क्या आप समझते हैं कि जनता को सरकार को संयुक्त हस्ताक्षर अभियान के जरिए,आदेश देने का अधिकार है?

Thursday, April 29, 2010

क्या ऐड वर्ल्ड बीमार ,मीडिया भूखा और कम्पनियों को अपने उत्पाद पे भरोसा नहीं------ ?

                                                             
आज बड़े-बड़े तथाकथित ब्रांड का दावा करने वाले ,चाहे वह मारुती हो,कोका कोला हो ,जे.के.सीमेंट या और कोई कम्पनियों के विज्ञापन को जरा गौर से देखिये तो पायेंगे क़ी ये विज्ञापन अपने उत्पाद का कम, लेकिन महिलाओं के उस मांसल सौन्दर्य,जिसे कुदरत ने बच्चों को भोजन देने के उद्देश्य से महिलाओं में निर्माण किया है या सेक्स क़ी किसी न किसी बातों के सहारे अपने उत्पाद को बेहतर दिखाने क़ी कोशिस कर रहा है /

अब जरा गौर करने  वाली बात है क़ी सीमेंट के विज्ञापन में  एक लड़की को स्विमिंग सुइट पहनाकर  उसके मांसल सौन्दर्य को TV पे प्रचारित करने के पीछे क्या मकसद हो सकता है ?
  
इसके जवाब में मुझे मेरे एक मित्र ने कहाँ कि ,इसका मतलब है कि ,भ्रष्ट इंजिनियरों और ठेकेदारों को यह ऐड दिखाकर,यह समझाया जा रहा है कि ,सरकारी कामों में अब गुणवत्ता कि जाँच कौन करता है,इसलिए सीमेंट कि गुणवत्ता को मत देखो / लेकिन इस भ्रष्ट खेल के पीछे तुम्हे इस तरह का शबाब और शराब के  गुणवत्ता कि पूरी गारंटी है / मैं यह जवाब सुनकर हैरान रह गया / मैंने जब उनसे इस सीमेंट को क्या आप खरीदोगे ? यह सवाल किया / तो उनका जवाब था ,इस विज्ञापन के बाद तो मैं इस सीमेंट को खरीदना तो दूर ,लोगों को भी नहीं खरीदने क़ी सलाह दूंगा / उनका ऐसा जवाब सुनकर मुझे यह महसूस हुआ क़ी अभी भी महिलाओं का इस तरह भद्दा प्रदर्शन करने वालों का विरोध करने वाले लोग मौजूद हैं /

कुछ लोगों ने तो इस ऐड कि कानूनी तौर पे शिकायत भी क़ी / मैंने भी कई TV चेनलों के प्रबंधकों को उनके व्यक्तिगत मोबाइल पर फोन कर इस ऐड को नहीं दिखाने का आग्रह किया /

अब सवाल उठता है क़ी क्या ऐसे ही विज्ञापनों से उत्पाद को बेचा जा सकता है ? जवाब है नहीं / क्योंकि उत्पाद को प्रचारित करने से सिर्फ उत्पाद नहीं बिकने लगता है / बल्कि उत्पाद क़ी गुणवत्ता और लोगों क़ी भावना दोनों ही बातों का ध्यान अगर विज्ञापन में प्रमुखता से दिखाया जाय तो ,ऐसे ऐड के प्रभाव से ज्यादा प्रभाव पड़ेगा / इस तरह के ऐड का कभी-कभी तो इतना नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क़ी लोग अच्छे उत्पाद को भी खरीदना इस लिए बंद कर देते हैं क़ी,उसके विज्ञापन में सामाजिक परिवेश को खराब  करने वाले तत्व मौजूद होते हैं / 

ऐसे ऐड को बनाने वाले और कुछ लोभी TV चैनलों के कर्ता-धर्ताओं का तर्क है क़ी ,ऐसे ऐड को लोग ज्यादा देखते हैं,इसलिए हम बनाते और दिखाते हैं / ऐसे बीमार तथाकथित क्रिएटिव ऐड डायरेक्टरों को मेरा सन्देश यह है क़ी ,वे एक दिन नंगा होकर बाजार में चलें लोग उनको भी ज्यादा देखेंगे ?    

अब सवाल उठता है क़ी क्या ऐसे ऐड को रोका जा सकता है / जवाब है जब लोग ऐसे ऐड के खिलाप शिकायत करेंगे और ऐसे ऐड देने वाले कम्पनियों के उत्पाद को खरीदना बंद कर देंगे तो ऐसे ऐड दिखने भी बंद हो जायेंगे / 

अब सवाल उठता है क़ी ऐसे ऐड बनने के पीछे कारण क्या है तो इसका सीधा सम्बन्ध सेक्स,भ्रष्टाचार और भ्रष्ट सरकारी व्यवस्था से है / इस तरह के ऐड बनाने वाले निश्चय ही बीमार है और इस तरह के ऐड को बिना सामाजिक सरोकार क़ी समीक्षा किये प्रसारित करने वाले पैसों के भूखे हैं ,तथा इस तरह समाज के सेक्स भावना को गन्दा कर ,अपने उत्पाद बेचने वाले को अपने उत्पाद पर भरोसा नहीं है ,या वह सोचती है क़ी उसके उत्पाद को ऐसे  ही सोच वाले लोग खरीदेंगे या संभवतः उसे कोई गुमराह कर रहा है ?

निश्चय ही यह गम्भीर मुद्दा है जिस पर इस व्यवस्था से जुड़े जिम्मेवार लोगों और सरकार में महिलाओं के कल्याण के लिए बैठे लोगों को गंभीरता,ईमानदारी और अपनी सामाजिक जिम्मेवारी से सोचने क़ी जरूरत है / तबतक तो यही कहा जा सकता है क़ी ,ऐड वर्ल्ड बीमार ,मीडिया भूखा और कम्पनियों को अपने उत्पाद पे भरोसा  नहीं है /

Wednesday, April 28, 2010

हर मंत्री का नार्को, ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट होना चाहिए-----?

                         
आज देश गद्दारों क़ी वजह से कराह रहा है / एक जमाना था क़ी आम जनता मंत्रियों,सांसदों,जनप्रतिनिधियों को हार्दिक सम्मान देते थे / लेकिन अगर आज किसी आम आदमी से इनके बारे में एक वाक्य बोलने को कहा जाय ,तो पता नहीं कितनी आक्रोश में क्या-क्या बोल जाय / जनता का गुस्सा जायज भी है / ये जनप्रतिनिधि और मंत्री एक मोटी तनख्वाह और भत्ता पाते तो हैं जनता के हितों और उनके दुखों के कारणों को दूर करने के लिए ,लेकिन वो करते क्या हैं,ये जग जाहिर है / देश के हालात इसकी पुष्टि भी कर रहे है /
     अब सवाल उठता है क़ी क्या हर जन प्रतिनिधि और मंत्री भ्रष्ट और गद्दार है ? जवाब है नहीं / लेकिन भ्रष्टाचारियों और गद्दारों क़ी वजह से अच्छे लोग भी बदनाम हैं,और गलत लोगों पर कोई नियंत्रण और समुचित कार्यवाही नहीं होने से भ्रष्टाचारियों और गद्दारों क़ी संख्या बढती जा रही है ,जो इस देश और समाज दोनों के लिए खतरनाक है /
कानूनी तौर पे देखा जाय तो किसी उच्च पद पे बैठा व्यक्ति और आम आदमी में कोई फर्क नहीं है ,और आज के हालात में अगर किसी आम आदमी का जमीर जिन्दा है ,तो वह देशहित के लिए उस मंत्री से ज्यादा उपयोगी है ,जिस मंत्री का जमीर मर गया है या किसी देश के गद्दारों के हाथ बिक गया है / 
ऐसे में मंत्रियों और देश क़ी कमान सँभालने वाले  उच्च अधिकारियों के जमीर क़ी गहन जाँच हर छह महीने में करना जरूरी बनाने से ही इस बात का पता लगाया जा सकता है, क़ी ये मंत्री है या अन्दर से किसी आतंकवादी से भी ज्यादा गद्दार /
                 इस बात को जरा ऐसे समझिये --मान लीजिये मैं  कृषि मंत्री हूँ ,और मेरे ऊपर लगातार आरोप लग रहें हैं क़ी मैंने अपने चमचों और रिश्तेदारों को फायदा पहुचाने के लिए 100 कड़ोर लोगों को महंगाई के मुहं में झोंक कर,उनके दो वक्त के रोटी को मुश्किल बनाकर ,उनका जीवन दुखदायी बनाने का काम किया है / 
                              अब मान लीजिये मैंने ऐसा नहीं किया है तो अगर देश हित में जनता और बिपक्ष क़ी संतुष्टि के लिए ,नार्को,ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट  कराकर ,मैं अपनी बेगुनाही का सबूत दे देता हूँ ,तो मेरा कद चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक दोनों ही रूप में ऊपर उठेगा /
अब सवाल है टेस्ट कैसे और किसके सामने हो क़ी उसकी विश्वसनीयता पर पूरा देश यकिन करे / 
टेस्ट अगर भारत के राष्ट्रपति,सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ,देश भर के सम्मानित इमानदार कम से कम 10 समाज सेवक और देश भर से चुने गए बेदाग 50 इमानदार व शिक्षित आम जनता  के सामने लाइव कराया जाय / जिसमे हर मंत्री और अधिकारियों पर लगे आरोपों से सम्बंधित प्रश्न किया जाय और उसके जवाब  पर मशीन और उपस्थित लोगों के मतों के अनुसार किसी को दोषी या बेगुनाह घोषित किया जाय / हमारे ख्याल से ऐसा करने से हमारे देश में पारदर्शिता क़ी एक मिसाल कायम होगी और उच्च पदों पर बैठे बड़े-बड़े गद्दार भी डरकर  गद्दारी करना छोड़ देंगे जिससे देश के  हालात में अचानक सुधार आना शुरू हो जायेगा /  
मैं एक नागरिक हूँ लेकिन अगर देशहित में मेरा नार्को,ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट जरूरी है तो इस ब्लॉग पर मैं घोषणा कर रहा हूँ ,क़ी देश के किसी भी 10 इमानदार समाजसेवकों के सामने मैं टेस्ट देने को तैयार हूँ /
अगर मैं देश हित में ऐसा करने को तैयार हूँ ,तो मंत्री ऐसा क्यों नहीं करेंगे ? क्या मंत्री देशहित से बड़ा है  ?  आप सभी ब्लोगरों और भारत के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मुझे जवाब क़ी आशा है /

Monday, April 26, 2010

अजित गुप्ता जी(अजित गुप्ता का कोना ब्लॉग) को बधाई / असीम त्रिवेदी जी ,तारकेश्वर गिरी जी ,अमित शर्मा जी और भावेश जी का धन्यवाद / समीर लाल जी,अजय कुमार झा जी,सुमन जी ,प्रवीन पांडे जी ,देव कुमार झा जी जैसे ब्लोगरों के विस्तृत टिप्पणी का इंतजार है -----

                                       My Photo          अजित गुप्ता जी(अजित गुप्ता का कोना ब्लॉग) को इस हफ्ते का,देश हित के मुद्दे पर 100 शब्दों में उम्दा विचार व्यक्त करें,में उम्दा विचार व्यक्त करने वाली ब्लोगर का सम्मान प्राप्त करने के लिए बधाई / अजित गुप्ता जी आप एक बार और इसी पोस्ट पर इसी मुद्दे पर किसी भी ब्लोगर के विचार को सराहने के लिए भी टिप्पणी करने क़ी केटेगरी में भी,अपनी टिप्पणी व्यक्त कर सकती हैं /  अंतिम तिथि है-13/06/2010 के रात 11.59 तक / आपसे अनुरोध है क़ी कृपा कर आप हमारे e.mail-honestyprojectdemocracy@gmail.com पर या इसी पोस्ट के टिप्पणी बॉक्स में अपना पूरा पत्राचार का वर्तमान पता और मोबाइल नंबर बताने का कष्ट करें / आप हमारे मोबाइल पर फोन करके भी हमें,अपना पता नोट करा सकते है -09810752301 पर / जिससे हम आपको सम्मान पत्र और इनाम का चेक भेज सकें / मोबाइल नंबर होने से हम आपसे बात कर आपके पते क़ी पुष्टि कर सकते हैं / विचार वयक्त करने के लिए हमारी ओर से बहुत-बहुत बधाई / आशा है आप आगे भी इसी तरह देश हित के मुद्दों के बारे में सोचकर अपनी बहुमूल्य राय अन्य ब्लोगरों के ब्लॉग पर भी रखती रहेंगी / ब्लोगरों क़ी सार्थक टिप्पणियां ही ब्लॉग क़ी ताकत है / इसके साथ ही हम असीम त्रिवेदी जी ,तारकेश्वर गिरी जी ,अमित शर्मा जी  और भावेश जी का विचार व्यक्त करने के लिए धन्यवाद करते हैं और समीर लाल जी,अजय कुमार झा जी,सुमन जी ,प्रवीन पांडे जी ,देव कुमार झा जी जैसे और भी ब्लोगरों के विस्तृत टिप्पणी का इंतजार कर रहें हैं ----- आप सबसे आग्रह है क़ी आप अपना बहुमूल्य विचार पोस्ट में उठाये गए मुद्दे के पक्ष,बिपक्ष या उस उद्देश से जुड़े अन्य बिकल्पों पर सार्थक विवेचना के रूप में अपना 100 शब्द जरूर लिखें / नीचे लिखे लिंक पर क्लिक करने से वह पोस्ट खुल जायेगा जिसके टिप्पणी बॉक्स में आपको टिप्पणी करनी है /
 अंत में एक बार फिर उन सभी ब्लोगरों का धन्यवाद और बांकी ब्लोगरों को विचार व्यक्त करने का आमन्त्रण /

Saturday, April 24, 2010

कॉमनवेल्थ गेम -----?

आज व्यवस्था पर व्यंग श्रृंखला में आप लोगों के सामने प्रस्तुत है "कॉमनवेल्थ गेम" विषय पर एक कविता -----

                     "कॉमनवेल्थ गेम"


कहने को ये कॉमनवेल्थ गेम है / 
असल में यह दिल्ली के कॉमन जनता के वेल्थ को छीनने  का खेल है /
इसके नाम पर भ्रष्टाचार कि कई नदियाँ बही /
सात सौ कड़ोर से सत्रह सौ कड़ोर ही सही /
छोटे भ्रष्टाचारियों का ये खेल नहीं /
बड़े-बड़े भ्रष्ट खिलारियों का सही गेम यही /
कई भ्रष्ट कुकर्मी हो गए मालामाल /
दिल्ली कि जनता का किया इसने बुरा हाल /
इसके नाम पे DTC में नयी बसें आई /
टिकटों  के नाम पे लूट ली गयी 
आम जनता की सारी कमाई /
छात्र,छात्राओं के बस-पास का बढाया इसने रेट भी /
माता-पिता के काटे इसने जेब और पेट भी /
बिना जरूरत के बने कई प्रोजेक्ट इस वास्ते /
जिससे जुड़ें है भ्रष्टाचार के गहरे रास्ते /
 यह सब देख जनता रो रही है /
अपने भ्रष्ट नेताओं को रो-रो कर कोस रही है /
अब तो जनता का एक ही सपना है /
भविष्य में लगे ऐसे गेमों पर पाबंदी और 
भ्रष्ट मंत्री और अधिकारी हो,तिहार जेल में बंदी /


ब्लोगर बंधुओं इस कविता पर अपनी प्रतिक्रिया देने के बाद नीचे दिए पोस्ट के लिंक पर भी जाने और देश हित में अपना विचार 100 शब्दों में जरूर व्यक्त करने क़ी कृपा करें / क्योंकि कल इस हफ्ते विचार व्यक्त करने का आखरी दिन है और सोमवार को इसी ब्लॉग पर उम्दा विचार व्यक्त करने वाले ब्लोगर के नाम और इनाम कि घोषणा क़ी जाएगी / अपने विचार नीचे लिखे पोस्ट के लिंक पर क्लिक करने के बाद खुलने वाले पोस्ट के टिप्पणी बॉक्स में ही करें / 


Friday, April 23, 2010

ब्लॉग--सत्ता--जनता------

आज व्यवस्था पर व्यंग श्रृंखला में "ब्लॉग--सत्ता--जनता"विषय पर एक कविता आप लोगों कि सेवा में प्रस्तुत है -------
                    

                     "ब्लॉग--सत्ता--जनता"





जनता हाहाकार कर रही है /
सत्ता हुंकार भर रही है /
ब्लॉग इस पड़ विचार कर रही है /
जनता महंगाई कि मार झेल रही है /
सत्ता महंगाई को विकाश कह रही है /
ब्लॉग और ब्लोगर कुछ करना चाह रही है /
भ्रष्टाचार के नंगे नाच को,अपने नजर से ब्लॉग पे उतार रही है /
IPL का  BPL से कड़ी भी जोड़ रही है / 
विपक्ष शोर मचा रही है /
चोर-चोर चिल्ला रही है /
विपक्ष कि भी मजबूरी है /
पेट भरना सब के लिए जरूरी है  /
जब से नितिन गडकरी आये /
बीजेपी और विपक्ष में थोरी बहुत मजबूती लाये /
मीडिया भी इस खेल में शामिल हो गई है /
मजबूरी में,सत्ता के समर्थन में,गाने गा रही है /
ब्लॉग और ब्लोगर यह सब जाँच रही है,
और ब्लॉग-जगत में एकजुटता चाह रही है /
जनता परेशान है /
सत्ता खुशहाल है /
ब्लॉग और ब्लोगर हाले-बयाँ कर रही है /
जनता उस दिन का इंतजार कर रही है /
ऐसे सत्ता कि कब्र खोदने कि घड़ी,नजदीक आ रही है /
ब्लॉग और ब्लोगर अपना काम कर रही है /
ऐसे सत्ता के कब्र के जगह का,देश में इंतजाम कर रही है /
इतना तो तय है ,एक दिन ऐसा आएगा /
जनता कि हाय,ऐसे सत्ता को खाकर मिटाएगा ?
चोर -उच्चके नगर भिखारी होंगे /
आम जनता और इमानदार सत्ता के प्रभारी होंगे /
ब्लॉग और ब्लोगर इसके उत्तराधिकारी होंगे /

Thursday, April 22, 2010

"दिल्ली मेरी जान" ------------?

 आज प्रस्तुत है व्यवस्था  पर व्यंग श्रृंखला में               " दिल्ली मेरी जान" विषय पर एक कविता आप लोगों की सेवा में --------

"दिल्ली मेरी जान" 

दिल्ली मेरी जान है /
शीला जी जैसी मुख्यमंत्री इसकी शान हैं /
दौरती है यहाँ लो-फ्लोर चमचमाती बसें /
जिसके भीतर है भ्रष्टाचार कि कई परतें घुंसी  /
यातायात को बर्बाद कर भ्रष्टाचार को आबाद किया /
लोगों कि जेबें काटकर मंत्रियों को आबाद किया /
इस दिल्ली में है फ्लाई-ओवर कि भरमार /
जिसके बोझ तलें दिल्ली कि जनता का जीवन बेकार /
झुग्गियों के पुनर्वास के नाम पर वर्षों से /
होता रहा भ्रष्टाचार का पुनर्वास कई-कई वर्षों से /
यहाँ कॉमनवेल्थ के मेले कि तैयारी है /
जिससे लोगों में अजीब सी खुमारी है /
यहाँ के ओद्योगिक क्षेत्र में सड़के हैं खस्ता हाल /
लेकिन मंत्रियों के क्या खूब हैं ,हाल-चाल /
न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलता,यहाँ कामगारों को /
कई-कई गुना मिल जातें हैं,मंत्रियों और अधिकारियों को /
DDA के फ्लेटों कि भरमार है /
लेकिन उसे पाना और बसना दुशवार है /
मिलता नहीं यहाँ मुफ्त पानी कहीं पीने को /
कहने को है देश कि राजधानी जीने को /
शिक्षा मंत्रालय में जब अरविंदर सिंह लवली आयें /
स्कूल प्रबंधकों के लिए खुशखबरी लायें /
जब से अरविंदर सिंह लवली यातायात मंत्रालय में आयें /
बस से यातायात करने वाले हैं घबराये-घबराये /
पूरे देश के रखवाले यहाँ रहतें हैं /
लेकिन देश कि रखवाली कहाँ करतें हैं /
कहने को "दिल्ली" देश कि जान और शान है /
लेकिन आम लोगों के लिए तो परेशान,बेहाल-फटे-हाल है /
कॉमनवेल्थ गेम में देश और विदेश से आयेंगे लोग कई /
देखेंगे इस दिल्ली का असल आत्मा और मुखौटा नयी /
यमुना यहाँ बहती है /
इस दिल्ली के गंदगी और भ्रष्टाचार कि कहानी कहती है /


 

Wednesday, April 21, 2010

कविता में ब्लॉग और ब्लोगरों कि चर्चा -------

 मैंने अपने अनुभव और विवेचना के आधार पर,ब्लॉग एक न एक दिन सामानांतर मिडिया का सशक्त ब्रांड के रूप में जरूर उभरेगा इस सोच को कविता  के रूप में उतारा है / आपकी प्रतिक्रिया के अपेक्षा में / विषय है - 

*कविता में ब्लॉग और ब्लोगरों कि चर्चा*

ब्लॉग और ब्लोगर पूरी ताकत से बढ़ रहें हैं /
ब्लोगिंग सामानांतर मीडिया बन खिल रहा है /
बस आर्थिक आधार को खोज रहा है /
ब्लोगरों से प्रतिदिन कम से कम तीन घंटे और 
महीने में दस रुपैया, ब्लॉग के विकाश फंड के लिए,
सभी ब्लोगरों से एकजुट होकर देने कि आशा देख रहा है /
रवीश कुमार जी  ,पुण्य प्रसून बाजपेयी जी ,किशोर अजवानी जी से 
मीडिया के पतन का हल ढूँढने का एक कस्बा बनाने
को कह रहा है /
जिस कस्बे में रचना जी जैसी नारी कि कहानी और 
फिरदौस खान जी  कि फिरदौस डायरी से लिखी जाय ब्लॉग कि जवानी /
कडुवा सच -श्याम कोरी उदय जी के जुवान में और 
पराया देश -राज भाटिया जी के मानवता के अपील में /
जहाँ हो डॉ.टी.एस दराल का दरालनामा कि सार्थक चर्चा 
और नई कलम से लिखी जाती हो उभरते हस्ताक्षर /
जहाँ कुछ भी कभी भी से ब्लोगिंग कि हो रही मजबूती और बिहारी बाबु कहिन से अजय कुमार झा जी को 
मिलती हो ब्लोगरों कि सहानभूति /
जिस कसबे में काजल कुमार जी अपनी कार्टून से लाटरी निकाल कर ब्लोगरों को अलग सपना दिखा रहें हों /
जहाँ बिगुल से ललित कुमार जी ,चर्चा मंच से डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी ,मिसफिट से गिरीश विल्लोरे जी और छोटी गली से चन्दन कुमार जी अच्छी विचारों के साथ ब्लोगरों के वापसी कि खुश खबरी भी सुना रहे हैं /
इसी कस्बे से  रुचिगर सूचनाक मंच के जरिये        
कुमार राधा रमण कंठ जी मिथला और मैथली कि 
सच्ची सेवा कर रहें हैं /
इस कसबे कि देख रेख ब्लोग्वानी और चिट्ठाजगत बड़ी  मुस्तैदी से कर रहें हैं /
इस कस्बे में रहने वाले सभी लोगों को अदालत से लोकेश जी पूरी कानूनी सहायता पहुंचा रहें हैं /
इस कस्बे में समीर लाल जी कि उड़न तस्तरी बहुत 
तेज उड़ रही है तो सुमन जी कि nice टिप्पणियों  से टिप्पणियां छोटी होती जा रही है /
इसी कसबे में भडास ,सांसद जी .कॉम रहते हैं /
इस कसबे के बखान कि चर्चा पावला जी -प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा के जरिये कर,ब्लोगरों को हौसला पहुंचाते हैं /
और भी कई ब्लोगर लोग इस कसबे में रहते हैं ,जिनका योगदान भी कुछ कम नहीं ,बल्कि उनके प्रयत्न कि इस कसबे को सजाने में आशा ज्यादा है ,कम नहीं  /
आशा है ये कस्बा भारत के जमीर का कस्बा होगा
जहाँ से लोकतंत्र ब्लोगरों द्वारा नियंत्रित होगा /
असल में यह नए युग का सामानांतर मीडिया होगा /
     

ब्लॉग जगत और व्यवस्था पर व्यंग करती कविताओं कि सार्थकता -----?

आज बहुत दिनों बाद आलेख के वजाय कविता का सहारा लेने का सोचा है, इस देश कि सड़ चुकी व्यवस्था का चित्रन करने तथा यह जानने के लिए कि ब्लोगरों कि क्या प्रतिक्रिया आती है,मेरे इस प्रयास पर ?
आज मैंने विषय चुना है इस देश कि शिक्षा नीती ,प्रस्तुत है आपकी सेवा में /

बच्चों 
*इस देश में ^^^^कि शिक्षा*   


पहले विद्वता नीती पड़ भारी थी /
अब विद्वता पड़ नीती भारी है /
पहले शिक्षा से जीवन-यापन होता था /
अब पैसों से शिक्षा प्राप्त कि जाती है /
पहले स्कूल, गाँव - शहर के कोने में होते थे /
अब यह होता है बिल्डर माफिया के ठिकाने पे /
पहले बच्चों पर शिक्षा से विचार भारी होता था /
अब बच्चों पर किताब भारी होता है /
पहले स्कूल में शिक्षा मिलती थी 
अब स्कूलों में शिक्षा बिकती है /
पहले अभिभावकों को स्कूल सकून देता था /
अब अभिभावकों का खून चूस लेता है /
पहले कभी कभार स्कूल में भ्रष्टाचार होता था /
अब भ्रष्टाचार में ही स्कूल फलता -फूलता है /
पहले इंसानियत और मानवता स्कूलों में बसती थी /
अब इंसानियत और मानवता स्कूलों से काँपती है /
पहले बच्चों से देश का भविष्य निर्धारित होता था /
अब स्कूल और देश बच्चों को तय करता है /
पता नहीं आगे क्या होगा /
इस देश का भविष्य ना जाने कैसा होगा ?
जहाँ बच्चों और उसके माता-पिता को रुलाया जाता है /
उस देश का भाग्य हमेशा के लिए बिगड़ जाता है /

Monday, April 19, 2010

आयकर विभाग का नोटिस ,जाँच एजेंसियों का नोटिस ,जाँच आयोग व विभिन्न आयोगों का नोटिस --दिस इज टू मच ! ! ! !


                                              
                             आज हमारे देश में जिस तरह एक औरत के साथ बलात्कार होने पड़ उस औरत के शरीर से ज्यादा उसका दिल और दिमाग इतना टूट जाता है कि  उसका इलाज डोक्टर भी नहीं कर पाता  है / ठीक उसी प्रकार हमारे देश के इमानदार और कानून का पालन करने वाले लोगों का दिल और दिमाग सरकारी बलात्कार से इतना टूट चुका है कि वह गुम-सुम होकर कुछ भी बोलने कि हालत में नहीं है / 
ऐसी अवस्था के बाबजूद जब वह TV और अखवार में आये दिन ह़र भ्रष्टाचार के लिए भ्रष्टाचारियों को आयकर विभाग का नोटिस ,जाँच एजेंसियों का नोटिस ,जाँच आयोग व विभिन्न आयोगों का नोटिस कि ख़बरें पढता है और उसे एक भी जाँच के तर्कसंगत अंत तक पहुँच कर किसी को सख्त सजा कि ख़बरें सुनने को नहीं मिलती है ,तथा अदालतों से निकलते वक्त अपराधियों के कानून को जूते तले मसलने कि जालिम मुस्कान देखने को मिलती  है तो,आम जनता को ठीक वैसा ही महसूस होता है ,जैसे किसी बलात्कार से पीड़ित औरत को न्याय के बदले एक और बलात्कार से गुजरने पर महसूस होता है ,दिस इज टू मच प्रधानमंत्री जी ,बंद कीजिये ये ड्रामा ? 
                      क्या फायदा है ऐसे जाँच एजेंसियों और सरकार का जिसके नाक के नीचे सारे घोटालों को अंजाम दिया जाता है और सारी कि सारी व्यवस्था नोटिस भेजकर जनता को बेबकूफ बनाने में व्यस्त रहती है /
                 प्रधान मंत्री जी आपके नाक के नीचे DTC के बसों के खरीद का घोटाला ,कोमनवेल्थ गेम के नाम पर घोटाला ,DDA और भूमाफिया के गठजोर का घोटाला ,MCD में फर्जी कर्मचारियों का घोटाला और भी ना जाने कितने घोटाले ,CAG के आपत्तियों के बाबजूद आप और आपके सारे जाँच एजेंसियों ने क्या किया ?
                                                           अब तो जनता को न्याय चाहिए जो आपके कठोर फैसले और मानवीय सोच से उपजी संवेदनाओं के आधार पर न्याय के लिए उठाये गए आपके एकदम सटीक कदम से ही संभव है / अगर आप ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं तो बंद कर दीजिये ये जाँच एजेंसियों कि दुकान / आज देश को आधुनिक हथियारों कि नहीं बल्कि कानून और व्यवस्था दोनों क्षेत्र में मजबूत और निड़र निर्णय लेकर उसे सफलता से लागु करने वाले अधिकारियों और सेनानियों कि सख्त जरूरत है ,जिसकी कमी भी नहीं है हमारे देश में / बस जरूरत है उन्हें ढूंढकर सही जगह बैठाने कि /
                     आप माने या ना माने कुछ सुझाव दे रहा हूँ -1 -अपने कार्यालय से ऐसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाईये जिनको भ्रष्टाचार और अपराध के जाँच कि समझ नहीं है या ऐसा करने कि इक्षाशक्ति बिलकुल मर चुकी है / 
2 -मुख्य सूचना आयुक्त ,मुख्य सतर्कता आयुक्त ,RAW,IB,CBI,इत्यादि के मुखिया के पदों पड़ निड़र और न्याय के रास्ते में आने वाले किसी भी तूफ़ान से टकराने का माद्दा रखने वालों को जगह दीजिये और संसाधन मुहैया कराकर प्रतिदिन जाँच कि प्रगति करने को कहिये  / आज दब्बू अधिकारियों से काम नहीं चलने वाला बल्कि जरूरत है ,किरण बेदी जैसे सख्त और इमानदार अधिकारियों को गलत लोगों को सलाखों के पीछे ह़र हाल में भेजने का जिम्मा देने कि और अपराध नियंत्रण कानून को सख्ती से लागू करने कि /
3 -शर्मनाक है कि RTI कानून के तहत आये आवेदनों में  सिर्फ 27 % आवेदक को ही जानकारी मिल पाती है ,तय समय में या झूठि जानकारी मुहैया कराने वाले 98% सूचना अधिकारी को सिर्फ गलती सुधारें कहकर छोड़ दिया जाता है , आपके दिल्ली में ही कानून और व्यवस्था कि धज्जियां उरायी जाती हैं और पुलिस मूक बनी देखती रहती है / आप इस देश के मुखिया हैं ,आप बताईये कि क्या ऐसी स्थिति आपके लिए भी शर्मनाक  नहीं है  ?खासकर तब जब आपकी सरकार पाँच वर्षों से ज्यादा वक्त से शासन में है और आप भी /   

आइये लोकतंत्र को लोकतंत्र बनायें--------

        
ब्लोगर दोस्तों आपका राय बहुमूल्य है और देश हित के मुद्दे पड़ अतिआवश्यक भी इसलिए अभी सोचकर कम से कम 100 शब्दों और ज्यादा शब्दों कि कोई सीमा नहीं है के आधार पर नीचे लिखे पोस्ट के लिंक पर क्लिक कर उस पोस्ट के टिप्पणी बॉक्स में लिखकर दर्ज करें /   
        सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए --------------
                               सबसे उम्दा टिप्पणियों और सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों पर आप को इनाम के रूप में सम्मानित करने कि भी व्यवस्था है जिसकी रुपरेखा जानने के लिए नीचे लिखे लिंक पर क्लिक कर सकतें हैं /

अब ब्लोगरों को अपने टिप्पणियों और सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों पर ह़र हप्ते मिलेगा इनाम / इनाम कि राशी अकाउंट पेयी चेक द्वारा कुरिअर से उनके घरपर पहुँचाया जायेगा ---------

                        आपका राय व्यक्त करना ना सिर्फ देश  के हितों के मुद्दों पर बैचारिक क्रांति ला सकता है बल्कि ब्लोगिंग को एक सामानांतर मिडिया के रूप में स्थापित भी कर सकता है /अंत में एक बार फिर आपसे गुजारिस कि आपकी राय अमूल्य है , इसे जरूर व्यक्त कीजिये /

Sunday, April 18, 2010

सबसे खतरनाक वायरस-----

                   
          आपने कम्प्यूटर और इंटरनेट के वायरस और उससे निपटने तथा सुरक्षा के उपायों के बारे में सुना होगा / लेकिन आज यहाँ मैं आप लोगों को लोकतंत्र के सबसे खतरनाक  वायरस से मिलवाने और उससे निपटने के उपाय भी सुझाने जा रहा हूँ /
                  इस वायरस का नाम हैं -अवैध प्रतिनिधि या गैरकानूनी कार्य को अंजाम देने वाले कार्यकर्त्ता / ये ऐसा वायरस है जिसकी पहुंच किसी न किसी साईट के जरिये लोकतंत्र के ऊँचे से ऊँचे शिखर पर बैठे लोगों के व्यक्तिगत फाइल और ऑफिस के ह़र नेटवर्क से किसी न किसी डाटा कार्ड के माध्यम से जरूर होता है /
                    इसका IP address hai -bhrastachar.in और इसका html code hai-sarab'bideshi''sex>deshi bidesi->low&gt>bidesi>bold;low>bideshicoin;-indian -slow;//exp-usdollar.go-/tomy-ac.;swiss;bank//:>   आप भूलकर भी इस लोकतंत्र के वायरस के html कोड को अपने घर ,शहर या जिले में आने नहीं दीजिएगा अन्यथा हमारे देश के लोकतंत्र कि तरह ही आपको असीमित क्षति पहुंचाकर not responding--- का सिग्नल लिखित में आपके पते के ऊपर भेजेगा / हमलोगों ने अपने आन्दोलन के जांबाज कार्यकर्ताओं के मेहनत और भगवान कि असीम दया से इस वायरस का सारा बायोडाटा हाशिल किया है ,और इमानदार न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर इसका कोई न कोई एंटी वायरस कि खोज के लिए देश भर के जनता से सहयोग मांग रहें है / हमलोग इस वायरस के चपेट में आये लोगों के पास भी जाकर उनको ज्यादा पॉवर का वेक्सिन का टिका लगाकर उनको इस वायरस से दूर रहने का सलाह देते है / लेकिन कहीं-कहीं हमें वेक्सिन का टिका लगाने में दिक्तों का भी सामना करना पड़ता है और हमारे कार्यकर्त्ता शहीद भी हो जातें हैं लेकिन शहीद करने वालों को हमलोग कानूनी कार्यवाही के जरिये सजा जरूर दिलाते हैं /
               इसका काम यानि क्षति करने का तरीका -यह देशी सत्ता के दलाल टायप और बिदेशी सत्ता के मजबूत ड्रेकुला टायप लोगों के जरिये लोकतंत्र और लोकतंत्र कि रक्षा में लगे सच्चे ,इमानदार ,देशभक्त समाजसेवकों को परेशान करने और उन्हें भ्रष्टाचार में शामिल होने के लिए पहले मजबूर करते हैं और नहीं शामिल होने पर जान से मारने कि धमकी भी देतें हैं / कभी-कभी हिंसक हमला भी करवाते हैं / आजकल ये वायरस हमारे RTI कार्यकर्ताओं को देश भर में निशाना बना रहें हैं /
                                                    इनका पॉवर सप्लाई स्त्रोत - इस वायरस को शक्ति दो नंबर के पैसे से मिलता है ,जो इसे इनके ह़र क्षेत्र के लिंक जैसे उद्योगपतियों को ज़मीन मुहैया कराने के बदले ,छोटे से बड़े उद्योगपतियों को बिजली कनेक्सन ,पोलुसन प्रमाणपत्र जैसे और भी कई प्रमाणपत्रों के बदले,ह़र सरकारी विभाग के जरूरत के सामान के खरीद में ,लोकनिर्माण के ठेकों में तथा जनकल्याण के सभी निर्माण और फर्जी निर्माण से दलाली के जरिये ,इनको पूरे देश से अरबों रुपया मिलता है / लेकिन इनका सबसे बरा स्त्रोत है गरीबों के कल्याण कि सरकारी योजनाओं का पैसा जो इनको भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों और भ्रष्ट IAS व IPS अधिकारियों के सहयोग और बंदरबांट से प्राप्त होता है / इस स्त्रोत के जरिये ये लोकतंत्र को दोहरी मार पहुँचाता है /
                   इस वायरस से देश का ह़र सरकारी महकमा पीड़ित है और अब तो इसने कलयुगी बाबाओं के साईट से खूबसूरत मॉडल टायप वीडियो का सहारा लेकर भ्रष्ट मंत्रियों को होटलों में बुलाकर उनके  जरिये लोकतंत्र पड़ हमला करना शुरू कर दिया है / इस वायरस के चपेट में कुछ भ्रष्ट मंत्री और अधिकारी इस तरह आ चुके हैं कि वे लोकतंत्र का साईट खोलने के बजाय होटलों में बैठकर इस वायरस के लिंक को बिदेशों में बैठे साईट से जोड़कर लोकतंत्र के रहे-सहे डाटा को भी नष्ट करने पे तुले हुए हैं /  हलांकि इसकी सूचना सुरक्षा चेतावनी के रूप में लोकतंत्र के बचे-खुचे चेतावनी तन्त्र द्वारा लोकतंत्र के मैन सर्भर तक पहुँचाने कि कोशिश कि जाती है ,लेकिन इस वायरस का प्रभाव इतना है कि मैन सर्भर को उचित कार्यवाही करने से भ्रमित कर देता है / अब तो आलम यह है कि लोकतंत्र का बचा-खुचा सुरक्षा तन्त्र भी कमजोर पड़ गया है और सुरक्षा चेतावनी भी भेजना बंद कर दिया है , जिसकी वजह से इस वायरस ने लोकतंत्र के सबसे मजबूत तन्त्र पत्रकारिता और उच्च मध्यम वर्गीय को पूरी तरह खत्म करने पर आमादा है ,गरीबों और निम्न मध्यम वर्गीय को तो ये वायरस कब का तबाह कर खत्म कर चुका है /
                               इसके  पहचान के बारे में चेतावनी - ये वायरस इस भारत के लोकतंत्र के ह़र विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में अपनी पैठ बना चुका है / अनुमान के अनुसार एक विधान सभा क्षेत्र में इनकी संख्या कम से कम दो सौ से एक हजार है,और एक लोकसभा क्षेत्र में कम से कम एक हजार से दस हजार तक है / यह वायरस जिला केंद्र,ब्लोक ऑफिस ,जिला के ह़र बैंक ,ग्राम पंचायत ,स्कूल -कोलेज तथा जिले के माफियाओं के इर्द-गिर्द कमजोर और लाचार लोगों को अपना शिकार लगातार बनाकर पूरे लोकतंत्र को चौपट करने पर तुला है /
                            इसका एंटी वायरस हमलोग जल्द ही तैयार करने वाले है जिसकी सूचना जल्द ही किसी राष्ट्रिय TV न्यूज़ चेंनल पर रोज के आधे घंटे के कार्यक्रम के  प्रसारण के माध्यम से आपलोगों को मिलेगा /                            फ़िलहाल इस कार्यक्रम कि रुपरेखा और फंड कि व्यवस्था को पढने के लिए इस लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं / ये लिंक लोकतंत्र के खतरनाक वायरस से पूरी तरह सुरक्षित है   / http://hprdindia.org/anmol.html      

Saturday, April 17, 2010

भ्रष्टाचार के लिए पैसे के साथ-साथ शराब और शबाब का प्रयोग बेहद खतरनाक है -?


                     प्रधानमंत्री का कुछ दिनों पहले ये बयान आया था कि देश में महंगाई तो बढ़ी है , लेकिन बेरोजगारी को बढने नहीं दिया गया है / लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश एक ऐसे दो राहे पर खड़ा है ,जिसके एक तरफ पेट भरने और अपनी शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए पढ़ी लिखी लड़कियां कलयुगी बाबाओं के साथ मिलकर देह व्यापार का सहारा ले रही है ,जिसका ज्यादातर प्रयोग सरकारी संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार कि व्यवस्था से ह़र गलत काम और कागजों में प्रोजेक्ट को पूरा दिखाकर करोड़ों रूपये के गवन के लिए भी किया जा रहा है / वहीँ दूसरी ओर पढ़े लिखे नौजवान सीधे रास्ते पेट न भरता देख ठगी और धोखेवाजी का व्यापार करने वालों के चक्रव्यूह में फ़स  कर अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं /  ये स्थिति देश के लिए ना सिर्फ शर्मनाक है बल्कि देश के आन्तरिक और बाहरी दोनों सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद खरनाक है / ऐसी स्थिति को रोकने के लिए लड़कियों के पढ़ाई को स्नातक स्तर तक सरकारी तथा गैर सरकारी स्कूलों और महाविद्यालयों में निःशुल्क करने के साथ-साथ ईमानदारी भरे इक्छा शक्ति के साथ ह़र गावं में उच्च विद्यालयों कि स्थापना और ह़र ब्लाक स्तर पर महाविद्यालयों कि स्थापना कर उसे ह़र माह समुचित सरकारी सहायता पहुँचाने का देश के प्रधानमंत्री कार्यालय से व्यवस्था कि जाय और उसकी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय खुद करे और संचालन का भार  उस क्षेत्र के जनता को दे जिस  क्षेत्र में विद्यालय और महाविद्यालय हो / रही लड़कों की बात  तो स्नातक तक की शिक्षा पुड़ी कर  चुके छात्रों को अस्थाई तौर पड़ सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में विशेष भ्रष्टाचार निवारण शोधकर्ता का काम दे और उन्हें देश भर में चल रहे सरकारी कार्यों के निगरानी और उसमे हो रहे  अनियमितताओं तथा घोटालों की जाँच कि प्रगति रिपोर्ट प्रधानमंत्री के वेबसाइट पे ह़र हप्ते डालने को कहा जाय और उसके आधार पर दोषियों के खिलाप कार्यवाही की विवेचना करने व व्यवस्था को सुधारने का सार्थक प्रयास किया जाय / तब जाकर देश और देश के लोगों को थोडा  सकून मिलेगा और भ्रष्टाचार के लिए पैसे के साथ-साथ शराब और शबाब के  खतरनाक प्रयोग पड़ रोक लग सकेगा /

Friday, April 16, 2010

भ्रष्टाचार अब लोगों का पैसा नहीं लूट रहा बल्कि क्या आम और क्या खास सबका खून चूस रहा है ------------ ?

                                                
जिस देश कि गावों में विधवा पेंसन के बदले लाचार और बेवस विधवाओं का भी देह शोषण किया जाता हो,गरीब और लाचार लोगों के कल्याण के विभिन्न योजनाओं का पैसा भ्रष्ट मंत्री,जनप्रतिनिधि और उसके असामाजिक चमचों द्वारा हजम कर लिया जाता हो,ऐसे में क्या जरूरत है इन लूटेरों कि जमात को सरकारी पद,मोटी तनख्वाह और बे हिसाब भत्ता देने कि ? आज क्या आम और क्या खास,ह़र किसी के जेहन में एक ही सवाल है कि -क्या आज इस देश में सरकार और सरकार द्वारा संचालित, कानून द्वारा रक्षित, और समाज द्वारा स्वीकृत व्यवस्था है  ? भ्रष्टाचार अब लोगों का पैसा नहीं लूट रहा बल्कि क्या आम और क्या खास सबका खून चूस रहा है -?
                    आज इस बात पर चर्चा करने कि अति आवश्यकता है कि क्या यही लोकतंत्र है ,जिसे हमने देश भक्तों कि बलिदानी के कीमत के बदले अंग्रेजों से से पाया था और अब अंग्रेजों से भी बदतर और भ्रष्ट लोग इस देश कि ज्यादातर उच्च पदों पड़ बैठकर इस देश कि जनता का खून चूस रहें हैं / कौन पूछेगा ,कौन मांगेगा हिसाब,कौन मांगेगा जवाब ? बस बहुत हो चुका अब तो आम जनता को भड़ी सदन में प्रधान मंत्री,कृषि मंत्री और अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से सवाल कर जवाब मांगने का हक़ चाहिए ही चाहिए ? 
                   यह अधिकार तब मिलेगा जब पूरे देश के इमानदार और देश भक्त लोग इसके लिए एकजुट होंगे और देश में इसके लिए वैचारिक क्रांति फैलायेंगे / इस बिषय पर अपने अमूल्य विचार और सुझाव हमारे इस पोस्ट सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए --------------के टिप्पणी बॉक्स में अपनी टिप्पणियों  के रूप में दर्ज करें / आप इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी करने के साथ-साथ किसी के उम्दा टिप्पणियों पर टिप्पणी करके उसकी सराहना भी कर सकते हैं / अगर आपकी टिप्पणी उम्दा हुई और उसे सबसे ज्यादा लोगों ने सराहा तो आपको इनाम से सम्मानित भी किया जा सकता है / 

अब ब्लोगरों को अपने टिप्पणियों और सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों पर ह़र हप्ते मिलेगा इनाम / इनाम कि राशी अकाउंट पेयी चेक द्वारा कुरिअर से उनके घरपर पहुँचाया जायेगा ---------

                                            
आज  से ही ब्लोगरों को अपने अच्छे सोच पर इनाम के रूप में कमाने का मौका / http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/         ने अपने पोस्ट  सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए -------------- पर देश हित में ईमानदारी और गंभीरता से किये गए टिप्पणियों पर और उन में से सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों को कटेगरी 1-सबसे गंभीर टिप्पणी और केटेगरी 2-सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणी इन दोनों केटेगरी में ब्लोगरों को अपने टिप्पणियों और सबसे ज्यादा सराहे गए टिप्पणियों पर ह़र हप्ते मिलेगा इनाम / इनाम कि राशी अकाउंट पेयी चेक द्वारा कुरिअर से उनके घरपर पहुँचाया जायेगा / इनाम कि सूचना ह़र हप्ते के सोमबार को इस पोस्ट के सबसे ऊपर प्रकाशित किया जायेगा और इनाम का चेक मंगलवार को विजेता के पते पर ह़र हाल में भेज दिया जायेगा / ह़र हप्ते दोनों केटेगरी में इनाम कि राशी 500रुपया प्रति केटेगरी होगा / इन दोनों केटेगरी का इनाम किसी एक व्यक्ति को भी मिल सकता है अगर किसी ब्लोगर का टिप्पणी सबसे उम्दा हुआ और सबसे ज्यादा लोगों द्वारा सराहा भी गया तो /
इसमें एक ब्लोगर के लिए भाग लेने के दो मौके होंगे ,दोनों केटेगरी यानि एक बार तो आप अपनी उम्दा टिप्पणी कर सकते हैं और दूसरी बार किसी के टिप्पणी पर अपनी टिप्पणी कर सकते हैं / इस देश हित के इनामी प्रतियोगिता कि शुरूआत आज रात दिनांक 17/04/2010के ठीक 12.01 मिनट AM से होकर पूरे दो महीने यानि 13/06/2010के रात्रि 11.59PM तक होकर समाप्त होगा / इसमें कुल 16 ब्लोगर इनाम पा सकेंगे क्योंकि इस हप्ते में सिर्फ दो दिन शेष रहने कि वजह से पहले इनाम कि घोषणा 26/04/2010को और अंतिम इनाम कि घोषणा 14/06/2010को किया जायेगा और हर हाल में  पहले इनाम कि राशी 27/04/2010को और अंतिम इनाम कि राशी 15/06/2010को विजेता ब्लोगर को भेज दिया जायेगा / इनाम तो इनाम कि जगह है लेकिन देश हित में आपकी सोच और विचारों को हम क्या कोइ भी किसी इनाम से नहीं तौल सकता है ? आपका देश हित का सोच अपने आप में अमूल्य और इस देश के उच्च संस्कार कि निशानी है / आशा है आप हमारे इस प्रयास में अपनी विचारों कि भागीदारी देने के साथ-साथ अपने मित्रों को भी प्रोत्साहित करेंगे / कृपा करके कम से कम 100 शब्द जरूर लिखें /  आपका जय कुमार झा -09810752301 पर आपके किसी सवाल के जवाब के लिए भी हरदम तैयार बैठा है /      

सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें और अपना बहुमूल्य सुझाव देने का कष्ट करें----- देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए --------------

                    
आज जब पूरा देश भ्रष्टाचार और तर्कसंगत न्याय का अभाव  नामक गंभीर बीमारी के चपेट में पूरी तरह आ चुका है और ज्यादातर मंत्री,सांसद और विधायक सौदेबाजी और भ्रष्टाचार के वजह से आम जनता के हितों और मूलभूत जरूरतों के सरोकार को भूल चुकें हैं / जिसके वजह से आम जनता के लिए देश के संसद और राज्य कि विधानसभाओं का मतलब किसी भी मुद्दे को उठाकर पक्ष और बिपक्ष द्वारा आपस में सौदेबाजी से ज्यादा कुछ भी नहीं रह गया है ? ऐसे में देश के संसद और राज्यों के विधानसभाओं पर जनता के मेहनत कि कमाई के पैसों के सदुपयोग और इन संस्थाओं कि उच्च मर्यादाओं को बनाये रखने तथा इसके असल उद्देश्यों को जनता के बीच प्रभावी बनाने के लिए,देश के संसद और राज्य के विधानसभाओं के दोनों सदनों में आम जनता के द्वारा प्रश्न काल के लिए साल में दो महीने आरक्षित होना चाहिए, जिसमे सिर्फ जनता को मंत्रियों और अपने जनप्रतिनिधियों से प्रश्न पूछने का अधिकार होगा और संसद के सभापति जनता के प्रश्न काल को संचालित करेंगे / इस दो महीनों के दौरान देश के प्रधानमंत्री और राज्यों में मुख्य मंत्री समेत सभी सांसद,विधायक और मंत्री का सदन  में मौजूद रहना अनिवार्य होगा / जिससे किसी भी क्षेत्र कि जनता को प्रश्न पूछने वक्त किसी मंत्री या प्रतिनिधियों के अनुपस्थित रहने कि वजह से अपने प्रश्न का जवाब सुनने से वंचित न रहना पड़े / इस दो महीने के दौरान प्रश्न कौन पूछेगा और प्रतिदिन कितने लोग प्रश्न पूछेंगे इसका फैसला प्रश्न पूछने वाले जनता कि संख्या पर निर्भर करेगा,लेकिन इतना तो तय रहेगा कि प्रतिदिन चालीश बिभिन्न क्षेत्रों के जनता के चालीश प्रश्नों का उत्तर मंत्रियों या जनप्रतिनिधियों (जनता जिससे जवाब मांगेगी,यह जनता तय करेगी कि उसे जवाब किससे चाहिए) उन्हें जवाब देना होगा साथ-साथ जवाब कि लिखित प्रतिया भी प्रश्न पूछने वाले जनता को मुहैया कराया जाना अनिवार्य होगा / लेकिन इस प्रश्न पूछने वालों के लिए आवेदन सिर्फ कम से कम दसवीं पास जनता ही कर पायेगी / देश भर के जनता से इस प्रश्न काल में प्रश्न पूछने के लिए आवेदन मंगवाए जायेंगे और दो महीने में औसतन ५० दिन गुना ४०जनता  =२०००जनता प्रति सदन का चुनाव इस दो महीने के खास प्रश्न काल के लिए किया जायेगा / जनता का चुनाव आवेदन कि योग्यता के आधार पर चुने गए आवेदकों का देश के इमानदार सम्मानित समाजसेवकों के द्वारा किये गए ड्रा द्वारा किया जायेगा और चुने हुए प्रश्न कर्ता जनता को उनके अपने शहर के नजदीकी रेलवे स्टेशन से राज्य कि राजधानियों या दिल्ली तक का स्लीपर क्लास का मुफ्त रेल पास आने तथा जाने के लिए जारी किया जायेगा साथ ही उनके खाने के खर्च के लिए ५०० रुपया प्रतिदिन के हिसाब से कुल पाँच दिन के २५०० रुपया भी दिया जायेगा / प्रश्न करता को प्रश्न अपने क्षेत्र के सांसद,विधायक,मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री या किसी भी विभाग के मंत्री में से किसी एक से भरी सदन के सामने पूछने का अधिकार होगा / प्रश्न और उसके विषय का चयन प्रश्न कर्ता जनता को अपने प्रश्न काल के नियत दिन से दस दिन पहले या कम से कम दो दिन पूर्व सदन के उस सभापति को बताना होगा जिस सदन में वह प्रश्न पूछना चाहता है / जनता सिर्फ अपने राज्य के दोनों सदनों या देश के दोनों सदनों में  से किसी एक में प्रश्न पूछ सकती है / सही मायने में ऐसा कर के ही इस लोकतंत्र में जनता के पैसों को कुछ स्वार्थी और भ्रष्ट लोगों के द्वारा लूटने और जनता को भूखे मरने से बचा सकने के साथ-साथ आम लोगों का विश्वास लोकतंत्र में बहाल करने का काम कर पाएंगे / सभी ब्लोगरों से करबद्ध प्रार्थना है कि इस विषय पर अपने विचार और गंभीर सुझाव जरूर दें और अपने-अपने ब्लॉग पर भी लोकतंत्र के मजबूती और पारदर्शिता के लिए कम से कम एक ब्लॉग गंभीरता से जरूर लिखें जिसमे इस प्रश्न काल को और प्रभावी बनाने का सुझाव दें /

Thursday, April 15, 2010

सरकार मिले तो वार्ता अरुंधती रॉय मिले तो नक्सलियों को सहायता -----?

 हिंसा को को किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता,लेकिन छतीसगढ़ में हुई हिंसा के मूल कारणों पर तर्कसंगत बिवेचना कि जरूरत है न कि अरुंधती रॉय का नक्सलियों से मिलने और न मिलने पर बहस कर इस गंभीर मुद्दे के बहस को गलत दिशा में मोड़ देने कि / नक्सलियों से किसी भी आम नागरिक को हिंसा का रास्ता त्यागने और अपनी बात अहिंसक तरीके से रखने को प्रेरित करने का हक़ है तो अरुंधती रॉय ने कौन सा नक्सलियों को हथियारों का जखीरा पहुंचा दिया जो इस पर छतीसगढ़  पुलिस अरुंधती रॉय के खिलाप कार्यवाही कि बात सोच रही है ? शर्म आती है ऐसे विचारों को सुनकर छतीसगढ़  पुलिस को अपना निकम्मापन नहीं दिखता  है जिससे छतीसगढ़ में नक्सलियों कि ताकत इतनी बढ़ गयी,राष्ट्रिय ख़ुफ़िया एजेंसियों को अपना निकम्मापन नहीं दीखता है जिससे नक्सलियों के पास अत्याधुनिक हथियार पहुँच गए जिससे वे इतने बड़े हत्याकांड को अंजाम दे सके / निश्चय ही ये कुछ ऐसे कारण है जिसकी जाँच कि जाने कि जरूरत है साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं को नक्सलियों से मिलने से रोकने के बजाय भ्रष्ट राजनीतिज्ञों पर खुफिया नजर रखने कि जरूरत है क्योंकि ये अपने फायदे के लिए नक्सली क्या आतंकवादी तक का सहारा ले सकते हैं और इनको देश और समाज कि परवाह कहाँ / सही मायने में नक्सली हिंसा के लिए व्यवस्था में उच्च पदों पर बैठे भ्रष्ट और गद्दार लोग जिम्मेवार हैं ना कि अरुंधती रॉय जैसे बुद्धिजीवी / इसलिए जरूरी है कि ऐसे गद्दारों कि पहचान कि जाय और इनको हर हल में व्यवस्था से बाहर रक्खा जाय,तब जाकर नक्सली हिंसा पर काबू लग पायेगा / साथ-साथ छतीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में सामाजिक संतुलन और गरीबों के कल्याण के फंड  को हर हल में गरीबों के हाथों तक पहुँचाने के ठोस उपाय और गरीबों के फंड को खाने वाले भ्रष्ट मंत्रियों के चमचों और अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने कि / सरकार इस और ध्यान दे तो अच्छा रहेगा रही नक्सलियों से वार्ता कि बात तो यह काम तो देश के इमानदार समाज सेवकों को ही करने देना चाहिए क्योंकि वे सरकार से अच्छी वार्ता कर सकते हैं ,बस जरूरत है सरकार द्वारा उस वार्ता के परिणामों को ईमानदारी से लागू करने कि  ? अगर ऐसा होता है तो इस देश में सही मायने में लोकतंत्र होगा /

Wednesday, April 14, 2010

सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और कमजोर चरित्र कहिं भारत को बर्बाद न कर दे ------?

                       
जरा सोचिये जो व्यक्ति अपने धर्म पत्नी के प्रति बफादार नहीं हो सकता,वह व्यक्ति समाज और देश के प्रति क्या बफादारी निभाएगा ? सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और उच्च पदों पर कमजोर चरित्र के लोगों कि आसान पहुंच से आज ह़र सच्चा,इमानदार,चरित्रवान और देशभक्त भारतीय नागरिक के मन में एक आशंका बलवती होती जा रही हैं कि कहीं ये सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और कमजोर होता चरित्र भारत को बर्बाद न कर दे / आज अगर आप ईमानदारी के राह पर चलकर और चरित्र कि मजबूती को आधार बनाकर किसी भी क्षेत्र में कामयाबी पाना चाहते हैं तो निश्चय ही आप भारतरत्न कि उपाधि से भी बड़े उपाधि के हक़दार हैं, क्योंकि आज दिमाग जो ह़र मनुष्य के शरीर में होता है और वह ही मनुष्य के ह़र शक्ति का केंद्र होता है,लेकिन जब शरीर भूख से तड़पता है तो ह़र दिमाग में इतनी ताकत नहीं रह जाती है कि वह अपने शरीर और अपने व्यवहार को इंसानी उसूलों के अनुसार चला सके / यही वजह है कि कई बुद्धिजीवी भी कई बार पेट भरने के लिए अमानवीय व्यापार चलाने वालों के टीम में शामिल होकर उनके व्यापार को अपनी बुद्धि के बल पर आसमान कि बुलंदियों पर पहुंचा देते हैं,ये अलग बात है कि ऐसा करके वे अपने बुद्धि  का ना सिर्फ दुरूपयोग करते हैं बल्कि समूची मानवता को शर्मसार करने का काम करते हैं / आज कुछ इसी प्रकार का काम देश के कई बड़े पत्रकार कर रहें हैं जिससे खोजी पत्रकारिता लगभग बिलुप्त होती जा रही है और ह़र चेनल या अखवार पर किसी मानवीय पहलुओं को छूते हुए टिप्णियों और सार्थक विवेचनाओं कि जगह उच्च पदों पर बैठे लोगों के एक पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी या उनके अनैतिक प्यार और कमजोर चरित्र को उनके तगमे और उपाधियों कि तरह प्रचारित किया जाना निश्चय ही  गंभीर सामाजिक असंतुलन और कमजोर चरित्र को बढ़ावा देने का काम कर रहा है / (काश इन पत्रकारों के मन से भगवान लोभ-लालच निकाल कर देश और समाज के भलाई का लालच भर देतें तो आज से ही देश में सामाजिक संतुलन कि शुरुआत होने लगती /) जिसके वजह  से हमारे समाज के नयी पीढ़ी जिनका दिमाग परिपक्वता कि ओर अग्रसर होता है, अपने देश के उच्च पदों पर बैठे लोगों के इस कमजोर चरित्र के गुण अबगुण को समझे वगैर उसे एक रोल मोडल के रूप में अपने दिमाग में बैठाकर अपने चरित्र को कमजोर होने से नहीं  रोक पाते हैं / ऐसी स्थिति किसी भी सभ्य समाज और खासकर भारतीय संस्कृति के लिए खतरे कि घंटी है /
                          आज कोई भी पत्रकार खोजी पत्रकारिता जैसे खतरों पे चलकर भूखे मरने और अपने बीवी बच्चों को भूखे मरने को मोहताज करने के वजाय पत्रकारिता को भ्रष्ट और सत्ता के दलालों के हाथों बेचकर अपना और अपने बच्चों का जीवन सुखी और मजेदार बनाने को तरजीह देता है / हलांकि उनके इस कदम से ना तो सही मायने में उनका और ना ही उनके बच्चों का भला होता हैं बल्कि देश के गद्दार और बेहद भ्रष्ट लोग जो सरकारी खजाने को लूटतें हैं को सरकारी खजाना जो जनता के कल्याण के लिए प्रयोग होना चाहिए था को जनता के लिए कागजों में प्रयोग हुआ दिखाकर खुलेआम लूटने कि इजाजत जरूर मिलजाती है / आज देश में आर. टी . आई कानून होने के बाबजूद लोग इस कानून का प्रयोग करने से डरतें हैं क्योंकि मिडिया ऐसे लोगों को तरजीह और समुचित जगह नहीं दे पाती है जिससे ऐसे लोगों पर भ्रष्ट लोग हमला करने से नहीं चूकते जो देश में सही मायने में लोकतंत्र को मजबूत करने का काम करना चाहते हैं वहीँ दूसरी ओर भ्रष्ट लोगों के वाहवाही और उनके कमजोर चरित्र का बखान मिडिया में सुर्खियाँ बनने कि वजह से भी इमानदार लोगों का हौसला पस्त होता है,फिर भी कुछ लोग इन बेहद विपरीत परिस्थितियों के बाबजूद निडरता से देश और समाज के भले के लिए काम कर रहें हैं / ऐसे लोगों को हमारा पूरे देश के लोगों के तरफ से सलाम और देश के लोगों से एक अपील कि अगर कोई है जो ऐसा काम आपके क्षेत्र में कर रहा तो उसकी पूरी मदद कीजिये ,क्योंकि सिर्फ ऐसे लोग ही इस देश और समाज को सामाजिक असंतुलन और कमजोर चरित्र के दलदल से बाहर निकाल सकता है / ऐसे लोगों के बारे में कृपा कर मुझे भी बताने का कष्ट करें क्योंकि ऐसे लोग निश्चय ही आज के महात्मा गाँधी ,भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे स्वतंत्रता सेनानी हैं जिनका दर्शन मात्र ही किसी को सही राह पर चलने को प्रेरित कर सकता है /

Tuesday, April 13, 2010

किसी देश का स्वेत रक्त होता है उस देश कि गुप्तचर या खुफिया संस्था -------------


     
जिस तरह मानव शरीर को किसी भी रोग से बचाने के लिए ह़र मानव शरीर में दो तरह के रक्त (RBC)यानि लाल रक्त  कण  (WBC) यानि स्वेत रक्त कण होता है /इस में से (WBC)यानि स्वेत रक्त का काम किसी भी रोग से पूरे शरीर कि रक्षा करना होता है और यह पूरी तरह मानव शरीर के दिमाग द्वारा नियंत्रित होता है और जब यह कमजोर या अप्रभावी हो जाता है तो मानव शरीर कई रोगों के चपेट में आ जाता है / ठीक उसी तरह किसी देश का स्वेत रक्त होता है उस देश कि गुप्तचर या खुफिया संस्था / क्या आप जानते हैं अपने देश के स्वेत रक्त यानि गुप्तचर संस्थाओं के नाम ? लीजिये हम आपको बता देते हैं भारत जैसे लोकतंत्र शरीर के स्वेत रक्त कण का नाम (१)RAW रिसर्च एंड अनल्यसिस विंग (२)IB इंटेलिजेंस ब्यूरो (३)DIA डिफेन्स इंटेलिजेंस एजेंसी  ये तिन हमारे देश के  मुख्य स्वेत रक्त कण हैं / इनकी सहायता के लिए और भी कई  सरकारी एजेंसियां हमारे देश में कार्यरत हैं / अब सवाल उठता है की अड्बों रुपया इन एजेंसियों के प्रोजेक्ट और इन में कार्यरत कर्मचारियों पड़ हर साल खर्च करने के बाबजूद हमारा देश कई गंभीर रोगों जैसे भ्रष्टाचार,कानून का खौफ का ना होना,भ्रष्ट लोगों का सांसद और मंत्री पद पड़ बैठ कर अपने रिश्तेदारों और चमचों को फायदा पहुँचाने के लिए देश कि आम जनता और देश को खुलेआम लूटना ,इत्यादि से क्यों पीड़ित है ? जवाब हैं इस देश के स्वेत रक्त कण का इस देश के दिमाग यानि आम जनता द्वारा नियंत्रित ना होकर जनता के सेवक यानि प्रधानमंत्री या PMO द्वारा पूरी तरह नियंत्रित होना / हमारे देश में ऐसे देशभक्त गुप्तचरों कि कमी नहीं जो देश को ह़र बीमारी से बचा सकता है,लेकिन जब ईमानदारी से कार्यकरने के बदले दुत्कार और चमचागिरी के बदले सम्मान मिले तो कैसे कैसे देशभक्त भी चुपचाप तमाशा देखने वाले बन जाते हैं / एक प्रधानमंत्री से आज के युग में यह आशा नहीं कि जा सकती हैं कि वह इन बेहद संबेद्न्शील एजेंसियों को देश हित के बजाय अपने या अपने दल के हितों कि रक्षा के लिए प्रयोग नहीं करेगा  ? ऐसे ही कारणों के वजह से CBI को कांग्रेस ब्यूरो ऑफ़ इन्भेसटीगेसन कहा जाने लगा है जो पूरे देश के साथ-साथ इमानदार गुप्तचर या जाँच अधिकारियों के लिए शर्मनाक बात है और ऐसे वातावरण की वजह से हमारे देश का स्वेत रक्त कण दूषित हो रहा है,जिसे साफ करने की जरूरत है / इसे साफ करने का एक सबसे कारगर उपाय है कि देश में जनशिकायत मंत्रालय की स्थापना कर देश के सभी जाँच एजेंसियों को इस मंत्रालय के अधीन कर दिया जाय और यह मंत्रालय देश के राष्ट्रपति के अधीन काम करे और इस मंत्रालय के तिन कार्यकारी मंत्री हो (१)प्रधानमंत्री (२)सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश  और (३) देश के मुख्य सुचना आयुक्त / इसके साथ ही इस मंत्रालय के लिए हर छह माह में एक बार पूरे देश के जनता के सामने अपने कार्यों का लेखा जोखा प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मिडिया के जरिये रखना अनिवार्य कर दिया जाय / इस मंत्रालय में देश के किसी कोने से कोई भी व्यक्ति कभी भी देश के शेहत को ख़राब करने वालों के खिलाफ शिकायत कर सकता हो और इस मंत्रालय को भेजे जाने वाले शिकायत के लिए देश के ह़र डाकघर को यह निर्देश जारी किया जाय कि जनशिकायत मंत्रालय को भेजे जाने वाले ह़र पत्र को बेहद गोपनीय सरकारी डाक माना जाय और  बेहद गोपनीय तरीके से मंत्रालय तक पहुँचाया जाय और शिकायत भेजने वाले से कोई शुल्क ना लिया जाय /  जब ऐसा होगा तब सही मायने में देश के स्वेत रक्त कण का नियंत्रण देश के असल दिमाग के द्वारा होगा जिससे देश का स्वेत रक्त कण देश को गम्भीर बीमारी से बचाने का काम सही मायने में कर पायेगा और उसकी पहुँच देश के ह़र कोने में बीमारी के पैदा होने वाने मूल कारणों तक होगा /         

Monday, April 12, 2010

प्राइवेट स्कूलों को फ़ीस देने कि जरूरत नहीं-------------------?

                       
प्राइवेट स्कूलों को फ़ीस देने कि जरूरत नहीं क्योंकि ये लालची और शिक्षा के नाम पड़ शिक्षा का सत्यानाश कर रहें हैं / इस देश में और शिक्षा का खासकर दिल्ली में सत्यानाश जितना इन प्राइवेट स्कूलों ने किया है उतना तो इन स्कूलों को बंद कर दिया जाय तो भी नहीं होगा / अब तो इनको ठीक करना है तो सभी अभिभावक आज से एकजुट होकर इनको फ़ीस देना बंद कर दें / उसके बदले अगर ये आपके बच्चे को परेशान करने या स्कूल से निकालने कि धमकी देते हैं तो डरें नहीं बल्कि इनको अपनी फ़ीस को एक शिक्षण संस्थान के चरित्र के आधार पर तय करने और नहीं करने पड़ कानूनी कार्यवाही करने से पहले दिया जाने वाला नोटिस हर अभिभावक स्कूल को दे और उसमे स्कूल द्वारा अभिभावकों को तरह-तरह से लूटने जैसे फ़ीस नहीं देने या पीछे पे कमिशन के नाम पड़ हर बच्चों से २००० से लेकर ८०००  तक उसूला गया और इसके लिए किसी का अडमित कार्ड नहीं देने कि धमकी दी गयी तो किसी को परीक्षा का रिजल्ट नहीं दिया गया ये सारी प्रतारणा कि बातें जरूर लिखें और एकजुट होकर ऐसे स्कूल कि खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए लोगों को एकजुट करें,ऐसा करने पड़ ही दिल्ली में शिक्षा वयवस्था सुधरेगी / खैर थक हार कर लोगों ने इनके धमकी के आगे घुटने टेक दिए ,ये स्कूल नहीं बल्कि शिक्षा के नाम पर लोगों का खून चूसने वाले भेडिये है / ऐसे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने से अच्छा तो अनपढ़ रखना होगा क्योंकि ऐसे स्कूल में पढ़कर तो बच्चा कम से कम इन्सान और इंसानियत के उसूलों को तो भूल ही जाएगा लेकिन अनपढ़ रहकर कम से कम इंसानियत को तो नहीं भूलेगा / हमारे देश के राष्ट्रपति महोदया और प्रधान मंत्री महोदय कृपया ध्यान दें, इस ओर / सिर्फ शिक्षा का कानून लाने से नहीं होगा बल्कि शिक्षा में और शिक्षा के व्यवसाय में इन्सान और इंसानियत को भी लाना होगा / आज देश को पढ़ा लिखा वयक्ति से ज्यादा इन्सान और इंसानियत कि जरूरत है ? जरा सोचिये क्या यही इंसानियत है कि ॐ और सदाचार को अपना आधार कहने वाला नरेला का एक स्कूल चौथी क्लास के बच्चे से हर माह १२३५ रुपया टिउशन फ़ीस ,१५० रुपया डेवेलोपमेंट फंड ,७५ रुपया पुपिल्स फंड ,४५० रुपया छह किलोमीटर के लिए यातायात शुल्क और १९०० रुपया ह़र साल सालाना शुल्क उसूलती है , क्या ऐसे शुल्क उसूलने वालों को स्कूल चलाने कि इजाजत सरकार को देनी चाहिए ? ऊपर दिए गए फ़ीस का विवरण चौथी कक्षा के चार दिन पहले जारी किये गए फ़ीस बुक के प्रमाणिक आधार पर आधारित है / आज से फ़ीस देना बंद और पैसों के लालची भेडियों के खिलाफ जंग शुरू , क्या आप हैं इस जंग के लिए तैयार ? अगर हाँ तो हमसे सलाह मशवरे के लिए कभी भी फोन करें -09810752301 हमें लगता है कि देश के महामहिम राष्ट्रपति महोदया को इस बेहद गंभीर मुद्दे पड़ हस्तक्षेप कर दोषी स्कूलों के खिलाफ जरूर कार्यवाही करना चाहिए / आप भी अगर ऐसा ही सोचतें हैं तो इस ब्लॉग पड़ देश के राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए अपनी पीड़ा और उसके समाधान महामहिम को बताएं या राष्ट्रपति भवन ,न्यू दिल्ली -११०००४ के पते पड़ पत्र लिखें और दिल्ली में शिक्षा कि दुर्दशा के बारे में बताएं / आप महामहिम को अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने में इन लालची स्कूलों द्वारा फ़ीस के नाम पड़ लूटने कि पीड़ा को presidentofindia@rb.nic.in पड़ इ मेल भी कर सकते हैं / देश के महामहिम तक इस गंभीर मुद्दे को पहुँचाना हमारा नागरिक कर्तव्य है / देश के राष्ट्रपति अगर चाहें तो एक दिन में इन स्कूलों को बंद किया जा सकता है और दिल्ली सरकार जो इन लालची स्कूलों के फायदे के लिए सरकारी स्कूलों को बदहाल करके रखती है और कडोरो रुपया शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा निदेशालय पड़ खर्च करती है का भी हिसाब दिल्ली सरकार को देना होगा /

Tuesday, April 6, 2010

भारत में लोकतंत्र नही बल्कि खुलेआम मंत्रितंत्र है --------------

भारत में लोकतंत्र को किस पार्टी ने खुलेआम मंत्रितंत्र में बदल कर रख दिया है यह तो मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता लेकिन हम क्या आज पूरा देश यह महसूस कर रहा है क़ी भारत मैं लोकतंत्र नहीं बल्कि मंत्रितंत्र है /कहते है दिल्ली भारत का दिल है और जिस लोकतंत्र का दिल सड़ गया हो वहाँ लोकतंत्र क़ी उम्मीद करना सबसे बड़ी मुर्खता कही जाएगी /अगर हमारी  बातों पर किसी को यकीन ना आये तो हमारी बातों पर गौर करने के साथ-साथ जरा संजीदगी से सोचिये -दिल्ली में कोई भी काम लोकतंत्र क़ी मर्यादा के दायरे में नहीं हो रहा है /उदाहरण कई है जैसे -शिक्षा मंत्री का काम होता है ,शिक्षा व्यवस्था को सही कर उसके व्यवसायीकरन को रोकना लेकिन पिछले तीन वर्षों में  दिल्ली में देश और प्रदेश दोनों के शिक्षा मंत्री के होते हुए भी दिल्ली में जितना शिक्षा का व्यवसायीकरन कर उसके स्तर को गिराया गया है उतना तो कभी किसी इन्सान ने सपने में भी नहीं  सोचा था /इसके कारण पर जब आप गौर करेंगे ,जिसकी चर्चा हर घर में होती है और लोग कहते हैं क़ी जब शिक्षामंत्री निजी स्कूलों से मिलकर अपना और अपने पार्टी के फंड को अरबों तक पहुँचाने का काम करेंगे तो शिक्षा और शिक्षा का असल मकसद ''बच्चों को संस्कार और चरित्र निर्माण क़ी ओर आगे बढाकर देश और समाज को मजबूत आधार प्रदान करना ''दोनों का सत्यानाश होना निश्चित है /शिक्षा व्यवस्था को सही मायने में हमारे देश क़ी सरकार सुधारना ही नहीं चाहती है क्योंकि लोग शिक्षित और विद्वान होंगे तो भ्रष्टाचार और सरकारी पैसे को भ्रष्ट मंत्रियों द्वारा अपने जागीर क़ी तरह इस्तेमाल करने के खिलाफ आवाज उठायेंगे जिससे देश में सुशासन आएगा जो भ्रष्ट और निकम्मे मंत्रियों का सेहत  ख़राब कर सकता है और इस देश में,देश और समाज क़ी सेहत बेशक ख़राब हो जाय लेकिन भ्रष्ट मंत्रियों के सेहत क़ी पूरी गारंटी के लिए इस देश का खजाना और आम लोगों क़ी जेब दोनों पूरी तरह खुली है /शर्म आती है ऐसे मंत्रियों पड़ और ऐसी व्यवस्था पड़ /ऐसे मंत्रियों को रखने से अच्छा तो किसी विभाग का कोई मंत्री ना हो तो अच्छा होगा / इसी भारत के दिल दिल्ली में किसी भी सरकारी विभाग का कामकाज दिल्ली के लोगों के सेहत को ठीक करने वाला नहीं बल्कि लोगों को मानसिक यातना देने वाला है /दिल्ली के बिभिन्न ट्रांसपोर्ट ऑथरिटी में स्टाफ क़ी कमी के कारण लोगों को लाएसेंस बनाने और उसे पाने में हजारों रूपये शुल्क देने के बाबजूद महीनों चक्कर काटना पड़ता है /इसी दिल्ली में अगर समाज सेवकों के समूह द्वारा हर सरकारी विभाग के कर्मचारियों के संख्या क़ी जाँच क़ी जाय तो हर विभाग में फर्जी कर्मचारियों क़ी संख्या पायी जाएगी जिन फर्जी नामों पर हर महीने में लाखों का भुगतान होता है जो भ्रष्ट मंत्रियों और अधिकारियों में बंदरबाँट किया जाता है और आम जनता जो सरकारी खजाने को एक माचिस के खरीदने से लेकर विभिन्न प्रकार के टेक्स देकर हर रोज भरती है,उसे सेवा और सुविधा के नाम पड़ हर जगह ठगा और परेशान किया जाता है /वहीँ दूसरी ओर उसी पैसे से भ्रष्टमंत्री और अधिकारी जनता का शोषण और अपना और अपने रिश्तेदारों का खूब सेवा करते हैं /यही है हमारा लोकतंत्र ,अब इसे लोकतंत्र कहें या मंत्रितंत्र ? हमारे नजर में ऐसी स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक है और ऐसी स्थिति का एक ही इलाज है क़ी जनता  द्वारा  हर सरकारी विभाग का हर दो महीने में सामाजिक जाँच जरूरी कर दिया जाय और जनता को किसी भी भ्रष्टमंत्री के ऊपर कभी भी भ्रष्टाचार का शक होने पर देश के इमानदार समाजसेवकों द्वारा जाँच कराने का अधिकार दिया जाय / ये कैसा लोकतंत्र है जहाँ आमआदमी आज अंग्रेजों क़ी जगह भ्रष्टमंत्रियों और अधिकारियों क़ी गुलामी का दंश झेल-झेल कर भूखे मरने को मजबूर है / आम जनता जो अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति तक को चुनती है,उसी जनता  के विचारों और सुझावों  को मंत्रिमंडल के किसी भी निर्णय में शामिल करना और आमलोगों पड़ उस निर्णय से पड़ने वाले दुष्प्रभाव से समाज में उत्पन्न होने वाली असंतुलन से देश को होने वाला भयंकर नुकसान के बारे में कोई भी शोध नहीं किया जाता है ,और ऐसा इसलिए होता है क़ी मंत्रिमंडल में बैठे लोगों के स्वार्थ सिद्धि का शोध और लोगों को कैसे अपने दो वक्त के रोटी के बारे में दिन-रात सोचते रहने और देश व समाज के बारे में नहीं सोचने का शोध किसी भी निर्णय से पहले जरूर कर लिया जाता है / हमारे ख्याल से तो आज के हालात से अच्छा तो इस देश में कोई भी मंत्री और मंत्रालय नहीं होता और जनता खुद खुले आसमान के नीचे एक इमानदार प्रतिनिधि को चुनकर उसे कोई कार्य करने को देती और उससे हर महीने खुले आसमान के नीचे भरी सभा में सवाल-जबाब करती / सही मायने में लोकतंत्र तब होता /इसलिए अगर इस मंत्रीतंत्र  को बदलना है तो सारे मंत्री को हटाकर सभी मंत्रालय को बंद कर दिया जाना चाहिए ,क्योंकि इन पड़ होने वाला खर्चा जनता के पैसों क़ी खुलेआम बर्बादी है /