क्या आप समझते हैं कि जनता को सरकार को संयुक्त हस्ताक्षर अभियान के जरिए,आदेश देने का अधिकार है?

Monday, April 12, 2010

प्राइवेट स्कूलों को फ़ीस देने कि जरूरत नहीं-------------------?

                       
प्राइवेट स्कूलों को फ़ीस देने कि जरूरत नहीं क्योंकि ये लालची और शिक्षा के नाम पड़ शिक्षा का सत्यानाश कर रहें हैं / इस देश में और शिक्षा का खासकर दिल्ली में सत्यानाश जितना इन प्राइवेट स्कूलों ने किया है उतना तो इन स्कूलों को बंद कर दिया जाय तो भी नहीं होगा / अब तो इनको ठीक करना है तो सभी अभिभावक आज से एकजुट होकर इनको फ़ीस देना बंद कर दें / उसके बदले अगर ये आपके बच्चे को परेशान करने या स्कूल से निकालने कि धमकी देते हैं तो डरें नहीं बल्कि इनको अपनी फ़ीस को एक शिक्षण संस्थान के चरित्र के आधार पर तय करने और नहीं करने पड़ कानूनी कार्यवाही करने से पहले दिया जाने वाला नोटिस हर अभिभावक स्कूल को दे और उसमे स्कूल द्वारा अभिभावकों को तरह-तरह से लूटने जैसे फ़ीस नहीं देने या पीछे पे कमिशन के नाम पड़ हर बच्चों से २००० से लेकर ८०००  तक उसूला गया और इसके लिए किसी का अडमित कार्ड नहीं देने कि धमकी दी गयी तो किसी को परीक्षा का रिजल्ट नहीं दिया गया ये सारी प्रतारणा कि बातें जरूर लिखें और एकजुट होकर ऐसे स्कूल कि खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए लोगों को एकजुट करें,ऐसा करने पड़ ही दिल्ली में शिक्षा वयवस्था सुधरेगी / खैर थक हार कर लोगों ने इनके धमकी के आगे घुटने टेक दिए ,ये स्कूल नहीं बल्कि शिक्षा के नाम पर लोगों का खून चूसने वाले भेडिये है / ऐसे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने से अच्छा तो अनपढ़ रखना होगा क्योंकि ऐसे स्कूल में पढ़कर तो बच्चा कम से कम इन्सान और इंसानियत के उसूलों को तो भूल ही जाएगा लेकिन अनपढ़ रहकर कम से कम इंसानियत को तो नहीं भूलेगा / हमारे देश के राष्ट्रपति महोदया और प्रधान मंत्री महोदय कृपया ध्यान दें, इस ओर / सिर्फ शिक्षा का कानून लाने से नहीं होगा बल्कि शिक्षा में और शिक्षा के व्यवसाय में इन्सान और इंसानियत को भी लाना होगा / आज देश को पढ़ा लिखा वयक्ति से ज्यादा इन्सान और इंसानियत कि जरूरत है ? जरा सोचिये क्या यही इंसानियत है कि ॐ और सदाचार को अपना आधार कहने वाला नरेला का एक स्कूल चौथी क्लास के बच्चे से हर माह १२३५ रुपया टिउशन फ़ीस ,१५० रुपया डेवेलोपमेंट फंड ,७५ रुपया पुपिल्स फंड ,४५० रुपया छह किलोमीटर के लिए यातायात शुल्क और १९०० रुपया ह़र साल सालाना शुल्क उसूलती है , क्या ऐसे शुल्क उसूलने वालों को स्कूल चलाने कि इजाजत सरकार को देनी चाहिए ? ऊपर दिए गए फ़ीस का विवरण चौथी कक्षा के चार दिन पहले जारी किये गए फ़ीस बुक के प्रमाणिक आधार पर आधारित है / आज से फ़ीस देना बंद और पैसों के लालची भेडियों के खिलाफ जंग शुरू , क्या आप हैं इस जंग के लिए तैयार ? अगर हाँ तो हमसे सलाह मशवरे के लिए कभी भी फोन करें -09810752301 हमें लगता है कि देश के महामहिम राष्ट्रपति महोदया को इस बेहद गंभीर मुद्दे पड़ हस्तक्षेप कर दोषी स्कूलों के खिलाफ जरूर कार्यवाही करना चाहिए / आप भी अगर ऐसा ही सोचतें हैं तो इस ब्लॉग पड़ देश के राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए अपनी पीड़ा और उसके समाधान महामहिम को बताएं या राष्ट्रपति भवन ,न्यू दिल्ली -११०००४ के पते पड़ पत्र लिखें और दिल्ली में शिक्षा कि दुर्दशा के बारे में बताएं / आप महामहिम को अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने में इन लालची स्कूलों द्वारा फ़ीस के नाम पड़ लूटने कि पीड़ा को presidentofindia@rb.nic.in पड़ इ मेल भी कर सकते हैं / देश के महामहिम तक इस गंभीर मुद्दे को पहुँचाना हमारा नागरिक कर्तव्य है / देश के राष्ट्रपति अगर चाहें तो एक दिन में इन स्कूलों को बंद किया जा सकता है और दिल्ली सरकार जो इन लालची स्कूलों के फायदे के लिए सरकारी स्कूलों को बदहाल करके रखती है और कडोरो रुपया शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा निदेशालय पड़ खर्च करती है का भी हिसाब दिल्ली सरकार को देना होगा /

1 comment:

  1. bilkul sahi baat kahi aapne,par hindustani ke pass paisa jayda hai,jitni jyada fees,utna bada unka status,
    sab status ka khel hai bhai,

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