Tuesday, September 14, 2010

राम जन्म भूमि विवाद ---न्याय व्यवस्था में फैले अराजकता और सरकार में बैठे लोगों के शर्मनाक स्वार्थ की कहानी !!!!!!!!!!!!!!

जब तक नोटों की माला नेता पहनते और उससे खुश होते रहेंगे इस देश में न्याय और सत्य का गला दबाया जाता रहेगा | राम और अल्लाह का झूठा राग अलापकर निर्दोष लोगों के खून पे अपने स्वार्थ की रोटी सेंकी जाती रहेगी ( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
पूरा देश भ्रष्ट नेताओं के शर्मनाक लूट खसोट और देश में निगरानी और कार्यवाही की व्यवस्था के पूरी तरहसड़ जाने से कराह रहा है ,इंसानियत ख़त्म होने की कगार पे है ऐसे में रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद से ज्यादा मत्वपूर्ण इंसानियत को बचाना है और इन भ्रष्ट नेताओं को ख़त्म करना है | देश के लोगों को इसके लिए एकजुट होकर निडरता से काम करने की जरूरत है |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
ये दृश्य इस देश में न्याय व्यवस्था में फैले अराजकता और सरकार में बैठे लोगों के शर्मनाक स्वार्थ की कहानी के अलावे कुछ भी नहीं | इस देश के ज्यादातर नेता भ्रष्ट और शर्मनाक स्तर के स्वार्थी हो गये हैं जिनको देश और समाज के हितों की कोई चिंता नहीं है |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
जब तक राजनेता चोला बदलकर लोगों के हमदर्द होने का झूठा दिखावा करेंगे और इस देश के लोगों की सच्ची सेवा के बदले उनको बेबकूफ बनाकर अपनी कुर्सी और सत्ता को प्राथमिकता देंगे ,इस देश में राम जन्म भूमि विवाद जैसे मामले हर गांव और हर दिल में देखने को मिलते रहेंगे |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)


राम जन्म भूमि विवाद का 18 वर्षों तक फैसला नहीं आना,6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद कुछ लोगों द्वारा सरकार में बैठे कल्याण सिंह के गैर जिम्मेवाराना तथा बीजेपी तथा कांग्रेस के अपने-अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए न्याय और सामाजिक दायित्व का गला घोटने का वैसा ही परिणाम था जैसा आज देश के हर कोने में राजनितिक और भूमाफियाओं द्वारा किया जा रहा है और पूरी न्याय व्यवस्था और पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बनी देख रही है | दरअसल राम जन्म भूमि विवाद स्वार्थ के खेल का ही एक धार्मिक रूप है जिसका समाधान कोई निःस्वार्थी देश भक्त नेता या बेहद इमानदार इंसानी सोच रखने वाला जज ही कर सकता है | ये मामला दीवानी से ज्यादा इंसानियत पे स्वार्थ और गन्दी राजनीती के शर्मनाक दवाब का मामला है | ये मामला उतना बड़ा या पेचीदा नहीं है जिनता इस देश के भ्रष्ट और स्वार्थी नेताओं ने इसे बना दिया है अपने स्वार्थ के नीचे सत्य और न्याय को कुचलकर | 



आज इस देश के लोगों को चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान सबको इस भूमि विवाद का हल अगर ईमानदारी से चाहिए तो स्वार्थी और लोभी राजनितिक पार्टियों तथा राम और धर्मनिरपेक्षता का चोला पहनने वाले राजनेताओं को इस देश से पूरी तरह ख़त्म करना होगा साथ ही समाज में बैठे इनके स्वार्थी एजेंटों को जूतों से पीटना होगा | ये ना तो राम के,ना ही अल्लाह के और ना ही इस देश और समाज के ये अपनी मां को भी कोठे पर बेच सकते हैं अपने स्वार्थ के लिए ,इसलिए अरे देशवाशियों इनको पहचानों ....

2 comments:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

    भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
    हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

    एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
    (प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

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  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

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