क्या आप समझते हैं कि जनता को सरकार को संयुक्त हस्ताक्षर अभियान के जरिए,आदेश देने का अधिकार है?

Thursday, September 16, 2010

सरकार में बैठे पूंजीपतियों के दलाल बेहद भ्रष्ट मंत्रियों के वजह से सर्वोच्च न्यायालय के जजों पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगता है ....शर्मनाक है ये कांग्रेस क़ी सरकार ...जिसने देश को नरक बना कर रख दिया है ....



पूर्व कानून मंत्री श्री शांति भूषन जी ने आरोप लगाया है क़ी सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व सोलह मुख्य न्यायाधीश में से आठ न्यायाधीश भ्रष्ट है ,उन्होंने छह को पूरी तरह इमानदार बताया जबकि दो के बारे में कोई टिप्पणी नहीं क़ी | यहाँ यह भी जग जाहिर है क़ी श्री शांति भूषन जी के पुत्र श्री प्रशांत भूषन जो क़ी एक इमानदार वकील हैं ,उनपर कोर्ट को भ्रष्ट कहने का मामला चल रहा है |



शांति भूषन जी ने जिन सोलह पूर्व जजों का नाम लिया है उनके नाम हैं --- 

1जस्टिस रंगनाथ  मिश्र 
2जस्टिस एम.एच .कैना  
3जस्टिस के.एन.सिंह  
4 जस्टिस एल.एम.शर्मा 
5 जस्टिस  एम .एन . वेंकटचेलैया
6 जस्टिस ए.एम. अहमदी   
7जस्टिस जे.एस.वर्मा 
8जस्टिस एम.एम.पूंछी 
9जस्टिस ऐ.एस . आनंद 
10 जस्टिस एस.पी.भरुचा  
11जस्टिस बी.एन.किरपाल  
12जस्टिस जी .बी.पाठक 
13जस्टिस राजेंद्र  बाबु 
14जस्टिस आर .सी .लाहोटी 
15 जस्टिस वी .एन .खरे   
16जस्टिस वाय.के .सभरवाल  

आठ भ्रष्ट जजों के नाम उन्होंने सील बंद लिफाफे में कोर्ट को सौपा .....

अब सवाल उठता है की ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेवार कौन है ..? हमारे ख्याल से भ्रष्ट सरकार भ्रष्ट न्यायपालिका का कारण बनती है | इमानदार जज भी जब कानून की व्याख्या इंसानियत और न्यायसंगत आधार पर करे और उसे प्रधानमंत्री की ये नसीहत सुनने को मिले की सरकार के नीतिगत मामलों में दखल ना दे सर्वोच्च न्यायालय ... तब ऐसे हालात में कोई जज क्या करेगा जब खुद सरकार भी उसकी न्याय को मानने से मना कर दे | ऐसे में सरकार का निकम्मापन तो झलकता ही है साथ-साथ देश में न्यायिक संवेदनहीनता भी दिखती है |


अब वक्त आ गया है जब इमानदार न्यायिक अधिकारियों और जजों को भ्रष्ट मंत्रियों और पूंजीपतियों के दवाब में आये बिना सरकार के हर गलत कार्यों की ईमानदारी से आलोचना कर उसे सुधारने का आदेश भी दे तथा ज्यादा से ज्यादा PIL की सुनवाई कर भ्रष्ट जजों को भी कठोर सजा दे | इसके साथ ही जजों को अपनी हर संपत्ति की जानकारी जनता के लिए हमेशा सुलभ बनाने के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच जाकर उनके विचार और सुझाव भी न्याय के बारे में जाने और उनको न्याय मिलने में आने वाली असल दिक्कतों को जानकर उसे दूर करने का प्रयास करें जिससे इस देश के आम नागरिकों के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान बना रहे | इसके साथ की भ्रष्ट मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सख्ती और गंभीरता से जाँच कर दोषियों को सख्त सजा दे | फ़िलहाल जिन जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगतें है उसकी भी गंभीरता से जाँच हों सजा भी गंभीरता से तय हो बिना बिलम्ब के |

आप सब ब्लोगरों से भी आग्रह है की आप लोग भी अपनी राय इस दर्दनाक अवस्था पे व्यक्त करें ...

Tuesday, September 14, 2010

राम जन्म भूमि विवाद ---न्याय व्यवस्था में फैले अराजकता और सरकार में बैठे लोगों के शर्मनाक स्वार्थ की कहानी !!!!!!!!!!!!!!

जब तक नोटों की माला नेता पहनते और उससे खुश होते रहेंगे इस देश में न्याय और सत्य का गला दबाया जाता रहेगा | राम और अल्लाह का झूठा राग अलापकर निर्दोष लोगों के खून पे अपने स्वार्थ की रोटी सेंकी जाती रहेगी ( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
पूरा देश भ्रष्ट नेताओं के शर्मनाक लूट खसोट और देश में निगरानी और कार्यवाही की व्यवस्था के पूरी तरहसड़ जाने से कराह रहा है ,इंसानियत ख़त्म होने की कगार पे है ऐसे में रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद से ज्यादा मत्वपूर्ण इंसानियत को बचाना है और इन भ्रष्ट नेताओं को ख़त्म करना है | देश के लोगों को इसके लिए एकजुट होकर निडरता से काम करने की जरूरत है |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
ये दृश्य इस देश में न्याय व्यवस्था में फैले अराजकता और सरकार में बैठे लोगों के शर्मनाक स्वार्थ की कहानी के अलावे कुछ भी नहीं | इस देश के ज्यादातर नेता भ्रष्ट और शर्मनाक स्तर के स्वार्थी हो गये हैं जिनको देश और समाज के हितों की कोई चिंता नहीं है |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
जब तक राजनेता चोला बदलकर लोगों के हमदर्द होने का झूठा दिखावा करेंगे और इस देश के लोगों की सच्ची सेवा के बदले उनको बेबकूफ बनाकर अपनी कुर्सी और सत्ता को प्राथमिकता देंगे ,इस देश में राम जन्म भूमि विवाद जैसे मामले हर गांव और हर दिल में देखने को मिलते रहेंगे |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)


राम जन्म भूमि विवाद का 18 वर्षों तक फैसला नहीं आना,6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद कुछ लोगों द्वारा सरकार में बैठे कल्याण सिंह के गैर जिम्मेवाराना तथा बीजेपी तथा कांग्रेस के अपने-अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए न्याय और सामाजिक दायित्व का गला घोटने का वैसा ही परिणाम था जैसा आज देश के हर कोने में राजनितिक और भूमाफियाओं द्वारा किया जा रहा है और पूरी न्याय व्यवस्था और पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बनी देख रही है | दरअसल राम जन्म भूमि विवाद स्वार्थ के खेल का ही एक धार्मिक रूप है जिसका समाधान कोई निःस्वार्थी देश भक्त नेता या बेहद इमानदार इंसानी सोच रखने वाला जज ही कर सकता है | ये मामला दीवानी से ज्यादा इंसानियत पे स्वार्थ और गन्दी राजनीती के शर्मनाक दवाब का मामला है | ये मामला उतना बड़ा या पेचीदा नहीं है जिनता इस देश के भ्रष्ट और स्वार्थी नेताओं ने इसे बना दिया है अपने स्वार्थ के नीचे सत्य और न्याय को कुचलकर | 



आज इस देश के लोगों को चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान सबको इस भूमि विवाद का हल अगर ईमानदारी से चाहिए तो स्वार्थी और लोभी राजनितिक पार्टियों तथा राम और धर्मनिरपेक्षता का चोला पहनने वाले राजनेताओं को इस देश से पूरी तरह ख़त्म करना होगा साथ ही समाज में बैठे इनके स्वार्थी एजेंटों को जूतों से पीटना होगा | ये ना तो राम के,ना ही अल्लाह के और ना ही इस देश और समाज के ये अपनी मां को भी कोठे पर बेच सकते हैं अपने स्वार्थ के लिए ,इसलिए अरे देशवाशियों इनको पहचानों ....

Thursday, September 9, 2010

नीतिगत मामलों में सर्वोच्च न्यायालय व्याख्या ना करें क्योंकि ये अधिकार सोनिया गाँधी को है ....?

एक ऐसी महिला जिसके हाथ में इस देश की पूरी कमान है और पूरी व्यवस्था इसके क़दमों में है इस महिला के प्रभाव से पिछले पाँच सालों में इस देश में इंसानियत पूंजीपतियों का गुलाम बन चुकी है | ये देश एक मरता हुआ लोकतंत्र बन गया है |  सारा खेल ये खेलती है लेकिन इसका कहीं जिक्र भी नहीं होता ,जाँच करे तो कौन...?


सड़ते अनाज के मुद्दे पर अनाज को सड़ाने से अच्छा गरीबों में बाँट देने का आदेश सर्वोच्च न्यायालय के इमानदार जज ने क्या दे दिया मानो आफत आ गयी | इस आदेश के आते ही भ्रष्टाचार क़ी बैसाखी के सहारे प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे और जमे हुये हमारे मनमोहन सिंह जी ने तुरंत सर्वोच्च न्यायालय को नीतिगत मामलों से दूर रहने का बेशर्मी भरा फरमान जारी कर दिया | अगर इस बयान के लिए देश भर में सर्वे करायें जायें तो लोग इस आपराधिक और भ्रष्टाचार को बढाने वाले बयान के लिए मनमोहन सिंह को सजा देने क़ी अपील करेंगे |



अब दूसरा पहलु देखिये अभी सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी के किसानों के भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित याचिका को ठुकरा दिया क्योंकि कानूनी दायरे में यही व्याख्या बनती थी | लेकिन अगर सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को इंसानियत के नाते स्वीकार कर इस कानून क़ी खामियों पर प्रकाश डालकर सच्ची न्यायिक व्याख्या करती तो फिर सरकार कहती क़ी नीतिगत मामलों में दखल ना दे...


अब देखिये इस सरकार क़ी बेशर्मी इधर सर्वोच्च न्यायालय ने किसानों क़ी याचिका ठुकराई और उधर जबरदस्ती इस देश क़ी महारानी बनी सोनिया गाँधी का बयान आया क़ी किसानों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए | ये है इस बेशर्म कांग्रेस सरकार का चेहरा सर्वोच्च न्यायालय से भी बड़ी है इनकी राजमाता सोनिया गाँधी | दुःख तब और हुआ जब मीडिया ने इस राजमाता के बयान पर बहस छेड़ दिया ,लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के जनहित में आये आदेश को एक निकम्मे व्यक्ति द्वारा अपमान करने को मीडिया ने उतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाया | ऐसे हालात में कैसे कोई जज कानून को इंसानियत से जोड़कर व्याख्या करने की कोशिस करेगा ...?



अब देखते हैं क़ी भूमि अधिग्रहण कानून मोटा-मोटी कहता क्या है 1894 में अंग्रेजों द्वारा सड़क,नहर,रेलवे लाइन इत्यादि बहुत जरूरी जनहित क़ी चीजों के लिए इस कानून को बनाया गया जिसे 1978 में तब थोरी और मजबूती मिली जब आजाद भारत सरकार ने सम्पत्ति के अधिकार को नागरिकों के मूल अधिकार से निकाल दिया |

दरअसल ये कानून कहिं भी किसानों से ज़मीन लेकर भारत सरकार को बेशर्मी से दलाल बनकर किसी बिल्डर माफिया को देने क़ी बात नहीं कहता है लेकिन जब इस देश क़ी तथाकथित महारानी का परिवार भी इस बिल्डर  माफिया का हिस्सा हो तो इस देश में किसानों क़ी ज़मीन ऐसे ही छीनी जाएगी और किसान बदहाल तथा दलाल मालामाल होते रहेंगे | 


शर्मनाक है इस देश में सोनिया गाँधी का राजतन्त्र जो सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर है और किसी भी कानून की व्याख्या अपने मन मुताबिक करा सकता है ,हे भगवान इस देश में ऐसा कोई नहीं जो इस परिवार से इस देश को छुटकारा दिलाये....?

Sunday, September 5, 2010

भारत सरकार यानि समस्याओं को जन्म देने वाली रद्दी क़ी पोटली...



आज इस देश क़ी लगभग 80% आवादी दुःख और तकलीफ में जी रही है और इस देश के राष्ट्रपति भवन के बिजली का खर्चा कड़ोरों में है | देश के ज्यादातर सांसद और मंत्री कानूनी रूप से करोडपति और गैरकानूनी रूप से तो अरबपति हैं वहीँ दूसरी ओर दिल्ली के झुग्गी-झोपड़ी  में ज्यादातर लोगों को एक शौचालय और पीने का साफ पानी भी उपलब्ध नहीं है |



अब सवाल उठता है क़ी समस्याओं को सुलझाने क़ी जिम्मेवारी जिनके ऊपर है वो समस्याओं के बाबजूद करोडपति बनते जा रहे हैं और देश तथा समाज समस्याओं में घिरकर बद से बदतर होता जा रहा है ....आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ....? 



एक कहाबत है सोये को जगाया जा सकता है  जो जगा हो उसे कैसे जगाया जा सकता है ,समस्या हो तो सुलझाया जा सकता है लेकिन जब समस्या को सुलझाने वाले ही समस्या को पैदा करें अपने निहित स्वार्थ सिद्धि के लिए तो समस्या कैसे सुलझेगी | कुछ ऐसा ही हाल आज भारत सरकार का है और भारत सरकार समस्याओं को पैदा करने वाली रद्दी क़ी पोटली बन चुकी है ...देश के प्रखंड व जिले से लेकर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति कार्यालय तक समस्याओं को पैदा कर उससे अपना स्वार्थ सिद्धि करने वालों का बर्चस्व है ...जरा गौर कीजिये निम्नलिखित तथ्यों पर ....



1 - कश्मीर समस्या क़ी जड़ कश्मीर और पाकिस्तान में नहीं बल्कि हमारे गृह,रक्षा,वाणिज्य तथा वित्त मंत्रालय के भ्रष्ट सलाहकारों और अधिकारियों के खुराफाती दिमाग में है | इस समस्या के सुलझते ही इन तीनो मंत्रालय के भ्रष्ट अधिकारियों से लेकर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं तथा मंत्रियों क़ी अडबों क़ी कमाई बंद हो जाएगी | मेरा दावा है क़ी इमानदार पत्रकारों,रिटायर्ड जजों और समाजसेवकों के द्वारा इन चारो मंत्रालय के पांच वर्षों के कश्मीर से सम्बंधित खर्चों का अगर सामाजिक जाँच जमीनी स्तर पर निगरानी करके किया जाय तो इन चारो मंत्रालय के मंत्रियों और अधिकारियों समेत कई और सफ़ेद पोश उद्योगपति भी कटघरे में खरे नजर आयेंगे और समस्या का समाधान भी शुरू होने लगेगा ...


2 -सरकार तरह-तरह के सुरक्षा बलों क़ी स्थापना कर रही है और इन सुरक्षा बलों क़ी स्थापना के बाद अपराधों में बेतहासा बढ़ोतरी होती जा रही है | देश के गृहमंत्रालय में बैठे मोटी तनख्वाह पा रहे लोग अपराध नियंत्रण के उपायों पर अनुसन्धान कर रहे हैं या अपराध को बढाकर लोगों में भय और दहसत का माहौल पैदा करने का ...? ये तो उन्ही को पता होगा | देश क़ी राजधानी में अगर आम लोगों का सर्वे ईमानदारी  से कराया जाय तो 85% लोग पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था से दुखी और परेशान होने क़ी राय जाहिर करेंगे ...नक्सल समस्या दरअसल समस्या ही नहीं है ये सिर्फ सुरक्षा के नाम पर अडबों क़ी लूट का साधन मात्र है और इन मंत्रालयों में बैठे गद्दार इसकी पटकथा तैयार करते हैं | देश में विष्फोटक नियंत्रक क़ी अलग से व्यवस्था और इतनी बड़ी-बड़ी सुरक्षा एजेंसियों के होते हुये 164 ट्रक बारूद एक्सपायर  हो चुके लायसेंस के बल पर गायब कर दिए जाते हैं और देश क़ी पूरी क़ी पूरी खुपिया और अन्य व्यवस्था सोयी रहती है | दरअसल गृहमंत्रालय तथा वाणिज्य मंत्रालय में गद्दार और भ्रष्ट लोग बैठे हैं और गद्दारों क़ी सीधी पहुँच है इन मंत्रालयों में इसलिए इस देश में ऐसे अपराध को बरी आसानी से अंजाम दिया जाता है और आरोप पाकिस्तान के ISI पर बड़ी आसानी से थोप कर इस देश की जनता को बेबकूफ बना दिया जाता है तथा आस्तीन के सांप का बाल भी बांका नहीं होता है | ऐसे में समस्या का समाधान सिर्फ और सिर्फ सामाजिक जाँच से ही संभव है ,इमानदार अधिकारियों की कमी नहीं है हमारे देश में जरूरत सिर्फ उन्हें टास्क देकर स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से सामाजिक आधार पर जाँच करने देने की है | 


इस देश में समस्याओं का समाधान तब-तक नहीं हो सकता जब-तक इस देश के ज्यादातर मंत्रालयों और आयोगों में देश के गद्दारों,भ्रष्टाचारियों और निहायत ही घटिया चरित्र के लोगों का जमघट रहेगा ,इसलिए जरूरत है देश के बाहर के गद्दारों से लड़ने का ढोंग करने और देश की जनता को बेबकूफ बनाने की वजाय आस्तीन के सांपों के फन को कुचलने तथा इन मंत्रालयों में बैठे देश के गद्दारों को पकड़ने की | जब-तक ऐसा पूरी ईमानदारी और सामाजिक जाँच के आधार पर नहीं किया जाता तबतक इस देश में भारत सरकार समस्याओं को पैदा करने वाली रद्दी की पोटली बनी रहेगी और गद्दारों की पकड़ इस देश पे और भी मजबूत होती रहेगी ...आज इस देश में सुरक्षा बलों की स्थापना करने की नहीं बल्कि सरकार में अधिकारियों और मंत्रियों के रूप में बैठे भ्रष्ट और गद्दार लोगों को पहचान कर उनकी देश व विदेश की संपत्ति जप्त करने तथा उनको सजा देने के साथ-साथ  इस देश के सभी नागरिकों तक  रोटी,कपडा और मकान पहुँचाने की ...ऐसा होने के बाद ही यह देश और समाज अपने आप को सुरक्षित और भयमुक्त महसूस करेगा ...भ्रष्टाचार और अराजकता भी इन मंत्रालयों में बैठे गद्दारों के वजह से ही बढ़ रहा है और देश का असल विकाश की जगह नकली कागजी विकाश हो रहा है ..

Thursday, September 2, 2010

भ्रष्टाचार,लूट,भूखमरी,अराजकता और सरकारी खजाना कांग्रेस पार्टी के बाप क़ी जागीर के सहारे एक बार फिर सोनिया गाँधी बनेगी कांग्रेस अध्यक्षा ...

सोनिया गाँधी के सत्ता और साधन युक्त भारत..

आम लोगों का सत्ता और साधन विहीन भारत ...


पिता (राजीव गाँधी) बोफोर्स घोटाले,भोपाल गैस हादसे के आरोपी एंडरसन को सरकारी मेहमान क़ी तरह देश से बाहर भेजने में सहयोग देने का आरोपी तथा पहलीबार यह कहने वाला क़ी देश के विकाश का पैसा गरीबों तक एक रूपये का 85 पैसा भी नहीं पहुँचता है का प्रवर्तक और कांग्रेस पार्टी उस वक्तव्य को जमीनी स्तर पर लागू करने में सबसे आगे ,राजीव गाँधी के  इस वक्तव्य के बाद देश क़ी नीतियाँ उसी तरह बनने लगी जिससे जन्कल्यानकारी योजनाओं का पैसा एक रूपये में से 85 पैसा नहीं बल्कि 95 पैसे तक लूटा जा सके | जबकि होना यह चाहिए था क़ी इस लूट को रोकने के ठोस उपाय,निगरानी और कार्यवाही क़ी व्यवस्था तैयार किये जाते | लेकिन जिस पार्टी क़ी नींव ही भ्रष्टाचार और लूट पर टिकी हो उस पार्टी के रहते ऐसा होना तो दूर सोचना भी अपराध है ,जो सोचेगा वो जेल क़ी हवा खायेगा ...


बेटा राहुल गाँधी जिसे दिल्ली में खुलेआम आम लोगों पे अत्याचार और अन्याय तथा कोमनवेल्थ के नाम पर भ्रष्टाचार का नंगा खेल नहीं दीखता है लेकिन उड़ीसा में आदिवासियों का दर्द दीखता है और वहाँ ढोंग रचाने तुरंत पहुँच जाता है लेकिन भ्रष्टाचार महंगाई,सड़ते अनाज,न्याय का गिरता स्तर और कुव्यवस्था को रोकने व सुधारने का एक भी प्रयास इस ढोंगी और जबरदस्ती इस देश पर थोपे जाने वाले युवराज के तरफ से असल में होता कभी नहीं दिखा ,अगर किसी को दिखा हो तो इस ब्लॉग पर जरूर लिखें...


अब बात इस देश को दुर्भाग्य से मिले और भ्रष्टाचार क़ी आवारा पूँजी से जमें महारानी सोनिया गाँधी क़ी ,इस महारानी के हाथ में जब से इस देश क़ी कमान आई है इस देश में कानून और व्यवस्था नाम क़ी चीज ख़त्म सी हो गयी है,सत्य बोलने वाले और न्याय के लिए लड़ने वालों को ह़र जगह प्रतारित किया जाने लगा है ,भ्रष्टाचारियों क़ी मौज है ,उद्योग पतियों के ऊपर सरकार और सामाजिक सरोकार जैसा कोई नियंत्रण जैसे ख़त्म सी हो गयी है ,शरद पवार जैसे भ्रष्ट मंत्री पूरे देश को उसके थाली से दो वक्त क़ी रोटी छिनकर भ्रष्टाचार क़ी जय हो का पाठ पढ़ा रहें हैं जिससे देश क़ी गरीब जनता ही नहीं बल्कि ह़र व्यक्ति का जीवन नरक समान बनता जा रहा है ,देश में अनुशासन,निगरानी व कार्यवाही क़ी व्यवस्था खत्म हो गयी है ,देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे पदों क़ी मर्यादा को भी इस महारानी के अपने स्वार्थ और सत्ता सुख भोगने क़ी चाह क़ी वजह से जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाये |




इस देश के सच्चे,अच्छे,इमानदार और देशभक्त नागरिकों के लिए दुःख और शर्म क़ी बात यह है क़ी इस स्वयंभू महारानी क़ी ताजपोशी एकबार फिर होने वाली है | यही है इस देश का दुर्भाग्य क़ी श्री  हरी प्रसाद जैसा इमानदार नागरिक जेल में और भ्रष्टाचार क़ी रक्षक इस देश क़ी महारानी ..पूरा विश्व देख रहा है इस परिवार का अपने हितों के लिए सत्ता का सदुपयोग और इस देश क़ी जनता के हितों के लिए आपराधिक स्तर पर दुरूपयोग ...शायद अब कोई दैविक चमत्कार ही इस परिवार से इस देश और समाज को बचा सके..लेकिन मुझे समय के न्याय पे पूरा भरोसा है,क्या आपको भी है...?




सभी चित्र गूगल से साभार प्रकाशित है ...