क्या आप समझते हैं कि जनता को सरकार को संयुक्त हस्ताक्षर अभियान के जरिए,आदेश देने का अधिकार है?

Monday, November 22, 2010

ऐसे लोगों को आज विधायक नहीं बल्कि देश का प्रधानमंत्री होना चाहिए ......









चित्र में बाएं से मैं (जय कुमार झा) तथा श्री सुखराम कोली जी (विधायक,बसेरी विधानसभा क्षेत्र ,धौलपुर,राजस्थान  ) 

मैं ओनेस्टी प्रोजेक्ट के लक्ष्य (ह़र इमानदार व्यक्ति चाहे वो विधायक हो,IAS हो,IPS हो,सामाजिक कार्यकर्त्ता हो या आम नागरिक हो सभी लोग एक मंच पर एकजुट होकर भ्रष्टाचार के खिलाप तथा सत्य,न्याय,ईमानदारी की सुरक्षा और सहायता के लिए मिलकर पूरे देश में काम करें तथा एक दूसरे को अच्छाई की राह पर चलने में हार्दिक सहयोग प्रदान करें ) के तहत धौलपुर 20 /11 /2010 को पहुंचा जहाँ मेरी मुलाकात बसेडी के विधायक श्री सुखराम कोली से हुयी,श्री कोली युवा दलित विधायक होने के साथ-साथ ईमानदारी से अपने क्षेत्र को विकसित करने का प्रयास कर रहें हैं तथा भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाप भी मुहीम चला रहें हैं | आज जहाँ समूचा देश भ्रष्ट मंत्रियों और जन प्रतिनिधियों के कुकर्मों से शर्मसार हो रहा है वहां किसी विधायक द्वारा रिश्वतखोर अधिकारियों से कोई समझोता नहीं करना तथा भ्रष्टाचार के खिलाप लड़ाई लड़ना निश्चय ही एक आशा की किरण के सामान है | उन्होंने मेरे सामने कुछ रिश्वत खोरों के खिलाप कार्यवाही के लिए ना सिर्फ सार्थक प्रयास किये बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री को सख्त कार्यवाही के लिए पत्र भी लिखे....

http://www.youtube.com/watch?v=LIJ6K776wIE
इस विडियो में आप श्री कोली को देख और सुन सकतें हैं....


श्री कोली ने कहा की आगरा से ताज की सुरक्षा के चलते कई उद्योगों को दूसरे जगह स्थानांतरित किये जाने की प्रक्रिया चल रही है ,अतः भारत सरकार और राजस्थान सरकार आगरा से स्थानांतरित उद्योगों को अगर उनके क्षेत्र या धौलपुर जिले में स्थापित करे तो इस क्षेत्र के लोगों को समुचित रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे | अभी धोलपुर का मुख्य उद्योग पत्थर उद्योग ही है |


श्री कोली ने मुझसे बातचीत में देश के उद्योगपतियों को धौलपुर में उद्योग स्थापित करने के लिए आगे आने का आग्रह किया साथ ही उनको इसमें हर संभव सरकारी सहायता मुहैया कराने में मदद का भी भरोसा दिया | उन्होंने छोटे उद्योगपतियों को भी धोलपुर में उद्योग लगाने का आग्रह किया | उन्होंने भारत सरकार और राजस्थान सरकार से भी इस दिशा में प्रयास करने का आग्रह किया | जब मैंने उनसे गांवों में इन्टरनेट से सुसज्जित जनसमस्या निवारण प्रयास केंद्र के स्थापना के बारे में उनके विचार जानने का प्रयास किया तो उन्होंने अपने विधान सभा क्षेत्र के सभी गांवों में ऐसा केंद्र खोलने पर जोर देते हुए कहा की मैं इसके लिए राज्य के इनफोर्मेसन टेक्नोलोजी मंत्रालय को पत्र लिखकर इसके लिए फंड मुहैया कराने का आग्रह करूंगा ...सचमुच यह अच्छा रहेगा प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में | 


श्री कोली के ईमानदारी के बारे में पहले भी काफी कुछ लिखा जा चुका है जिसे आप इन लिंक्स पर जाकर पढ़ सकते हैं ....
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/07/100713_rajasthan_mla_teacher_adas.shtml
http://gantantradusrupaiyaekdin.blogspot.com/2010_07_01_archive.html

मैंने अपने मुलाकात में जो सबसे बड़ी बात महसूस की श्री कोली में वह थी उनकी शालीनता तथा ईमानदारी के लिए जज्बा ,संयोग से 21/11/10 को ही श्री राहुल प्रकाश जी (IPS ) धौलपुर के पुलिस अधीक्षक का पद भर संभाल रहे थे इसलिए उनसे भी सुबह-सुबह मुलाकात हो गयी ,उनसे भी मैंने व्यक्तिगत तौर पर ऐसे इमानदार विधायकों और सच्चे नागरिकों का हरहाल में साथ देने का आग्रह किया | श्री राहुल प्रकाश जी ने भी तहे दिल से ईमानदारी तथा इंसानियत के लिए किये जा रहे हर प्रयास को सहायता और सुरक्षा देने का वादा किया | 


ऐसे विधायक को पूरा देश नमन करता है और सही मायने में ऐसे लोगों की वजह से ये गणतंत्र पूरी तरह ख़त्म होने से बचा हुआ है ......अगर हो सके तो विधायक के सम्मान में एक पत्र धौलपुर के जिला प्रशासन तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री को भी लिखें तथा अपने ब्लॉग पर ना सिर्फ श्री सुखराम कोली बल्कि देश के कोने-कोने से ढूंढकर ऐसे विधायकों के कार्यों और विचारों को सम्मानित करने का प्रयास करें ....असल में ऐसे विधायकों को आज हमारे देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पदों तक पहुंचना बहुत जरूरी है .....

Thursday, October 14, 2010

वर्धा संगोष्ठी और कुछ अभूतपूर्व अनुभव व मुलाकातें ....

मैं 7 अक्तूबर को 2626 डाउन केरला एक्सप्रेस से नयी दिल्ली से वर्धा के लिए रवाना हुआ था | इस ट्रेन के सेवाग्राम पहुँचने का नीयत समय 8 अक्तूबर को सुबह 05:03 मिनट था  | लेकिन मुझे सुबह 04:56 मिनट पर मेहमानों को विश्विद्यालय तक लाने क़ी जिम्मेवारी सँभालने वाले छात्र श्री धनेश जोशी के फोन ने यह आभास दिलाया क़ी मेरी ट्रेन लेट है | इसके बाद श्री सिद्धार्थ   शंकर त्रिपाठी जी का 05:14 मिनट पर फोन आया और मुझसे पूछा गया क़ी आप कहाँ पहुँच गयें हैं | इन दो फोन कालों से मुझे यह आभास हो गया क़ी मेहमानों क़ी अगवानी हार्दिक रूप से क़ी जा रही थी | खैर मैं लगभग एक घंटा लेट सुबह 06:15 बजे सेवाग्राम पहुंचा जहाँ मेरा इंतजार एक समर्पित छात्र श्री धनेश जोशी कर रहें थें और उन्होंने मुझे सम्माननीय तरीके से विश्वविध्यालय के प्रांगन के कमरा नंबर 24 में पहुँचाया | वर्धा आना मेरे लिए कुछ अभूतपूर्व यादों और मुलाकातों भरा रहा जिसका उल्लेख मैं जरूर करना चाहूँगा ...इनमे सबसे पहले मैं सेवाग्राम आश्रम तथा विनोबा निवास क़ी यात्रा का वर्णन करना चाहूँगा ...
10 अक्टूबर को आयोजकों ने हमलोगों के लिए सेवा ग्राम आश्रम भ्रमण 
की व्यवस्था की थी इसलिए हमलोग सुबह सात बजे सेवाग्राम के लिए 
रवाना हो गये वहां पहुँचने पर बस से उतरने के बाद सेवाश्रम के मुख्य
द्वार के पास लिया गया समूह फोटो ...
1-सेवाग्राम आश्रम - यह आश्रम पूरी तरह मिट्टी से जुड़ा हुआ लगा जहाँ आज देश को कंक्रीट के जंगल में तब्दील करने की भयानक साजिश रची जा रही है लोभी और स्वार्थी राजनीतिज्ञों तथा उद्योग पतियों द्वारा वही इस आश्रम में मिट्टी से जुरे सामग्री के प्रयोग से ही इस आश्रम की देखभाल और निर्माण कार्य किया जाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है | सबसे चौकाने वाली जानकारी ये है क़ी इस आश्रम को किसी सरकारी सहायता  से नहीं बल्कि स्वाबलंबन के सिद्धांत के आधार पर  100 एकड़ ज़मीन में खेती से पैदा हुये उत्पाद के बिक्री , गौशाला में दुग्ध उत्पादन तथा खादी ग्रामोद्योग के उत्पाद के बिक्री के आय से संचालित तथा पोषित किया जा रहा है | इस आश्रम के संचालक श्री एम.एम.गडकरी जी से बातचीत से पता चला क़ी यह आश्रम पूरी तरह स्वाबलंबन ,सादगी तथा सेवा जो गांधी जी के सिद्धान्त है के आधार पर चलाया जा रहा है और सरकारी संचालन व्यवस्था के अवगुणों से पूरी तरह अछूता है |

2-महान परोपकारी और त्यागी आत्मा विनोबा भावे निवास आश्रम -
महान त्यागमूर्ति विनोबा भावे आश्रम में रह रही आजीवन ब्रह्मचर्य का 
पालन करने वाली कुरता और घाघरा पहने बहन शांति कृपलानी जी 
जिनकी उम्र 72 साल है और वो इस विनोबा निवास में 53 वर्षों से रह
रही है साथ में सारी में खरी है बहन निर्मला जी जिनकी उम्र 62 वर्ष है 
और वो 42 वर्षों से इस आश्रम में रह रही है ... इनसे बात कर महसूस 
हुआ क़ी वास्तव में यह त्याग और ब्रह्मचर्य का देश में पहला निवास 
स्थल है ....
विनोवा निवास जहाँ बिना व्यवस्थापक के उत्तम व्यवस्था का संचालन 
होता है साफ-सफाई क़ी इतनी उत्तम व्यवस्था है क़ी पूरे देश क़ी सरकार 
को इस विनोबा निवास के व्यवस्था से प्रेरणा लेनी चाहिए ...
महान त्याग मूर्ति विनोबा निवास से होकर बहती पवनार नदी के पानी 
क़ी बहती धारा जो मानो इस महान त्याग के मूर्ति विनोबा जी का ह़र 
वक्त चरण पखारती हुयी लोगों को त्याग और परोपकार के मार्ग को 
अपनाने को प्रेरित कर रही हो ...

इस विनोबा निवास में मेरी मुलाकात श्री गौतम बजाज से हुयी जो मशहूर उद्योगपति श्री राहुल बजाज के परिवार के ही सदस्य हैं | जब मैंने उनसे पूछा क़ी क्या आप यहाँ के संचालक हैं ..? इस पर उनका जवाब था क़ी यहाँ कोई संचालक या व्यवस्थापक नहीं है | यहाँ क़ी सारी व्यवस्था सर्वसम्मति तथा सभी के विचारों और सुझाओं के आधार पर लिए गए फैसलों से चलायी जाती है | इस पर मैंने उनसे सवाल किया क़ी क्या कभी विवाद उत्पन्न नहीं होता ..? तो उनका जवाब था क़ी निःस्वार्थ तथा त्याग पर आधारित सोच वाले लोगों के बीच विवाद क़ी संभावनायें कम होती है | इतने में श्री गौतम बजाज कुछ ब्लोगरों द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में जूते-चप्पल  ले जाने क़ी वजह से उनकी ओर चल दिये और जूते-चप्पल  को खुद अपने हाथ से उठाकर नीयत जगह रखकर ब्लोगरों को निर्देश दे गए क़ी वहाँ जूते-चप्पल ना ले जायें ...उनकी यह सादगी और शालीनता देख मेरा मन कृतज्ञता से भर गया और बिनोबा जी के साथ-साथ उनके अनुयायियों के लिए भी मन में अंकित सम्मान और प्रबल हो गया ... | इस देश क़ी सरकार खासकर मनमोहन सिंह जी,राहुल गांधी तथा सोनिया गांधी जी को इस निवास में जाकर कुछ दिन रहना चाहिए और व्यवस्था को जनतांत्रिक तरीके से कैसे चलाया जाता है इसकी पाठ जरूर पढनी चाहिए ....
महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविध्यालय के कुलपति 
श्री बिभूति नारायण रॉय ने ब्लोगरों को खुद अपने हाथ से 
प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया ...ब्लोगिंग के इतिहास 
में यह सदा याद किया जायेगा ...
3- तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही क़ी ब्लोगरों को पहली बार ब्लोगिंग पर व्याख्यान या आलेख प्रस्तुत करने पर किसी केन्द्रीय विश्वविध्यालय के कुलपति के हाथ से प्रमाण-पत्र भी दिया गया | ब्लोगिंग के इतिहास में यह घटना सम्मान के साथ सदा याद किया जाता रहेगा |  

Tuesday, October 12, 2010

वर्धा ब्लोगर संगोष्ठी के पर्दे के पीछे के असल हीरो ...

महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय विश्वविध्यालय वर्धा द्वारा आयोजित ब्लोगर कार्यशाला और संगोष्ठी कई मामलों में अभूतपूर्व अनुभवों से भरा रहा....जिसकी चर्चा मैं अगले पोस्ट में  करूंगा... 



आज मैं सबसे पहले इस संगोष्ठी के आयोजन को सफल बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले ऐसे लोगों का हार्दिक धन्यवाद करना चाहूँगा जिनका परदे के पीछे के महत्वपूर्ण योगदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए | ऐसे ही कुछ नाम इस प्रकार हैं...



1-डॉ.अनिल के.रॉय (प्रोफ़ेसर और अध्यक्ष जनसंचार विभाग ,महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा) इनका व्यक्तिगत व इनके विभाग का महत्वपूर्ण और सराहनीय योगदान रहा इस आयोजन को सफल बनाने में | इन्होने तथा श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी ने मेरे आग्रह पर 11 अक्तूबर को दोपहर एक से दो बजे के बीच  नए ब्लोगर बने छात्रों तथा जनसंचार के छात्रों का एक विशेष कक्षा क़ी भी व्यवस्था करवाया जिसमे मैं इन छात्रों को ब्लोगिंग को सामाजिक सरोकार से जोड़कर सामाजिक जाँच करने तथा उसमे पाये गए सच्चे तथा जन-उपयोगी  तथ्यों को ब्लॉग के जरिये देश विदेश तक पहुँचाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर सका |



2-श्री धनेश जोशी तथा श्री विवेक विश्वास - इन दोनों ने ब्लोगरों को विभिन्न स्थलों जैसे रेलवे स्टेशन,बस अड्डा इत्यादि जगहों से सम्मान पूर्वक वर्धा विश्वविद्यालय तक लाने क़ी जिम्मेवारी पूरे अपनापन और दिन रात क़ी परवाह किये वगैर बखूबी निभाया | हम इन दोनों छात्रों के समर्पित सेवा भाव के लिए इनका हार्दिक धन्यवाद करते हैं...इनका सेवा भाव अनुकरणीय है ...


3-श्री अमित विश्वास तथा श्री बी.एस मिरगे - इन दोनों सज्जनों ने इस आयोजन का मीडिया संचालन इतनी बखूबी किया क़ी इस आयोजन क़ी चर्चा देश के कई बड़े अखवारों क़ी सुर्खियाँ बनी जिससे हिंदी ब्लोगिंग के प्रचार और प्रसार में सराहनीय प्रगति हुयी .. 


4-श्री संदीप वर्मा - इनके उल्लेखनीय योगदान से पूरे आयोजन क़ी सटीक फोटोग्राफी हो पाई संभवतः इसकी CD सभी अतिथियों को भी विश्वविद्यालय भेजेगा ...


5-श्री गिरीश पांडे ,सुश्री अंजलि रॉय,श्री समसाद,श्री गुंजन तथा सुश्री हेमा गोडबोले- इन लोगों ने श्री रवि रतलामी जी के लाइव प्रसारण की व्यवस्था के सफलता पूर्वक संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ...हम इनके हार्दिक आभारी हैं...


6-श्री राजीव पाठक- इन्होने मेहमानों के अतिथि गृह की समूची व्यवस्था को उम्दा बनाने की व्यवस्था का संचालन करने के साथ-साथ मेहमानों को सम्मानपूर्वक गंतव्य तक वापिस जाने के साधन तक पहुँचाने की भी समुचित व्यवस्था का संचालन किया ...इनका व्यवहार सराहनीय   रहा और हम इनके आभारी हैं ...


7-श्री संजय तिवारी,श्री विवेक त्रिपाठी,श्री उमाकांत शुक्ला,श्री आलोक श्रीवास्तव तथा श्री संदीप - इन सबने ब्लोगरों को उनके आने-जाने के किराये तथा अन्य मानदेयों के भुगतान क़ी पूरी व्यवस्था का इतनी बखूबी से संचालन किया क़ी ब्लोगरों को उनके अतिथि गृह के अपने कमरे में ही सभी भुगतान किये गए तथा जरूरी हस्ताक्षर क़ी प्रक्रिया को भी सम्माननीय तथा पारदर्शिता के साथ किया गया | इन लोगों क़ी कार्यप्रणाली बेहद शालीनता तथा ईमानदारी भरी रही ...

इसके अलावे कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने हमेशा अतिथियों का ख्याल रखा और उनको एक अपनापन देने का प्रयास किया जैसे महान कवि श्री आलोक धन्वा जी ,श्री कृष्ण कुमार सिंह जी ,श्री राज किशोर जी ,इत्यादि हम उन सभी का भी हार्दिक धन्यवाद और आभार व्यक्त करतें हैं जिनका नाम मैं नहीं जानने क़ी वजह से यहाँ नहीं लिख पा रहा हूँ लेकिन उनका योगदान और अपनापन महत्वपूर्ण  था इस आयोजन के सफल संचालन में ...हम उन छात्रों का भी हार्दिक धन्यवाद करते हैं जिन्होंने ब्लोगिंग को जनसंचार का माध्यम बनाकर सामाजिक सरोकार के आवाज को बुलंद करने के लिए ब्लोगिंग में अपना पहला कदम बढाया....




अगर किसी नाम को लिखने में कोई कमी रह गयी हो तो तो क्षमा चाहूँगा ...


Sunday, October 10, 2010

ब्लोगिंग का उपयोग सामाजिक सरोकार तथा मानवीय मूल्यों को सार्थकता क़ी ओर ले जाने केलिए किये जाने क़ी संभावनाएं बढ़ गयी है ........

विश्वविध्यालय के कुलपति महोदय (श्री रॉय) ब्लोगर संगोष्ठी को संबोधित करते हुये तथा संपरीक्षा अधिकारी श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी उनके बगल में खरे हुये  ...
संगोष्ठी कक्ष में पहुंचते अतिथि ब्लोगर और ब्लोगिंग सीखने क़ी चाह रखने वाले छात्र...

महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविध्यालय वर्धा  के प्रयास तथा इस विश्वविध्यालय के कुलपति श्री विभूति नारायण रॉय तथा संपरीक्षा अधिकारी श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी के ब्लोगिंग के प्रति सकारात्मक सम्मान तथा गहरी अभिरूचि से आयोजित इस राष्ट्रिय ब्लोगर संगोष्ठी  के बाद ब्लोगिंग क़ी सामाजिक सरोकार से जुड़ने तथा मानवीय मूल्यों के उत्थान के लिए प्रयोग करने क़ी संभावनाएं प्रबल हो गयी है |



ये विश्व का पहला हिंदी विश्वविध्यालय है जो ब्लोगिंग के उत्थान के लिए दूसरी बार राष्ट्रिय स्तर के ब्लोगर संगोष्टी का आयोजन करने के साथ-साथ नए ब्लोगरों को देश और समाज के समक्ष उत्पन्न गंभीर चुनौतियों को हल करने में ब्लोगिंग का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने का भी काम कर रहा है | निश्चय ही हिंदी ब्लोगिंग के उत्थान तथा प्रचार प्रसार क़ी दिशा में यह एक शुभ संकेत है | ऐसे आयोजन देश के ह़र क्षेत्र के विश्वविध्यालयों को करना चाहिए जिससे ब्लोगिंग जनतंत्र क़ी आवाज के रूप में स्थापित हो सके |

आज दो दिन के संगोष्ठी का पहला दिन था जिसमे ब्लोगिंग के आचार संहिता पर कुलपति महोदय समेत कई ब्लोगर तथा अन्य विद्वानों ने अपनी राय रखी | जिसके आधार पर मैं यह कह सकता हूँ क़ी आचार संहिता सिर्फ आत्म नियंत्रण तथा ब्लोगर द्वारा स्वयं के कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने से ही लागू हो सकता है | वैसे ब्लोगिंग का जनहित तथा जनकल्याण के दिशा में प्रयोग करने से भी ब्लोगिंग को एक नयी दिशा मिल सकती है जिससे हो सकता है क़ी आचार संहिता का स्वतः ही निर्माण होने लगे ...? कुल मिलाकर इस संगोष्ठी का पहला दिन सार्थक बहस के साथ ख़त्म हुआ | मेरी हार्दिक इक्षा है क़ी अगले साल यह विश्वविध्यालय ज्यादा से ज्यादा ब्लोगरों को अपनी संगोष्ठी में आमंत्रित करे जिससे इसका प्रभाव व विस्तार और भी व्यापक हो सके ...



Wednesday, October 6, 2010

अच्छे,सच्चे,इमानदार और देशभक्त लोग एकजुट हो जायें या इस देश में जुल्म सहने को तैयार रहें....आपकी रक्षा करनेवाला इस देश में कोई नहीं सिवाय आपकी एकजुटता के....

आज लोकतंत्र को सिर्फ देश भर के सच्चे,अच्छे,इमानदार और देशभक्त लोगों के एकजुटता के ताकत से तैयार किये गए परस्पर सुरक्षा व सहायता तंत्र के निर्माण से ही बचाया जा सकता है |

आज इस देश और समाज क़ी हालत ऐसी हो चुकी है क़ी कानून और व्यवस्था नैतिक पतन हो चुके लोगों के हाथो में एक वेश्या क़ी तरह है | जब चाहे भ्रष्ट लोग कानून और व्यवस्था का बलात्कार कर चलते बनते हैं और किसी को भी सजा नहीं होती है | सजा अगर किसी को होती है तो वो है एक इमानदार समाज सेवक जो कानून क़ी इज्जत और सम्मान के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा देता है ,एक इमानदार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जो अपनी जान क़ी परवाह किये वगैर कानून और व्यवस्था क़ी रक्षा करने का प्रयास करता है | ऐसे कई वाकये प्रतिदिन इस देश में होते हैं जब सत्य और ईमानदारी को खुले आम जूते तले रौंदा जाता है और इस देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण व सम्माननीय पदों पर बैठा व्यक्ति भी सत्य और ईमानदारी क़ी रक्षा में व्यक्तिगत रूचि नहीं दिखा पा रहा है | मेरी समझ में नहीं आता क़ी इन पदों क़ी गरिमा को ये लोग अपने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही दिखाकर अपमानित क्यों कर रहें हैं ..? कोई भी बुद्धिजीवी यही कहेगा क़ी इन पदों पर बैठे व्यक्ति क़ी पहली प्राथमिकता सत्य,न्याय और ईमानदारी क़ी रक्षा करना होना चाहिए ...लेकिन ऐसा होता इन दोनों पदों पर बैठे व्यक्तियों क़ी ओर से दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है और ना ही देश यह महसूस कर रहा है क़ी इन पदों पर बैठे व्यक्ति आज सत्य,न्याय और ईमानदारी क़ी ह़र हाल में रक्षा के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहें हैं ...

इस तरह क़ी स्थिति के लिए दोषी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का पद नहीं बल्कि इन पदों पर बैठा व्यक्ति है ....? आज इन पदों पर बैठे व्यक्ति अपने अधिकारों का सदुपयोग देशहित और समाज क़ी भलाई के लिए कम बल्कि अपने निहित स्वार्थों और अपने चहेतों के स्वार्थों क़ी पूर्ति के लिए दुरूपयोग के रूप में ज्यादा कर रहें हैं | यही वजह है क़ी देश में 90प्रतिशत सांसद चाहे वो राज्यसभा के हों या लोकसभा के भ्रष्ट,चोर,बेईमान,चरित्रहीन तथा देश के गद्दार हैं | अगर इन सब क़ी ब्रेनमेपिंग तथा लाईडिटेक्टर  टेस्ट कराया जाय तो ये 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हो सकता है | 


इन भ्रष्ट मंत्रियों और जन प्रतिनिधियों क़ी वजह से देश में ज्यादातर उद्योगपति भी भ्रष्ट,चरित्रहीन,चोर,बेईमान तथा गद्दार होते जा रहें हैं | इन जनप्रतिनिधियों के द्वारा इनको नकली समान बनाने,श्रम कानून को तोड़ने,टेक्स क़ी चोरी करने इत्यादि के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ संरक्षित  भी किया जा रहा है और बदले में उनसे अडबों रूपये क़ी रिश्वत पार्टी या व्यक्तिगत रूप में लिया जा रहा है | पूरी क़ी पूरी व्यवस्था चोरी,भ्रष्टाचार,ठगी,अनैतिक आचरण पर आधारित होती जा रही है | सरकारी खजाने का उपयोग जनहित के वजाय इन भ्रष्ट मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के व्यक्तिगत हितों पे खर्च किया जा रहा है ,नीतियाँ ऐसी बनायीं जा रही है क़ी आम लोग भूखे मरें और भ्रष्ट तथा सत्ता के दलाल जो पूरे देश में 10 प्रतिशत हैं मालामाल हों ,देश और समाज क़ी हालत खस्ताहाल होती जा रही है लेकिन देश विकाश कर रहा है ...?
ह़र व्यक्ति चोरी और ठगी कर अपना जीवन बचाने को मजबूर है लेकिन देश का विकाश हो रहा है ....?
देश में नैतिक चरित्र नाम क़ी कोई चीज बची ही नहीं है लेकिन देश विकाश कर रहा है....?
शासन और प्रशासन में अनुशासन हीनता का बोलबाला है लेकिन देश विकाश कर रहा है ...?
सरकार सामाजिक सरोकार और जनहित को भूलकर व्यवसायी और दलाल बन चुकी है लेकिन देश विकाश कर रहा है ....? 



इन सब बातों के खिलाप कोई आवाज उठाता है तो चाहे वह समाज सेवक हो या पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी ,उसे ह़र तरह से परेशान और प्रतारित किया जाता है और पूरी क़ी पूरी व्यवस्था अंधी ,बहरी और गूंगी होकर देखती रह जाती है | अभी हाल क़ी घटना एक समाज सेवी ब्लोगर श्री राम बंसल के साथ घटी है जिसके सत्य और ईमानदारी भरे सामाजिक कार्यों के बदले उसे धार्मिक उन्माद फ़ैलाने वाला घोषित कर दिया गया है ,पढ़ें इस ब्लॉग पर -http://khandoi.blogspot.com/  
श्री राम बंसल जो पूरी ईमानदारी से देश और समाज क़ी सेवा में लगे है तथा अपने गांव में असामाजिक तत्वों के खिलाप अभियान चलाये हुयें है | लेकिन पुलिस ऐसे सच्चे और इमानदार लोगों को ही परेशान कर रही है | पूरे देश के लोगों को राम बंसल जी जैसे लोगों क़ी सुरक्षा और सहायता में आगे आना चाहिए तथा देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को ऐसे मामलों को व्यक्तिगत रूप से देखना चाहिए तथा दोषी पुलिस वालों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए ...
अब सवाल उठता है क़ी राम बंसल जैसे लोग क्यों चले सत्य और ईमानदारी के राह पर ...?
इनकी रक्षा कौन करेगा ,इस देश का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ...?
इनके ऊपर झूठा और बेबुनियाद आरोप पत्र तैयार करने वाले पुलिस वालों के खिलाप सख्त कार्यवाही कर उनको नौकरी से निकालकर उनकी पेंशन और सभी सुविधाओं को कौन रोकेगा ...?
ऐसा हो सकता है अगर पूरे देश के अच्छे,सच्चे,इमानदार और देशभक्त लोग एकजुट होकर एक दूसरे के सुरक्षा व सहायता में अपने आप को लगा दें | अगर हमलोग अब भी एकजुट नहीं होतें हैं तो वो दिन दूर नहीं जब इस देश से सच्चाई,अच्छाई,ईमानदारी और देशभक्ति का नाम मिट जायेगा....तथा सच्चे,अच्छे,इमानदार व देशभक्त लोगों पर ह़र तरफ अंग्रेजों से भी ज्यादा जुल्म ढाया जायेगा...?

Thursday, September 16, 2010

सरकार में बैठे पूंजीपतियों के दलाल बेहद भ्रष्ट मंत्रियों के वजह से सर्वोच्च न्यायालय के जजों पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगता है ....शर्मनाक है ये कांग्रेस क़ी सरकार ...जिसने देश को नरक बना कर रख दिया है ....



पूर्व कानून मंत्री श्री शांति भूषन जी ने आरोप लगाया है क़ी सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व सोलह मुख्य न्यायाधीश में से आठ न्यायाधीश भ्रष्ट है ,उन्होंने छह को पूरी तरह इमानदार बताया जबकि दो के बारे में कोई टिप्पणी नहीं क़ी | यहाँ यह भी जग जाहिर है क़ी श्री शांति भूषन जी के पुत्र श्री प्रशांत भूषन जो क़ी एक इमानदार वकील हैं ,उनपर कोर्ट को भ्रष्ट कहने का मामला चल रहा है |



शांति भूषन जी ने जिन सोलह पूर्व जजों का नाम लिया है उनके नाम हैं --- 

1जस्टिस रंगनाथ  मिश्र 
2जस्टिस एम.एच .कैना  
3जस्टिस के.एन.सिंह  
4 जस्टिस एल.एम.शर्मा 
5 जस्टिस  एम .एन . वेंकटचेलैया
6 जस्टिस ए.एम. अहमदी   
7जस्टिस जे.एस.वर्मा 
8जस्टिस एम.एम.पूंछी 
9जस्टिस ऐ.एस . आनंद 
10 जस्टिस एस.पी.भरुचा  
11जस्टिस बी.एन.किरपाल  
12जस्टिस जी .बी.पाठक 
13जस्टिस राजेंद्र  बाबु 
14जस्टिस आर .सी .लाहोटी 
15 जस्टिस वी .एन .खरे   
16जस्टिस वाय.के .सभरवाल  

आठ भ्रष्ट जजों के नाम उन्होंने सील बंद लिफाफे में कोर्ट को सौपा .....

अब सवाल उठता है की ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेवार कौन है ..? हमारे ख्याल से भ्रष्ट सरकार भ्रष्ट न्यायपालिका का कारण बनती है | इमानदार जज भी जब कानून की व्याख्या इंसानियत और न्यायसंगत आधार पर करे और उसे प्रधानमंत्री की ये नसीहत सुनने को मिले की सरकार के नीतिगत मामलों में दखल ना दे सर्वोच्च न्यायालय ... तब ऐसे हालात में कोई जज क्या करेगा जब खुद सरकार भी उसकी न्याय को मानने से मना कर दे | ऐसे में सरकार का निकम्मापन तो झलकता ही है साथ-साथ देश में न्यायिक संवेदनहीनता भी दिखती है |


अब वक्त आ गया है जब इमानदार न्यायिक अधिकारियों और जजों को भ्रष्ट मंत्रियों और पूंजीपतियों के दवाब में आये बिना सरकार के हर गलत कार्यों की ईमानदारी से आलोचना कर उसे सुधारने का आदेश भी दे तथा ज्यादा से ज्यादा PIL की सुनवाई कर भ्रष्ट जजों को भी कठोर सजा दे | इसके साथ ही जजों को अपनी हर संपत्ति की जानकारी जनता के लिए हमेशा सुलभ बनाने के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच जाकर उनके विचार और सुझाव भी न्याय के बारे में जाने और उनको न्याय मिलने में आने वाली असल दिक्कतों को जानकर उसे दूर करने का प्रयास करें जिससे इस देश के आम नागरिकों के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान बना रहे | इसके साथ की भ्रष्ट मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सख्ती और गंभीरता से जाँच कर दोषियों को सख्त सजा दे | फ़िलहाल जिन जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगतें है उसकी भी गंभीरता से जाँच हों सजा भी गंभीरता से तय हो बिना बिलम्ब के |

आप सब ब्लोगरों से भी आग्रह है की आप लोग भी अपनी राय इस दर्दनाक अवस्था पे व्यक्त करें ...

Tuesday, September 14, 2010

राम जन्म भूमि विवाद ---न्याय व्यवस्था में फैले अराजकता और सरकार में बैठे लोगों के शर्मनाक स्वार्थ की कहानी !!!!!!!!!!!!!!

जब तक नोटों की माला नेता पहनते और उससे खुश होते रहेंगे इस देश में न्याय और सत्य का गला दबाया जाता रहेगा | राम और अल्लाह का झूठा राग अलापकर निर्दोष लोगों के खून पे अपने स्वार्थ की रोटी सेंकी जाती रहेगी ( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
पूरा देश भ्रष्ट नेताओं के शर्मनाक लूट खसोट और देश में निगरानी और कार्यवाही की व्यवस्था के पूरी तरहसड़ जाने से कराह रहा है ,इंसानियत ख़त्म होने की कगार पे है ऐसे में रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद से ज्यादा मत्वपूर्ण इंसानियत को बचाना है और इन भ्रष्ट नेताओं को ख़त्म करना है | देश के लोगों को इसके लिए एकजुट होकर निडरता से काम करने की जरूरत है |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
ये दृश्य इस देश में न्याय व्यवस्था में फैले अराजकता और सरकार में बैठे लोगों के शर्मनाक स्वार्थ की कहानी के अलावे कुछ भी नहीं | इस देश के ज्यादातर नेता भ्रष्ट और शर्मनाक स्तर के स्वार्थी हो गये हैं जिनको देश और समाज के हितों की कोई चिंता नहीं है |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)
जब तक राजनेता चोला बदलकर लोगों के हमदर्द होने का झूठा दिखावा करेंगे और इस देश के लोगों की सच्ची सेवा के बदले उनको बेबकूफ बनाकर अपनी कुर्सी और सत्ता को प्राथमिकता देंगे ,इस देश में राम जन्म भूमि विवाद जैसे मामले हर गांव और हर दिल में देखने को मिलते रहेंगे |( चित्र गूगल से साभार प्रकाशित)


राम जन्म भूमि विवाद का 18 वर्षों तक फैसला नहीं आना,6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद कुछ लोगों द्वारा सरकार में बैठे कल्याण सिंह के गैर जिम्मेवाराना तथा बीजेपी तथा कांग्रेस के अपने-अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए न्याय और सामाजिक दायित्व का गला घोटने का वैसा ही परिणाम था जैसा आज देश के हर कोने में राजनितिक और भूमाफियाओं द्वारा किया जा रहा है और पूरी न्याय व्यवस्था और पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बनी देख रही है | दरअसल राम जन्म भूमि विवाद स्वार्थ के खेल का ही एक धार्मिक रूप है जिसका समाधान कोई निःस्वार्थी देश भक्त नेता या बेहद इमानदार इंसानी सोच रखने वाला जज ही कर सकता है | ये मामला दीवानी से ज्यादा इंसानियत पे स्वार्थ और गन्दी राजनीती के शर्मनाक दवाब का मामला है | ये मामला उतना बड़ा या पेचीदा नहीं है जिनता इस देश के भ्रष्ट और स्वार्थी नेताओं ने इसे बना दिया है अपने स्वार्थ के नीचे सत्य और न्याय को कुचलकर | 



आज इस देश के लोगों को चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान सबको इस भूमि विवाद का हल अगर ईमानदारी से चाहिए तो स्वार्थी और लोभी राजनितिक पार्टियों तथा राम और धर्मनिरपेक्षता का चोला पहनने वाले राजनेताओं को इस देश से पूरी तरह ख़त्म करना होगा साथ ही समाज में बैठे इनके स्वार्थी एजेंटों को जूतों से पीटना होगा | ये ना तो राम के,ना ही अल्लाह के और ना ही इस देश और समाज के ये अपनी मां को भी कोठे पर बेच सकते हैं अपने स्वार्थ के लिए ,इसलिए अरे देशवाशियों इनको पहचानों ....

Thursday, September 9, 2010

नीतिगत मामलों में सर्वोच्च न्यायालय व्याख्या ना करें क्योंकि ये अधिकार सोनिया गाँधी को है ....?

एक ऐसी महिला जिसके हाथ में इस देश की पूरी कमान है और पूरी व्यवस्था इसके क़दमों में है इस महिला के प्रभाव से पिछले पाँच सालों में इस देश में इंसानियत पूंजीपतियों का गुलाम बन चुकी है | ये देश एक मरता हुआ लोकतंत्र बन गया है |  सारा खेल ये खेलती है लेकिन इसका कहीं जिक्र भी नहीं होता ,जाँच करे तो कौन...?


सड़ते अनाज के मुद्दे पर अनाज को सड़ाने से अच्छा गरीबों में बाँट देने का आदेश सर्वोच्च न्यायालय के इमानदार जज ने क्या दे दिया मानो आफत आ गयी | इस आदेश के आते ही भ्रष्टाचार क़ी बैसाखी के सहारे प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे और जमे हुये हमारे मनमोहन सिंह जी ने तुरंत सर्वोच्च न्यायालय को नीतिगत मामलों से दूर रहने का बेशर्मी भरा फरमान जारी कर दिया | अगर इस बयान के लिए देश भर में सर्वे करायें जायें तो लोग इस आपराधिक और भ्रष्टाचार को बढाने वाले बयान के लिए मनमोहन सिंह को सजा देने क़ी अपील करेंगे |



अब दूसरा पहलु देखिये अभी सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी के किसानों के भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित याचिका को ठुकरा दिया क्योंकि कानूनी दायरे में यही व्याख्या बनती थी | लेकिन अगर सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को इंसानियत के नाते स्वीकार कर इस कानून क़ी खामियों पर प्रकाश डालकर सच्ची न्यायिक व्याख्या करती तो फिर सरकार कहती क़ी नीतिगत मामलों में दखल ना दे...


अब देखिये इस सरकार क़ी बेशर्मी इधर सर्वोच्च न्यायालय ने किसानों क़ी याचिका ठुकराई और उधर जबरदस्ती इस देश क़ी महारानी बनी सोनिया गाँधी का बयान आया क़ी किसानों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए | ये है इस बेशर्म कांग्रेस सरकार का चेहरा सर्वोच्च न्यायालय से भी बड़ी है इनकी राजमाता सोनिया गाँधी | दुःख तब और हुआ जब मीडिया ने इस राजमाता के बयान पर बहस छेड़ दिया ,लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के जनहित में आये आदेश को एक निकम्मे व्यक्ति द्वारा अपमान करने को मीडिया ने उतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाया | ऐसे हालात में कैसे कोई जज कानून को इंसानियत से जोड़कर व्याख्या करने की कोशिस करेगा ...?



अब देखते हैं क़ी भूमि अधिग्रहण कानून मोटा-मोटी कहता क्या है 1894 में अंग्रेजों द्वारा सड़क,नहर,रेलवे लाइन इत्यादि बहुत जरूरी जनहित क़ी चीजों के लिए इस कानून को बनाया गया जिसे 1978 में तब थोरी और मजबूती मिली जब आजाद भारत सरकार ने सम्पत्ति के अधिकार को नागरिकों के मूल अधिकार से निकाल दिया |

दरअसल ये कानून कहिं भी किसानों से ज़मीन लेकर भारत सरकार को बेशर्मी से दलाल बनकर किसी बिल्डर माफिया को देने क़ी बात नहीं कहता है लेकिन जब इस देश क़ी तथाकथित महारानी का परिवार भी इस बिल्डर  माफिया का हिस्सा हो तो इस देश में किसानों क़ी ज़मीन ऐसे ही छीनी जाएगी और किसान बदहाल तथा दलाल मालामाल होते रहेंगे | 


शर्मनाक है इस देश में सोनिया गाँधी का राजतन्त्र जो सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर है और किसी भी कानून की व्याख्या अपने मन मुताबिक करा सकता है ,हे भगवान इस देश में ऐसा कोई नहीं जो इस परिवार से इस देश को छुटकारा दिलाये....?

Sunday, September 5, 2010

भारत सरकार यानि समस्याओं को जन्म देने वाली रद्दी क़ी पोटली...



आज इस देश क़ी लगभग 80% आवादी दुःख और तकलीफ में जी रही है और इस देश के राष्ट्रपति भवन के बिजली का खर्चा कड़ोरों में है | देश के ज्यादातर सांसद और मंत्री कानूनी रूप से करोडपति और गैरकानूनी रूप से तो अरबपति हैं वहीँ दूसरी ओर दिल्ली के झुग्गी-झोपड़ी  में ज्यादातर लोगों को एक शौचालय और पीने का साफ पानी भी उपलब्ध नहीं है |



अब सवाल उठता है क़ी समस्याओं को सुलझाने क़ी जिम्मेवारी जिनके ऊपर है वो समस्याओं के बाबजूद करोडपति बनते जा रहे हैं और देश तथा समाज समस्याओं में घिरकर बद से बदतर होता जा रहा है ....आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ....? 



एक कहाबत है सोये को जगाया जा सकता है  जो जगा हो उसे कैसे जगाया जा सकता है ,समस्या हो तो सुलझाया जा सकता है लेकिन जब समस्या को सुलझाने वाले ही समस्या को पैदा करें अपने निहित स्वार्थ सिद्धि के लिए तो समस्या कैसे सुलझेगी | कुछ ऐसा ही हाल आज भारत सरकार का है और भारत सरकार समस्याओं को पैदा करने वाली रद्दी क़ी पोटली बन चुकी है ...देश के प्रखंड व जिले से लेकर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति कार्यालय तक समस्याओं को पैदा कर उससे अपना स्वार्थ सिद्धि करने वालों का बर्चस्व है ...जरा गौर कीजिये निम्नलिखित तथ्यों पर ....



1 - कश्मीर समस्या क़ी जड़ कश्मीर और पाकिस्तान में नहीं बल्कि हमारे गृह,रक्षा,वाणिज्य तथा वित्त मंत्रालय के भ्रष्ट सलाहकारों और अधिकारियों के खुराफाती दिमाग में है | इस समस्या के सुलझते ही इन तीनो मंत्रालय के भ्रष्ट अधिकारियों से लेकर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं तथा मंत्रियों क़ी अडबों क़ी कमाई बंद हो जाएगी | मेरा दावा है क़ी इमानदार पत्रकारों,रिटायर्ड जजों और समाजसेवकों के द्वारा इन चारो मंत्रालय के पांच वर्षों के कश्मीर से सम्बंधित खर्चों का अगर सामाजिक जाँच जमीनी स्तर पर निगरानी करके किया जाय तो इन चारो मंत्रालय के मंत्रियों और अधिकारियों समेत कई और सफ़ेद पोश उद्योगपति भी कटघरे में खरे नजर आयेंगे और समस्या का समाधान भी शुरू होने लगेगा ...


2 -सरकार तरह-तरह के सुरक्षा बलों क़ी स्थापना कर रही है और इन सुरक्षा बलों क़ी स्थापना के बाद अपराधों में बेतहासा बढ़ोतरी होती जा रही है | देश के गृहमंत्रालय में बैठे मोटी तनख्वाह पा रहे लोग अपराध नियंत्रण के उपायों पर अनुसन्धान कर रहे हैं या अपराध को बढाकर लोगों में भय और दहसत का माहौल पैदा करने का ...? ये तो उन्ही को पता होगा | देश क़ी राजधानी में अगर आम लोगों का सर्वे ईमानदारी  से कराया जाय तो 85% लोग पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था से दुखी और परेशान होने क़ी राय जाहिर करेंगे ...नक्सल समस्या दरअसल समस्या ही नहीं है ये सिर्फ सुरक्षा के नाम पर अडबों क़ी लूट का साधन मात्र है और इन मंत्रालयों में बैठे गद्दार इसकी पटकथा तैयार करते हैं | देश में विष्फोटक नियंत्रक क़ी अलग से व्यवस्था और इतनी बड़ी-बड़ी सुरक्षा एजेंसियों के होते हुये 164 ट्रक बारूद एक्सपायर  हो चुके लायसेंस के बल पर गायब कर दिए जाते हैं और देश क़ी पूरी क़ी पूरी खुपिया और अन्य व्यवस्था सोयी रहती है | दरअसल गृहमंत्रालय तथा वाणिज्य मंत्रालय में गद्दार और भ्रष्ट लोग बैठे हैं और गद्दारों क़ी सीधी पहुँच है इन मंत्रालयों में इसलिए इस देश में ऐसे अपराध को बरी आसानी से अंजाम दिया जाता है और आरोप पाकिस्तान के ISI पर बड़ी आसानी से थोप कर इस देश की जनता को बेबकूफ बना दिया जाता है तथा आस्तीन के सांप का बाल भी बांका नहीं होता है | ऐसे में समस्या का समाधान सिर्फ और सिर्फ सामाजिक जाँच से ही संभव है ,इमानदार अधिकारियों की कमी नहीं है हमारे देश में जरूरत सिर्फ उन्हें टास्क देकर स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से सामाजिक आधार पर जाँच करने देने की है | 


इस देश में समस्याओं का समाधान तब-तक नहीं हो सकता जब-तक इस देश के ज्यादातर मंत्रालयों और आयोगों में देश के गद्दारों,भ्रष्टाचारियों और निहायत ही घटिया चरित्र के लोगों का जमघट रहेगा ,इसलिए जरूरत है देश के बाहर के गद्दारों से लड़ने का ढोंग करने और देश की जनता को बेबकूफ बनाने की वजाय आस्तीन के सांपों के फन को कुचलने तथा इन मंत्रालयों में बैठे देश के गद्दारों को पकड़ने की | जब-तक ऐसा पूरी ईमानदारी और सामाजिक जाँच के आधार पर नहीं किया जाता तबतक इस देश में भारत सरकार समस्याओं को पैदा करने वाली रद्दी की पोटली बनी रहेगी और गद्दारों की पकड़ इस देश पे और भी मजबूत होती रहेगी ...आज इस देश में सुरक्षा बलों की स्थापना करने की नहीं बल्कि सरकार में अधिकारियों और मंत्रियों के रूप में बैठे भ्रष्ट और गद्दार लोगों को पहचान कर उनकी देश व विदेश की संपत्ति जप्त करने तथा उनको सजा देने के साथ-साथ  इस देश के सभी नागरिकों तक  रोटी,कपडा और मकान पहुँचाने की ...ऐसा होने के बाद ही यह देश और समाज अपने आप को सुरक्षित और भयमुक्त महसूस करेगा ...भ्रष्टाचार और अराजकता भी इन मंत्रालयों में बैठे गद्दारों के वजह से ही बढ़ रहा है और देश का असल विकाश की जगह नकली कागजी विकाश हो रहा है ..

Thursday, September 2, 2010

भ्रष्टाचार,लूट,भूखमरी,अराजकता और सरकारी खजाना कांग्रेस पार्टी के बाप क़ी जागीर के सहारे एक बार फिर सोनिया गाँधी बनेगी कांग्रेस अध्यक्षा ...

सोनिया गाँधी के सत्ता और साधन युक्त भारत..

आम लोगों का सत्ता और साधन विहीन भारत ...


पिता (राजीव गाँधी) बोफोर्स घोटाले,भोपाल गैस हादसे के आरोपी एंडरसन को सरकारी मेहमान क़ी तरह देश से बाहर भेजने में सहयोग देने का आरोपी तथा पहलीबार यह कहने वाला क़ी देश के विकाश का पैसा गरीबों तक एक रूपये का 85 पैसा भी नहीं पहुँचता है का प्रवर्तक और कांग्रेस पार्टी उस वक्तव्य को जमीनी स्तर पर लागू करने में सबसे आगे ,राजीव गाँधी के  इस वक्तव्य के बाद देश क़ी नीतियाँ उसी तरह बनने लगी जिससे जन्कल्यानकारी योजनाओं का पैसा एक रूपये में से 85 पैसा नहीं बल्कि 95 पैसे तक लूटा जा सके | जबकि होना यह चाहिए था क़ी इस लूट को रोकने के ठोस उपाय,निगरानी और कार्यवाही क़ी व्यवस्था तैयार किये जाते | लेकिन जिस पार्टी क़ी नींव ही भ्रष्टाचार और लूट पर टिकी हो उस पार्टी के रहते ऐसा होना तो दूर सोचना भी अपराध है ,जो सोचेगा वो जेल क़ी हवा खायेगा ...


बेटा राहुल गाँधी जिसे दिल्ली में खुलेआम आम लोगों पे अत्याचार और अन्याय तथा कोमनवेल्थ के नाम पर भ्रष्टाचार का नंगा खेल नहीं दीखता है लेकिन उड़ीसा में आदिवासियों का दर्द दीखता है और वहाँ ढोंग रचाने तुरंत पहुँच जाता है लेकिन भ्रष्टाचार महंगाई,सड़ते अनाज,न्याय का गिरता स्तर और कुव्यवस्था को रोकने व सुधारने का एक भी प्रयास इस ढोंगी और जबरदस्ती इस देश पर थोपे जाने वाले युवराज के तरफ से असल में होता कभी नहीं दिखा ,अगर किसी को दिखा हो तो इस ब्लॉग पर जरूर लिखें...


अब बात इस देश को दुर्भाग्य से मिले और भ्रष्टाचार क़ी आवारा पूँजी से जमें महारानी सोनिया गाँधी क़ी ,इस महारानी के हाथ में जब से इस देश क़ी कमान आई है इस देश में कानून और व्यवस्था नाम क़ी चीज ख़त्म सी हो गयी है,सत्य बोलने वाले और न्याय के लिए लड़ने वालों को ह़र जगह प्रतारित किया जाने लगा है ,भ्रष्टाचारियों क़ी मौज है ,उद्योग पतियों के ऊपर सरकार और सामाजिक सरोकार जैसा कोई नियंत्रण जैसे ख़त्म सी हो गयी है ,शरद पवार जैसे भ्रष्ट मंत्री पूरे देश को उसके थाली से दो वक्त क़ी रोटी छिनकर भ्रष्टाचार क़ी जय हो का पाठ पढ़ा रहें हैं जिससे देश क़ी गरीब जनता ही नहीं बल्कि ह़र व्यक्ति का जीवन नरक समान बनता जा रहा है ,देश में अनुशासन,निगरानी व कार्यवाही क़ी व्यवस्था खत्म हो गयी है ,देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे पदों क़ी मर्यादा को भी इस महारानी के अपने स्वार्थ और सत्ता सुख भोगने क़ी चाह क़ी वजह से जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाये |




इस देश के सच्चे,अच्छे,इमानदार और देशभक्त नागरिकों के लिए दुःख और शर्म क़ी बात यह है क़ी इस स्वयंभू महारानी क़ी ताजपोशी एकबार फिर होने वाली है | यही है इस देश का दुर्भाग्य क़ी श्री  हरी प्रसाद जैसा इमानदार नागरिक जेल में और भ्रष्टाचार क़ी रक्षक इस देश क़ी महारानी ..पूरा विश्व देख रहा है इस परिवार का अपने हितों के लिए सत्ता का सदुपयोग और इस देश क़ी जनता के हितों के लिए आपराधिक स्तर पर दुरूपयोग ...शायद अब कोई दैविक चमत्कार ही इस परिवार से इस देश और समाज को बचा सके..लेकिन मुझे समय के न्याय पे पूरा भरोसा है,क्या आपको भी है...?




सभी चित्र गूगल से साभार प्रकाशित है ...

Wednesday, August 18, 2010

इंडिया नीड्स वेक्सिन ऑफ़ करप्सन ...



आज देश और समाज सरकार के निकम्मेपन द्वारा प्रायोजित तथा संरक्षित भ्रष्टाचार के वजह से भ्रष्टाचार और सामाजिक अनैतिकता जैसे गम्भीर रोग से बुडी तरह पीड़ित है  |


जिसके निदान के लिए हमारी इमानदार स्वास्थ्य शोधकर्ताओं के समूह से तथा बेहद इंसानी सोच वाले चिकित्सा क्षेत्र के छात्र और छात्राओं से आग्रह है क़ी वो एक ऐसे टीके का अविष्कार करने के लिए समर्पित होकर काम करें जिस टीके को लगाने के बाद शरद पवार जैसा भ्रष्ट मंत्री भी इमानदार हो जाय और देश व समाज हित में काम करने लग जाय | अगर किसी व्यक्ति या किसी दैविक शक्ति के प्रेरणा से भी ऐसे टीके क़ी खोज कर ली जाती है तो इससे इंसान के सभी बिमारियों का इलाज हो जायेगा |  ऐसे टीके का अविष्कार करना बहुत ही जरूरी हो गया है | एक बात और है इस टीके क़ी खोज अगर होगी तो सिर्फ भारत में ही और भारतीय लोगों के ही द्वारा लेकिन इस दिशा में प्रयास ही नहीं किया गया |


अगर ऐसा होता है तो निश्चय ही इस टीके को मंत्रिपद क़ी शपथ लेते वक्त  मंत्रियों को और अधिकारियों को पदभार ग्रहण करने वक्त लगाकर ना सिर्फ इस देश और समाज को बल्कि पूरी इंसानियत को बचाया जा सकता है ,फ़िलहाल जबतक इस टीके का अविष्कार और खोज होता है तब तक एक दूसरे प्रकार के व्यवहारिक टीके का प्रयोग अगर इस देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री चाहें तो करके इस देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिला सकते हैं ...

 रोग -
1 - 99% मंत्री द्वारा देश और समाज के साथ गद्दारी जिसके वजह से उनके पास आवारा पूँजी के आ जाने से उनमे तथा उनके बच्चों में चरित्रहीनता,आपराधिक प्रविर्ती,भ्रष्टाचारियों और अपराधियों को बेशर्मी क़ी हद तक संरक्षण ,कार्य में गुणवत्ता का घोर अभाव तथा अंग्रेजों से भी बदतर तानाशाही दिमाग का पनप जाना आम है ..



बैकल्पिक निदान - ह़र मंत्री को ह़र तीन महीने पर एक ऐसे टीके लगायें जायें जिससे उनमे इंसानियत जिन्दा रहे जिसके शोध के लिए हमने ऊपर अपील क़ी है | लेकिन  तब  तक बैकल्पिक इलाज के लिए ह़र मंत्री को उसके विभाग से सम्बंधित सबसे निचले स्तर पर ह़र वर्ष कम से कम तीन महीने सख्ती से कार्य कराया जाय |



जैसे शरद पवार को बाढ़ या सूखाग्रस्त क्षेत्रों में साल के तीन महीने रहकर खेतों में कृषि कार्य करना अनिवार्य कर दिया जाय | ऐसा नहीं करने पर मंत्री पद से हटा दिया जाय | संचार मंत्री को देश में ह़र गांवों और शहरों क़ी बस और ट्रेन से यात्रा कर संचार क्षेत्र में आ रही लोगों क़ी दिक्कतों और मोबाईल ऑपरेटरों द्वारा ठगे जाने क़ी शिकायत ह़र घर जाकर लिखने और उसके समाधान के सुझावों क़ी विडियो रिकोर्डिंग  कर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक पँहुचाने के काम में लगाया जाय |


देश भर के लोगों के विचारों और  सुझावों के आधार पर संविधान संशोधन कर इस टीकाकरन को लागू किया जाय और मंत्री पद क़ी शपथ के वक्त इस आशय के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर भी कराया जाय | इन तीन महीने के टीकाकरण के दौरान इनको सिर्फ सुरक्षा मुहैया कराया जाय बाकि कोई भी मंत्री पद वाली सुविधा इन्हें नहीं मुहैया कराया जाय | क्योंकि जिस व्यक्ति को मुफ्त का सुख हमेशा उपलब्ध होता है उसकी इंसानी सोच मरकर संवेदनहीन होने क़ी 99% संभावना है | आज ज्यादातर मंत्रियों और सरकारी कर्मचारियों में भ्रष्टाचार तथा निगरानी व्यवस्था के अभाव में यह लक्षण आम है |


Wednesday, August 11, 2010

दिल्ली को अपराध मुक्त करना है तो देश के गृह मंत्रालय को स्पेशल टास्क ग्रुप बनाना होगा इसके लिए ....


दरअसल दिल्ली में अपराध क़ी प्रमुख वजह ज्यादातर भ्रष्ट विधायकों और सांसदों के वो प्रतिनिधि हैं जिनकी रोजी रोटी ही अपराधियों पर आधारित है | इस दिशा में गंभीरता से सोचने क़ी जरूरत है लेकिन ना तो गृहमंत्रालय और ना ही पुलिस का अपराध अनुसन्धान इस दिशा में किसी ठोस एक्सन प्लान बनाने पर विचार कर रहा है |

दरअसल ऐसे तथाकथित विधायक और सांसद प्रतिनिधि समाज में उस कोढ़ क़ी तरह हैं जिनकी वजह से पूरा समाज अपराधियों के खुलेआम अपराध से कराह रहा है | इनके लिए कानून क़ी कोई अहमियत नहीं है ,सरकारी योजनाओं जैसे सड़क,भवन,स्वास्थ्य सुरक्षा योजना इत्यादि सभी जनकल्याणकरी योजनाओं में लूट और घपला कराने के मध्य में यही होते हैं | इनकी सरकारी कार्यालयों में इतनी पहुँच होती है क़ी ह़र गलत और फर्जी काम को मिनटों में करवाना इनका बायें हाथ का काम है | अगर कोई इमानदार अधिकारी इनके फर्जी कामों में टांग अराता है तो ये उसकी या तो तबादला करा देते हैं या उनको धमकाते हैं ,पुलिस के SHO स्तर के अधिकारी इनके इशारों पे नाचते हैं इनके सामने इमानदार किस्म के SHO भी अपने आपको लाचार और मजबूर पाते हैं | पुलिस के भ्रष्ट  उच्च अधिकारी भी इनके प्रभाव में होते हैं पैसे और ऐय्यासी के साधन मुहैया कराने की वजह से लेकिन इमानदार IPS से ये थोडा बहुत खौप खाते हैं |

इनका प्रमुख अपराध निम्न प्रकार का है ....

अपराधियों को अपराध करने के लिए प्रेरित करना जिससे समाज में भय और आतंक का वातावरण के साथ-साथ आपसी मेलजोल में संदेह पैदा हो तथा अपराधियों को हर-हाल में सुरक्षा देना .....

दूसरे राज्यों से आये अपराधियों को अपने प्रभाव से सुरक्षित रहने और खाने की व्यवस्था करना तथा अपराध को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए हर तरह की सहायता मुहैया करना ....

अवैध निर्माण को हर तरह से संरक्षण देना ,DDA तथा अन्य सरकारी मकानों तथा जमीनों का अवैध रूप से आवंटन करना ..


किसी के जमीन और मकान पर अवैध कब्ज़ा करना और करवाना ...

अकेले और बुजुर्ग लोगों की हत्या कराकर उसके संपत्ति को हरपना या उन्हें डरा-धमकाकर  कम कीमत पर अपना मकान बेचने के लिए मजबूर करना ....



विधायक और सांसद योजनाओं में फर्जी लोगों को ठेका दिलाकर उसमे मोटी कमाई करना फर्जी नामों से ऋण वगैरह की निकासी का काम करना ....


लोभी-लालची व आपराधिक आचरण वाले तथा नकली खाद्य पदार्थों का उत्पादन तथा व्यवसाय करने वालों के खिलाप हर कार्यवाही को अप्रभावी बनाने का काम करना और ऐसे गैर कानूनी धंधों को प्रोत्साहन देकर उसमे अपना हिस्सा खाना तथा पूंजी निवेश भी करना...


अपने इलाकों में चोरी,लूट,हत्या,हमला जैसे घटना की पूरी प्लानिंग करना तथा उसे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सफलता पूर्वक अंजाम देना तथा उसका F .I .R नहीं होने देना .... 

स्थानीय प्रशासन को भी अपने विधायक और सांसद प्रतिनिधि का वास्ता देकर हर गलत कार्य जैसे झूठे पहचान पत्र,रासन कार्ड इत्यादि बनवाने का काम करना और अपराधियों के सुरक्षा का बंदोबस्त करना तथा आपराधिक आचरण वाले लोगों को निचले स्तर के स्थानीय चुनाव में जिताने का प्रबंध करना |


इनमें कुछ तो ऐसे भी हैं जो भ्रष्ट जनप्रतिनिधि के पैसों और उनको चुनाव में फायदा पहुँचाने के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़तें हैं | इन लोगों का कमाई का कोई जरिया नहीं होने के बाबजूद इनके पास कई महँगी गाड़िया ,बंगला इत्यादि की भरमार है ,इनके बच्चे महंगे निजी स्कूलों में पढ़ रहें हैं |


ऐसे लोगों के गतिविधियों को रोकने के लिए समर्पित और बेहद इमानदार पुलिस तथा इंटेलिजेंस अधिकारियों के टीम की जरूरत है जिससे इनके खिलाप ठोस सबूतों को इकठ्ठा कर इनको सजा दिलाया जा सके | गृह मंत्रालय के अपराध अनुसन्धान को इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा ,अन्यथा दिल्ली में अपराध और अपराधियों में कमी नहीं हो सकती है | ये सिर्फ अपराधी नहीं बल्कि देश और समाज के सबसे खतरनाक दुश्मन हैं | इनके हर गतिविधियों पे नजर रखने की जरूरत है क्योंकि अब इनके पास अपराध व राजनीती की ताकत के साथ-साथ असीमित दौलत भी है |


Monday, August 9, 2010

इस देश में गरीबी ,बेरोजगारी और भूखमरी बढ़ने के असल कारण जानिए ......

इसकी कहानी में कई छेद है तो देश की अर्थव्यवस्था का क्या कहना ..?
अभी तक मैं इस तलाश में भटक रहा था क़ी सभी साधनों और संसाधनों के बाबजूद हमारे देश और समाज क़ी इतनी बुरी हालात क्यों है ? अब जाकर लखनऊ के राकेश कुमार सिंह और मुंबई के अनिल खत्री (RTI कार्यकर्त्ता) के अथक प्रयास और देश भक्ति से भरे सोच क़ी वजह से इसका मुझे पता चल सका है |

आप भी इस लिंक पर जाकर पढ़िए    

http://www.saveindianrupeesymbol.org/2010/06/violation-guidelines-indian-rupee.html


अब पढने के बाद आप भी सहज अनुमान लगा सकते है क़ी जिस देश का वित्त मंत्रालय रूपये के प्रतीक चिन्ह  क़ी  तलाश में भी सारे नियम-कायदों क़ी अनदेखी कर थोड़ी सी भी ईमानदारी और पारदर्शिता को नहीं अपना सकता है तो उस  वित्त मंत्रालय से  देश क़ी  अर्थ  व्यवस्था को  ईमानदारी  से  चलाने क़ी आशा कैसे क़ी जा सकती है ? 
इस छोटी सी प्रतियोगिता में इतने छेद हैं तो पता नहीं जहाँ अडबों का खेल होता होगा वहाँ कितने छेद होते होंगे और उस छेद से जनता के टेक्स के पैसे को बहा दिया जाता होगा  ? 


सवाल वही --निगरानी और सुधार करे कौन तथा दोषियों को सजा दे कौन ? 


शायद ये देश अभी और दुर्दशा झेलने को मजबूर है ...फ़िलहाल तो  वित्त  मंत्रालय की कार्यप्रणाली  को संदेहास्पद ही  कहा जा सकता है ..? जिसकी जाँच गंभीरता से करने की जरूरत है |



यहाँ यह भी बताना जरूरी है की राकेश सिंह जी ने देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सैकरों पन्नों के सबूतों के साथ अपनी शिकायत भेजी है | लेकिन 40 दिनों बाद भी इस देशभक्त और इमानदार नागरिक को कोई जवाब नहीं मिला है | दुःख इस बात का सबसे ज्यादा है की देश का  राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी देश की व्यवस्था को सुधारने   के प्रति गंभीर नहीं हैं ,ऐसे में एक इमानदार नागरिक के पास उपाय क्या  है ..अथक देशभक्ति भरे प्रयासों के बाद मिलती है बेबसी और लाचारी ...?

Sunday, August 8, 2010

अलविदा दोस्तों.....अब सिर्फ ब्लॉग लिखने की नहीं बल्कि अपने खून से इस देश और समाज के तक़दीर को लिखने की जरूरत है ...?




मैं ऐसे राष्ट्रपति से प्रेरित हूँ जिन्होंने कर्तव्य को निभाने में ईमानदारी अपनाते वक्त अपने बच्चों के भविष्य क़ी भी चिंता नहीं क़ी और भ्रष्टाचार से एक रुपया भी नहीं जमा किया इनको कहते हैं सच्चा लोक सेवक |

अलविदा दोस्तों मैंने शुरुआत की है अपने खून से इस देश और समाज के तक़दीर को लिखने की क्योंकि अब अगर हमने अपने जान की परवाह की तो इंसानियत ही नहीं बचेगी | फिर इस जान की जरूरत ही खत्म हो जाएगी | मैंने ऐसा किसी अभाव में नहीं बल्कि देश में भ्रष्टाचार और बेईमानी के चरम सीमा पे पहुँचने के कारण किया है | इस देश में निगरानी ,सुधार और दोषियों को सजा देने की सारी प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है | व्यवस्था पूरी तरह सड़ चुकी है और इसे सड़ाने वाले मंत्री जैसे सम्माननीय पदों पर बैठकर भ्रष्टाचार और बेईमानी को पोषण और संरक्षण दे रहें हैं | मैंने कुछ भ्रष्ट मंत्रियों के नाम देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों को इ.मेल से भेजा है और अगर इनपर कार्यवाही नहीं हुयी तो 08/09/2010 को मैं अपनी जीवन लीला समाप्त कर लूँगा | क्योंकि मुझे जीने का अधिकार है लेकिन ईमानदारी और अच्छाई से अगर मेरे इस अधिकार का हनन ज्यादातर देश के मंत्री ही कर रहें हों तो जीने का कोई अर्थ नहीं रह जाता है | मैंने इस देश के लाखों लोगों के दुखों का अध्ययन किया है और पाया है की उनके दुखों का कारण सिर्फ और सिर्फ ये भ्रष्ट मंत्री और इनके द्वारा दोषियों को सजा देने की व्यवस्था को खत्म कर देना ही प्रमुख कारण है  | अतः इनके खिलाप हर-हाल में कार्यवाही को मैंने अपने जान से भी जोड़ दिया है ,आप सब से भी आग्रह है की आप मेरे इस नेक काम में मेरा हौसला बढ़ाने का प्रयास करें और हो सके तो अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर मुझ जैसा ही कदम उठायें | आपके द्वारा उठाये गये निडरता भरे क़दमों से भी कम से कम प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को कुछ ईमानदारी भरा करने की प्रेरणा मिले |

आज मैंने 03:16 मिनट दोपहर में निम्नलिखित इ.मेल के पते पर भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति को इ.मेल किया है वह आप लोगों के लिए भी यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ ...












topresidentofindia@rb.nic.in,
pmosb@pmo.nic.in,
vpindia@sansad.nic.in

आदरणीय राष्ट्रपति महोदया,प्रधानमंत्री महोदय तथा उपराष्ट्रपति महोदय
सादर नमस्कार ,

विषय-अगर आप लोगों ने इमानदार संसद सदस्यों,समाज सेवकों और इमानदार IAS , IPS और IRS  के संयुक्त जाँच समिति द्वारा इन निम्नलिखित मंत्रियों के भ्रष्टाचार की जाँच नहीं करायी तो मैं यह मान लूँगा की इस देश में ईमानदारी और सत्यमेव जयते के लिए कोई जगह नहीं बचा है....अतः मैं यह भी मान लूँगा की मुझे मिले सच्चाई और ईमानदारी से जीने के अधिकार को इन मंत्रियों के शर्मनाक भ्रष्टाचार ने बाधित किया है और मुझे तथा मुझ जैसे अन्य लोगों को भ्रष्टाचार और बेईमानी को अपनाने के लिए विवश भी करने का प्रयास किया है | लेकिन मैं एक ऐसा इंसान हूँ जो किसी भी काम को करने के बाद उसकी जाँच देश के सभी  इमानदार नागरिकों से कराने को तो तैयार हूँ लेकिन भ्रष्टाचार और बेईमानी के सहारे अपने और ना ही अपने बच्चों के जीवन के रक्षा को किसी भी हाल में तैयार नहीं हूँ | अतः अगर आप लोगों ने इन आरोपित मंत्रियों के विभागों में इनके द्वारा किये गये भ्रष्टाचार की न्यायसंगत और तर्कसंगत आधार पर ईमानदारी से जाँच कराकर इनको सजा नहीं दिया तो मैं आज से ठीक तीस दिनों बाद अपनी जीवन लीला समाप्त कर लूँगा | इनके द्वारा लूटा जा रहा पैसा इनका नहीं है बल्कि उस गरीब का भी है जो एक माचिस की खरीद पर पाँच पैसे के टेक्स के रूप में सरकारी खजाने को देता है | मेरे इस आग्रह पर अगर आपने अपने पद की परवाह किये वगैर ईमानदारी से कार्यवाही किया तो आप एक इमानदार इंसान की जान बचाने के साथ-साथ इस देश और समाज को भी बचाने का प्रयास करेंगे |

महोदय एवम महोदया ,


मैं एक बेहद इमानदार और अपने इंसान होने के सभी कर्तव्यों को अपने जान की परवाह किये वगैर निर्वाह करने वाला व्यक्ति हूँ | मेरे इस कथन की सत्यता के लिए कोई भी व्यक्ति मेरे कार्यों और मेरे व्यवहार की जाँच कभी भी कर सकता है | मैंने हमेशा कोशिस की है  हर व्यक्ति को इंसान बनाने की | लेकिन आज देश के कुछ मंत्री भ्रष्टाचार और बेईमानी का इतना नंगा खेल खेल रहें हैं की इंसानियत को  जिन्दा रखना मुश्किल हो गया है तथा इन मंत्रियों ने ना सिर्फ अपने पदों का दुरूपयोग किया है बल्कि लोगों को भ्रष्ट और बेईमान बनाने के साथ-साथ देश में निगरानी ,सुधार और दोषियों को सजा देने की प्रक्रिया को भी अपने प्रभाव से खत्म करने का जघन्य अपराध किया है | ये सिर्फ भ्रष्टाचारी ही नहीं बल्कि हैवान हैं और इनके कुकर्मों की सजा के लिए इनकी ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट कराकर इनके कुकर्मों की जाँच कर इनको सरेआम फांसी की सजा दी जाय | अगर मेरे आरोप इनकी ब्रेनमेपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट जो की इमानदार समाज सेवकों और इस देश के इमानदार जजों के सामने कराया जाय के बाद झूठा साबित हो तो मुझे सरेआम फांसी पर चढ़ा दिया जाय | इसके लिए मैं शपथ -पत्र भी लिख रहा हूँ  |

                            
                     शपथ-पत्र
मैं जय कुमार झा,पिता-स्वर्गीय श्याम सुन्दर झा ,निवासी -वर्तमान पता -127 ,DDA ,HIG ,SECTOR A -5 ,पॉकेट -13 ,नरेला,दिल्ली-40 ,स्थायी पता-AT.+PO . -श्रीखंडी -भिट्ठा ,भाया-सुरसंड,जिला-सीतामढ़ी,(बिहार),मोब-09810752301 ,अपने पूरे होशो हवास और अच्छी सोच के अनुसार सोचकर निम्नलिखित मंत्रियों को अपराधी,घोरभ्रष्टाचारी और इंसानियत का दुश्मन कह रहा हूँ | अगर मेरे आरोपों  की इमानदार समाजसेवकों तथा जजों के सामने  इन मंत्रियों के ब्रेनमेपिंग व लाई डिटेक्टर टेस्ट के बाद भी सत्यता प्रमाणित नहीं हुयी तो मैं ख़ुशी-ख़ुशी फांसी पर चढ़ जाऊंगा | मुझे दुःख के साथ-साथ शर्म भी महसूस हो रहा है की ऐसे लोग हमारे देश के मंत्री पद को बदनाम करते हुए हमारे देश के मंत्री पद पर विराजमान हैं | इन मंत्रियों के वजह से पूरे देश में भ्रष्टाचार को बढ़ने में प्रेरणा मिली है | मैं किसी पार्टी से नहीं जुड़ा हूँ और ना ही जुड़ने की इक्षा है | मैं सामाजिक आंदोलनों और पारदर्शिता के लिए लड़ाई तथा भ्रष्टाचार के खिलाप लड़ाई के सभी आंदोलनों से जुड़ा हुआ हूँ तथा मेरी हार्दिक इक्षा है की सामाजिक जाँच हर सरकारी खर्चों और घोटालों के जाँच के लिए आवश्यक हो | इन मंत्रियों को तुरंत पदों से तब तक के लिए हटा दिया जाय जब तक इनके खिलाप जाँच पूरी ना हो जाय  | मेरे द्वारा आरोपित मंत्री हैं ---

1 -शरद पवार (कृषि मंत्री)
2 -शिला दीक्षित (मुख्यमंत्री दिल्ली)
3 -अरविंदर सिंह लवली(परिवहन व शिक्षा मंत्री दिल्ली)
4 -राज कुमार चौहान(मंत्री PWD दिल्ली)
5 - एस. जयपाल रेड्डी ( शहरी विकाश मंत्री )

इन सभी मंत्रियों के विभागों में शर्मनाक भ्रष्टाचार और आम नागरिकों के प्रति आपराधिक स्तर की असम्बेदंशिलता है और सबसे गंभीर बात यह है की इन मंत्रियों द्वारा भ्रष्टाचार को  पोषण और संरक्षण दिया जा रहा है |

आशा है आपलोग पदों से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर उपर्युक्त मंत्रियों को पदों से हटाकर उनके खिलाप ईमानदारी भरा जाँच करवाकर उनको उनके पदों के दुरूपयोग तथा आपराधिक स्तर के भ्रष्टाचार की सजा जरूर देंगे | अन्यथा यह मेरा अंतिम आग्रह तो होगा ही |

सत्यमेव जयते ,ईमानदारी और देशभक्ति की रक्षा तब की जा सकती है जब पद और जान की परवाह ना की जाय ,हमने शुरुआत की है आगे देखतें हैं लोग क्या करतें हैं ...आप लोगों का सार्थक जवाब व ईमानदारी भरी कार्यवाही इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है |

                 आशा है आप लोग कुशल होंगे ,आपका -जय कुमार झा
                     दिनांक-08 /08 /2010 ,नरेला,दिल्ली 

अंत में मैं आप सभी ब्लोगरों से बताना चाहूँगा की अगर राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा भी कुछ नहीं किया जाता है भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था को रोकने के लिए तो मुझे जीने की कोई इक्षा नहीं रह जाएगी और 08/09 /2010 को भ्रष्टाचार के खिलाप मेरी मौत का जिम्मेवार इन तीनो पदों पर बैठे व्यक्ति ही होंगे | मैं अगर जिन्दा ना भी रहा लेकिन मेरी मौत इस देश में भ्रष्टाचार के खिलाप आन्दोलन को एक अंतिम लड़ाई तक पहुंचा सका तो मैं अपने मौत को सार्थक समझूंगा |

Sunday, July 25, 2010

इंसानियत कि पाठशाला व संस्थान कि आज इस देश को सख्त जरूरत है ....क्या आप खोलना चाहेंगे ऐसी पाठशाला....?

एक सच्चा इंसान और इस महान देश के महान राष्ट्रपति ,जिन्होंने भ्रष्टाचार के पैसों को कोई अहमियत ना देकर देश व समाज कि ईमानदारी भरी सेवा को अहमियत दी | राष्ट्रपति का पद ऐसे व्यक्तियों से गरिमामय हुआ ,आज ऐसे व्यक्तियों से प्रेरणा लेने कि जरूरत है देश के सभी उच्च संबैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को |

आज देश के सभी जिलों और गांवों में यहाँ तक कि देश के राजधानी दिल्ली में भी ऐसी ही दर्दनाक अवस्था है इंसान कि | पूरे देश और इंसानियत के लिए शर्मनाक है ऐसी अवस्था |

देश में सभी जनकल्याणकारी  व गरीबों के उत्थान क़ी नीतियों का यही हाल है | देश के प्रधानमंत्री योजना आयोग के अध्यक्ष हैं लेकिन ईमानदारी से देश के ह़र जिलों के विकाश का एक बार भी सामाजिक जाँच करवाने क़ी उन्होंने कभी कोशिस नहीं है | बिना सामाजिक जाँच के विकाश सिर्फ एक ढोंग और भ्रष्टाचार का रूप बनकर रह गया है | ह़र सरकारी कार्यों क़ी  सामाजिक जाँच जब तक जरूरी नहीं बनाया जायेगा और इसके लिए सच्चे,अच्छे,इमानदार व देश भक्तों को साधन व संसाधन मुहैया नहीं कराया जायेगा तब तक इस देश का सच्चा विकाश नहीं होगा |

सभी मानवीय सहायता व कल्याण के धन पर देश के लोभी-लालची लोगों का पूरी तरह कब्ज़ा है | इमानदार व कर्मठ लोगों को कोई भी सहायता बिना रिश्वत के नहीं मिलती जिससे देश के असल नागरिकों का जीवन स्तर बद से बदतर होता जा रहा है , जब क़ी भ्रष्ट अधिकारी,जनप्रतिनिधि  व गरीबों का खून चूसने वाले दलालों का गठजोर पूरे धन का उपयोग कर एय्यासी कर रहें हैं | इस देश में सरकार व सरकारी व्यवस्था एक प्रश्न चिन्ह बनकर रह गयी है |
तिरंगा अब भ्रष्टाचार और उच्च संबैधानिक पदों पर बैठे निकम्मे लोगों क़ी वजह से खून के आंसू रो रहा है | पूरा गणतंत्र खतरे में है तथा पूरी व्यवस्था सड़ चुकी है |




हमारे देश और समाज कि अवस्था बेहद दर्दनाक व भयानक होती जा रही है | सामाजिक परिवेश इस तरह दूषित हो चुका है कि ह़र कोई विश्वास का गला घोंटकर अपना स्वार्थ साधने को अपनी काबिलियत व योग्यता समझने लगा है | लानत है ऐसे काबिल और योग्य लोगों पर जो इंसानियत का क,ख,ग  भी नहीं जानते | सबसे बड़े मुर्ख है वे लोग जो बन तो गए हैं IAS ,IPS ,IRS ,इंजिनियर,डॉक्टर,प्राचार्य,मंत्री विधायक और भी ना जाने कौन-कौन सी उच्च पदों पर बैठ गये हैं लेकिन उनमे मानवता और इंसानियत नहीं होने से ऐसे लोग ना सिर्फ इन सामाजिक व मानवीय कल्याण के पदों को बदनाम कर रहें है बल्कि इनके कुकर्मों से नित्य इंसानियत शर्मसार होती है | ऐसी अवस्था पूरे मनुष्य जाती के लिए बेहद खतरनाक है |

इन सारी बातों को देखते हुए आज जरूरत है हर शहर में इंसानियत के पाठशाला और संस्थानों कि जो सच्ची इंसानियत कि पाठ पढ़ाने का दुष्कर कार्य को अंजाम दे सके ,क्या आप खोलना चाहते हैं ऐसी  पाठशाला व संस्थान ..? 

मैंने तो सोच लिया है ऐसा एक पाठशाला या संस्थान चलाने कि इसमें हमें सरकारी सहायता कि आशा तो नहीं है लेकिन सच्चे और इमानदार इन्सान के हार्दिक सहयोग कि मुझे पूरी आशा है | 

इस पाठशाला या संस्थान में क्या-क्या मिलेगा और उसके आर्थिक आधार क्या होंगे तथा यह कैसे काम करेगा .....

इस पाठशाला या संस्थान के कार्य ....

1 -सबसे पहले देश के हर जिले के DM और SP से मिलकर उनको इंसानियत के लिए ईमानदारी से काम करने को प्रेरित करेगा और उनको समझायेगा कि आप जो ये भ्रष्टाचार के जरिये दौलत जमा कर रहें है उसके बाद भी  अगर आपका बच्चा एक इन्सान नहीं बन पाया तो वह आपके और समाज के साथ क्या-क्या करेगा उसकी आपने कल्पना कि है  ? ऐसे ही कुछ प्रश्नों के सवाल जवाब से इन दोनों ,देश व समाज के विकाश के अति महत्वपूर्ण पदों पर बैठे व्यक्तियों को सच्चा इन्सान बनाने व इंसानियत को जिन्दा करने के लिए आगे आने को प्रेरित करने का प्रयास करेगा | अगर इस काम में 25% भी सफलता हाथ लगी तो यकीन मानिये इस देश व समाज का बहुत भला होगा | जन-जन को यह भी महसूस कराने कि जरूरत है कि अब अंग्रेजों का शासन नहीं है इसलिए DM और SP को अपना सेवक समझ कर उसे सेवा करने में  इमानदारी बरतने का एकजुट होकर आदेश दें और उनके कार्यों कि निगरानी भी करें |

2 - हर शहर व गांवों में इंसानियत के पाठशाला व संस्थान के माध्यम से सभा का आयोजन कर लोगों को यह सिखाने कि कोशिस कि जाएगी कि अगर आपको किसी ने लूटा और ठगा है या रिश्वत ली है तो आप उसकी भरपाई किसी को लूटकर,ठगकर या भ्रष्टाचार को अपनाकर नहीं बल्कि उस लूटेरे ,ठग व भ्रष्टाचारियों को अपनी जान कि बाजी लगाकर पकड़ें और उसे सामाजिक व न्यायिक सजा दें या दिलाने के लिए एकजुट हों | इस काम के लिए लोगों को समझाना होगा कि इस काम में अगर आपकी जान चली जाती है तो आपको शहीद का दर्जा देकर आपके पैत्रिक गांव में आपकी एक मूर्ति कि स्थापना कि जाएगी | ऐसा करने से लोगों में बुराई के खिलाप लड़ने के जज्बों को ना सिर्फ सम्मान मिलेगा बल्कि उसमे अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी होगी | बिना निडरता के कोई भी अच्छा व सच्चा काम किया ही नहीं जा सकता | कास इस तरह का काम सरकार या सरकारी एजेंसियां ईमानदारी से 62 वर्षों से करती तो इस देश व समाज को पूरे विश्व में आदर्श  माना जाता | 

आज लोगों को यह समझाना  बहुत जरूरी है कि किसी को ठगकर ,भ्रष्टाचार को अपनाकर,किसी इंसानियत को शर्मसार करने वाले धंधे को करके  या किसी के साथ विश्वासघात करके जीना तो मरने से भी बदतर है | इंसानियत को जिन्दा करके तथा उसकी सुरक्षा करके ही हमसब सुरक्षित रह सकते हैं |

3 -देश के सभी महाविद्यालयों में जाकर छात्र और छात्राओं को इसके लिए प्रेरित करना कि आप इस देश,समाज और इंसानियत के भविष्य हैं इसलिए आप निडर होकर सबसे पहले इस देश और इस देश के गरीबों का खून चूसने वाले भ्रष्ट लोगों के खिलाप लड़ाई को एकजुट होकर प्रतिदिन कम से कम तिन घंटे जरूर दें यह लड़ाई एकजुट होकर RTI दायर करना ,प्रशासन को कार्य कि गुणवत्ता को बनाये रखने में जमीनी स्तर पे सहयोग व सुझाव देना,प्रशासन को जनकल्याणकारी योजनाओं को असल जरूरतमंद लोगों तक बिना किसी रिश्वत के पहुँचाने के लिए बाध्य करना ,जिले के न्यायिक अधिकारियों को जिले में फैले भ्रष्टाचार व अनियमितता को जनहित में अवगत कराकर उसपर दोषियों के खिलाप न्यायसंगत व तर्कसंगत कार्यवाही का आग्रह करना इत्यादि के साथ हर आम और खास को अपनी नागरिक जिम्मेवारियों को निभाने तथा सामाजिक जाँच कर व्यवस्था को सही करने के लिए शिकायत व सुझाव प्रतिदिन लिखने व उसपर प्रशासन कि कार्यवाही का जवाब भी हर हाल में मांगने  के लिए सुरक्षा व सहायता चक्र बनाना जिससे ऐसा करते हुए कोई असहाय और असुरक्षित ना महसूस करें |  असल में शिक्षा का मूल उद्देश्य यही होना चाहिए इससे अच्छे चरित्र का भी निर्माण होगा |
4 - घर-घर जाकर लोगों को इस बात के लिए प्रेरित करना और समझाने का प्रयास करना कि लोभ-लालच सारी बुराइयों का मूल है इसलिए अपनी जरूरत से ज्यादा धन को जमा करना अपने सात पुश्तों के लिए सुख नहीं बल्कि दुखों को जमा करने के सामान है | क्योंकि ज्यादा धन बिना बेईमानी व इनसानियत को धोखा दिए कमाया नहीं जा सकता और धोखे से कमाए गये धन से पल बढ़ रहे बच्चों में सदबुद्धि आ ही नहीं सकती और कुबुद्धि तो इन्सान के स्वयं  का सर्वनाश कर देता है तो सात पुश्तों कि खुशियों कि उम्मीद करना मुर्खता है | इसलिए हर व्यक्ति को अपनी जरूरत से ज्यादा धन को गरीबों व असल जरूरतमंदों में बाँट देना चाहिए ऐसा करके ही हम इस देश और समाज को इंसानों के रहने लायक बना सकतें है तथा अपने सात पुश्तों के लिए सुख और खुशियों के  संसार का निर्माण कर सकतें हैं | 

इन पाठशाला या संस्थानों के आर्थिक आधार के लिए सरकारी धन को लूटने वालों से सरकार को जो धन वापिस मिलेगा इन पाठशाला या संस्थानों के कार्यों व प्रयासों के चलते उसका कुछ हिस्सा हम सरकार से मांगने का प्रयास करेंगे | वैसे ह़र गांव व शहर के लोग चाहें तो एकजुट होकर इसके लिए आर्थिक आधार बना सकते हैं क्योंकि ऐसा करने से उनके द्वारा रिश्वत व दौर-भाग पे जो खर्च आता है वो बचेगा तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार होने से भी उनका पैसा बचेगा जिसका कुछ हिस्सा अगर सबलोग स्वेच्क्षा से देने को ह़र महीने तैयार हों तो ह़र गांव और शहर में ऐसे पाठशाला या संस्थान को खोलकर इंसानियत क़ी पाठ को पढ़ाने क़ी शुरुआत क़ी जा सकती है | सिर्फ जरूरत है ह़र गांव और शहर में एक इमानदार व्यक्ति द्वारा पहल करने क़ी ,आप अगर चाहेंगे तो हम आपकी सहायता के लिए आपके गांव और शहर अपने खर्चे पे आकर आपको सहायता भी देंगे और आपके जिले के DM और SP से भी आपके इस नेक काम में सहयोग का आग्रह भी करेंगे | हम देश भर में अच्छा और सच्चा काम कर रहे लोगों को सम्मानित करने के लिए आधे घंटे के एक टीवी प्रोग्राम बनाने पर भी विचार कर रहें हैं |


(नोट-उपर्युक्त सभी कार्टून और फोटो गूगल और CARTOONSTOCK.COM से जनहित में साभार प्रकाशित है ,किसी को ऐतराज हो तो हटा दिया जायेगा)