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Wednesday, April 14, 2010

सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और कमजोर चरित्र कहिं भारत को बर्बाद न कर दे ------?

                       
जरा सोचिये जो व्यक्ति अपने धर्म पत्नी के प्रति बफादार नहीं हो सकता,वह व्यक्ति समाज और देश के प्रति क्या बफादारी निभाएगा ? सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और उच्च पदों पर कमजोर चरित्र के लोगों कि आसान पहुंच से आज ह़र सच्चा,इमानदार,चरित्रवान और देशभक्त भारतीय नागरिक के मन में एक आशंका बलवती होती जा रही हैं कि कहीं ये सामाजिक असंतुलन कि भयावहता और कमजोर होता चरित्र भारत को बर्बाद न कर दे / आज अगर आप ईमानदारी के राह पर चलकर और चरित्र कि मजबूती को आधार बनाकर किसी भी क्षेत्र में कामयाबी पाना चाहते हैं तो निश्चय ही आप भारतरत्न कि उपाधि से भी बड़े उपाधि के हक़दार हैं, क्योंकि आज दिमाग जो ह़र मनुष्य के शरीर में होता है और वह ही मनुष्य के ह़र शक्ति का केंद्र होता है,लेकिन जब शरीर भूख से तड़पता है तो ह़र दिमाग में इतनी ताकत नहीं रह जाती है कि वह अपने शरीर और अपने व्यवहार को इंसानी उसूलों के अनुसार चला सके / यही वजह है कि कई बुद्धिजीवी भी कई बार पेट भरने के लिए अमानवीय व्यापार चलाने वालों के टीम में शामिल होकर उनके व्यापार को अपनी बुद्धि के बल पर आसमान कि बुलंदियों पर पहुंचा देते हैं,ये अलग बात है कि ऐसा करके वे अपने बुद्धि  का ना सिर्फ दुरूपयोग करते हैं बल्कि समूची मानवता को शर्मसार करने का काम करते हैं / आज कुछ इसी प्रकार का काम देश के कई बड़े पत्रकार कर रहें हैं जिससे खोजी पत्रकारिता लगभग बिलुप्त होती जा रही है और ह़र चेनल या अखवार पर किसी मानवीय पहलुओं को छूते हुए टिप्णियों और सार्थक विवेचनाओं कि जगह उच्च पदों पर बैठे लोगों के एक पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी या उनके अनैतिक प्यार और कमजोर चरित्र को उनके तगमे और उपाधियों कि तरह प्रचारित किया जाना निश्चय ही  गंभीर सामाजिक असंतुलन और कमजोर चरित्र को बढ़ावा देने का काम कर रहा है / (काश इन पत्रकारों के मन से भगवान लोभ-लालच निकाल कर देश और समाज के भलाई का लालच भर देतें तो आज से ही देश में सामाजिक संतुलन कि शुरुआत होने लगती /) जिसके वजह  से हमारे समाज के नयी पीढ़ी जिनका दिमाग परिपक्वता कि ओर अग्रसर होता है, अपने देश के उच्च पदों पर बैठे लोगों के इस कमजोर चरित्र के गुण अबगुण को समझे वगैर उसे एक रोल मोडल के रूप में अपने दिमाग में बैठाकर अपने चरित्र को कमजोर होने से नहीं  रोक पाते हैं / ऐसी स्थिति किसी भी सभ्य समाज और खासकर भारतीय संस्कृति के लिए खतरे कि घंटी है /
                          आज कोई भी पत्रकार खोजी पत्रकारिता जैसे खतरों पे चलकर भूखे मरने और अपने बीवी बच्चों को भूखे मरने को मोहताज करने के वजाय पत्रकारिता को भ्रष्ट और सत्ता के दलालों के हाथों बेचकर अपना और अपने बच्चों का जीवन सुखी और मजेदार बनाने को तरजीह देता है / हलांकि उनके इस कदम से ना तो सही मायने में उनका और ना ही उनके बच्चों का भला होता हैं बल्कि देश के गद्दार और बेहद भ्रष्ट लोग जो सरकारी खजाने को लूटतें हैं को सरकारी खजाना जो जनता के कल्याण के लिए प्रयोग होना चाहिए था को जनता के लिए कागजों में प्रयोग हुआ दिखाकर खुलेआम लूटने कि इजाजत जरूर मिलजाती है / आज देश में आर. टी . आई कानून होने के बाबजूद लोग इस कानून का प्रयोग करने से डरतें हैं क्योंकि मिडिया ऐसे लोगों को तरजीह और समुचित जगह नहीं दे पाती है जिससे ऐसे लोगों पर भ्रष्ट लोग हमला करने से नहीं चूकते जो देश में सही मायने में लोकतंत्र को मजबूत करने का काम करना चाहते हैं वहीँ दूसरी ओर भ्रष्ट लोगों के वाहवाही और उनके कमजोर चरित्र का बखान मिडिया में सुर्खियाँ बनने कि वजह से भी इमानदार लोगों का हौसला पस्त होता है,फिर भी कुछ लोग इन बेहद विपरीत परिस्थितियों के बाबजूद निडरता से देश और समाज के भले के लिए काम कर रहें हैं / ऐसे लोगों को हमारा पूरे देश के लोगों के तरफ से सलाम और देश के लोगों से एक अपील कि अगर कोई है जो ऐसा काम आपके क्षेत्र में कर रहा तो उसकी पूरी मदद कीजिये ,क्योंकि सिर्फ ऐसे लोग ही इस देश और समाज को सामाजिक असंतुलन और कमजोर चरित्र के दलदल से बाहर निकाल सकता है / ऐसे लोगों के बारे में कृपा कर मुझे भी बताने का कष्ट करें क्योंकि ऐसे लोग निश्चय ही आज के महात्मा गाँधी ,भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे स्वतंत्रता सेनानी हैं जिनका दर्शन मात्र ही किसी को सही राह पर चलने को प्रेरित कर सकता है /

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