क्या आप समझते हैं कि जनता को सरकार को संयुक्त हस्ताक्षर अभियान के जरिए,आदेश देने का अधिकार है?

Wednesday, April 28, 2010

हर मंत्री का नार्को, ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट होना चाहिए-----?

                         
आज देश गद्दारों क़ी वजह से कराह रहा है / एक जमाना था क़ी आम जनता मंत्रियों,सांसदों,जनप्रतिनिधियों को हार्दिक सम्मान देते थे / लेकिन अगर आज किसी आम आदमी से इनके बारे में एक वाक्य बोलने को कहा जाय ,तो पता नहीं कितनी आक्रोश में क्या-क्या बोल जाय / जनता का गुस्सा जायज भी है / ये जनप्रतिनिधि और मंत्री एक मोटी तनख्वाह और भत्ता पाते तो हैं जनता के हितों और उनके दुखों के कारणों को दूर करने के लिए ,लेकिन वो करते क्या हैं,ये जग जाहिर है / देश के हालात इसकी पुष्टि भी कर रहे है /
     अब सवाल उठता है क़ी क्या हर जन प्रतिनिधि और मंत्री भ्रष्ट और गद्दार है ? जवाब है नहीं / लेकिन भ्रष्टाचारियों और गद्दारों क़ी वजह से अच्छे लोग भी बदनाम हैं,और गलत लोगों पर कोई नियंत्रण और समुचित कार्यवाही नहीं होने से भ्रष्टाचारियों और गद्दारों क़ी संख्या बढती जा रही है ,जो इस देश और समाज दोनों के लिए खतरनाक है /
कानूनी तौर पे देखा जाय तो किसी उच्च पद पे बैठा व्यक्ति और आम आदमी में कोई फर्क नहीं है ,और आज के हालात में अगर किसी आम आदमी का जमीर जिन्दा है ,तो वह देशहित के लिए उस मंत्री से ज्यादा उपयोगी है ,जिस मंत्री का जमीर मर गया है या किसी देश के गद्दारों के हाथ बिक गया है / 
ऐसे में मंत्रियों और देश क़ी कमान सँभालने वाले  उच्च अधिकारियों के जमीर क़ी गहन जाँच हर छह महीने में करना जरूरी बनाने से ही इस बात का पता लगाया जा सकता है, क़ी ये मंत्री है या अन्दर से किसी आतंकवादी से भी ज्यादा गद्दार /
                 इस बात को जरा ऐसे समझिये --मान लीजिये मैं  कृषि मंत्री हूँ ,और मेरे ऊपर लगातार आरोप लग रहें हैं क़ी मैंने अपने चमचों और रिश्तेदारों को फायदा पहुचाने के लिए 100 कड़ोर लोगों को महंगाई के मुहं में झोंक कर,उनके दो वक्त के रोटी को मुश्किल बनाकर ,उनका जीवन दुखदायी बनाने का काम किया है / 
                              अब मान लीजिये मैंने ऐसा नहीं किया है तो अगर देश हित में जनता और बिपक्ष क़ी संतुष्टि के लिए ,नार्को,ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट  कराकर ,मैं अपनी बेगुनाही का सबूत दे देता हूँ ,तो मेरा कद चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक दोनों ही रूप में ऊपर उठेगा /
अब सवाल है टेस्ट कैसे और किसके सामने हो क़ी उसकी विश्वसनीयता पर पूरा देश यकिन करे / 
टेस्ट अगर भारत के राष्ट्रपति,सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ,देश भर के सम्मानित इमानदार कम से कम 10 समाज सेवक और देश भर से चुने गए बेदाग 50 इमानदार व शिक्षित आम जनता  के सामने लाइव कराया जाय / जिसमे हर मंत्री और अधिकारियों पर लगे आरोपों से सम्बंधित प्रश्न किया जाय और उसके जवाब  पर मशीन और उपस्थित लोगों के मतों के अनुसार किसी को दोषी या बेगुनाह घोषित किया जाय / हमारे ख्याल से ऐसा करने से हमारे देश में पारदर्शिता क़ी एक मिसाल कायम होगी और उच्च पदों पर बैठे बड़े-बड़े गद्दार भी डरकर  गद्दारी करना छोड़ देंगे जिससे देश के  हालात में अचानक सुधार आना शुरू हो जायेगा /  
मैं एक नागरिक हूँ लेकिन अगर देशहित में मेरा नार्को,ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट जरूरी है तो इस ब्लॉग पर मैं घोषणा कर रहा हूँ ,क़ी देश के किसी भी 10 इमानदार समाजसेवकों के सामने मैं टेस्ट देने को तैयार हूँ /
अगर मैं देश हित में ऐसा करने को तैयार हूँ ,तो मंत्री ऐसा क्यों नहीं करेंगे ? क्या मंत्री देशहित से बड़ा है  ?  आप सभी ब्लोगरों और भारत के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मुझे जवाब क़ी आशा है /

4 comments:

  1. नार्को, ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट तो बाद मे करवाये, सब से पहले उन मंत्रियो को जुते मार क बाहर करे जिन के बारे सारी जनता को उन की ऒकात पता है

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  2. पूरी तरह सहमत… लेकिन इस टेस्ट के बाद यदि सोनिया, मनमोहन और प्रतिभा पाटिल भी दोषी पाये गये तो क्या होगा? :) फ़िर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश का भी कोई भरोसा नहीं… यानी कि जो लोग इस टेस्ट के "जज" बनेंगे, उनकी विश्वसनीयता कैसे चेक होगी?

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  3. सर किस बात का टेस्ट क्या आपको नेताओं के बारे में पता नहीं? और अगर उनका झूट भी उजागर होता है तो क्या होता है? प्ल्ज़ सर इन चीजो में अपने ब्लॉग का स्पेस न बढ़ाये. और हाँ सर ये होना चाहिए इस पर सर खुजाने से बढ़िया है हम देखे वो हो रहा है जिस के लिए कानून बना है क्या हत्या , बलत्कार ,कन्या भूर्ण हत्या और न जाने क्या क्या जिनके कानून है सब खतम हो गया है. प्लीज़ सर आज एक बहुत कढ़ी बात बताऊँ जो कुछ भी हो रहा है उसके जिमेदार सिर्फ हम है .........

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  4. महोदय,नार्को टेस्ट में इंसान को बहुत पीड़ादायक परिस्थिति से गुजरना पड़ता है.
    अतः ये नार्को टेस्ट वाली सलाह जरा अप्रासंगिक लगती है,किन्तु आपके विचार सराहना योग्य हैं.
    हर आदमी का महत्व बराबर का होना चाहिए,सही और गलत का एक निश्चित नियामक भी मौजूद होना चाहिए.
    पार्क इत्यादि बनवाने से पहले हर इंसान के सर पे छत मिल जानी चाहिए.
    डीजल पे सब्सिडी सिर्फ किसानो को मिलनी चाहिए...और हो सके तो सब्सिडी सिर्फ खाने की चीजो पे ही होनी चाहिए,चावल डाल आदि,

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