध्य करने के लिए घंटों थाने में बैठाने के बाद छोर दिया...अब आपलोग बताइये मायावती जैसे लोग मुख्यमंत्री के पदों पर बैठने योग्य हैं या फांसी पे चढाने योग्य....जनरल डायर और मायावती में क्या फर्क है...?

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  4. झा साहब, मुझे इस बात का डर है कि इस आन्दोलन में भी गलत तत्व न आ मिलें. मैंने कल ही एक ऐसे आदमी को इस आन्दोलन के समर्थन में बैठे हुये देखा जो दलाली और तमाम कुकर्मों में लिप्त है. हालांकि यह एक अच्छी बात भी कही जा सकती है कि गलत कार्य करने वाले लोग भी ईमानदारी की महत्ता को स्वीकारते हैं और फिर एक बार जब ईमानदारी का बोलबाला हो जायेगा तो ऐसे तत्व स्वयं ही भुगतेंगे..
    ईमानदारी जिन्दाबाद..

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  5. @भारतीय नागरिक - Indian Citizen
    आपकी बात में सच्चाई हो सकती है लेकिन ये जन आन्दोलन है इसलिए हमलोग किसी बरे से बरे बेईमान को इसमें शरीक होने से रोक नहीं सकते...लेकिन आपने देखा होगा की बेईमानों का यहाँ जबरदस्त विरोध भी हो रहा है .....राजनेताओं को मना किया जा रहा है यहाँ आने से...ये एक शुरुआत है जो इस देश नुमा पूरे गंदे तालाब को मगरमच्छों को सजा देकर आम लोगों के जीने लायक सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है ...मानव के जीने और अपना अच्छा चाहने के स्वार्थ को संतुलित करने का प्रयास है मानवीय संतुलित स्वार्थ को ख़त्म तो नहीं किया जा सकता...समस्या असंतुलन की है जो उच्च संवेधानिक पदों पर बैठे भ्रष्ट मगरमच्छो और उनके पार्टनर धन पशुओं को उनके कुकर्मों की कभी भी सजा नहीं दिये जाने से पैदा हुआ है....

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  6. झा साहब आपसे बिल्कुल सहमत... बस रंग बदलने वाले इन्सानों से सावधान रहना पड़ेगा, क्योंकि ये वही लोग हैं जो अंग्रेजों के साथ थे और आजादी की सुबह आते ही पाला बदल कर इधर खड़े हो गये और पूरे भारत को चूस गये... इन्हीं लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है... बहुत अच्छा प्रयास है... हम सब इसमें अन्ना जी के साथ हैं..

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  7. हर वो भारतवासी जो भी भ्रष्टाचार से दुखी है, वो देश की आन-बान-शान के लिए समाजसेवी श्री अन्ना हजारे की मांग "जन लोकपाल बिल" का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. यह श्री हजारे की लड़ाई नहीं है बल्कि हर उस नागरिक की लड़ाई है जिसने भारत माता की धरती पर जन्म लिया है.पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

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  8. भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा, जन लोकपाल बिल पास हुआ हमारा.

    बजा दिया क्रांति बिगुल, दे दी अपनी आहुति अब देश और श्री अन्ना हजारे की जीत पर योगदान करें

    आज बगैर ध्रूमपान और शराब का सेवन करें ही हर घर में खुशियाँ मनाये, अपने-अपने घर में तेल,घी का दीपक जलाकर या एक मोमबती जलाकर जीत का जश्न मनाये. जो भी व्यक्ति समर्थ हो वो कम से कम 11 व्यक्तिओं को भोजन करवाएं या कुछ व्यक्ति एकत्रित होकर देश की जीत में योगदान करने के उद्देश्य से प्रसाद रूपी अन्न का वितरण करें.

    महत्वपूर्ण सूचना:-अब भी समाजसेवी श्री अन्ना हजारे का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना हैं ज़ोर कितना बाजू-ऐ-कातिल में है.

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  9. भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा, जन लोकपाल बिल पास हुआ हमारा. जन लोकपाल बिल को लेकर सरकार की नीयत ठीक नहीं लगती है.अब लगता है इन मंत्रियों को जूता-चप्पल की भाषा समझ आएगी. हमें अपने अधिकारों लेने के लिए अब ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा.

    महत्वपूर्ण सूचना:-अब भी समाजसेवी श्री अन्ना हजारे का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे

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  10. देश और समाजहित में देशवासियों/पाठकों/ब्लागरों के नाम संदेश:-
    मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन-सा समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है और देश की सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं हैं. क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता?

    मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.
    आपका अपना नाचीज़ दोस्त रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

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