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| एक वीर शहीद जिनका आज जन्मदिन भी है ने देश के लिए अपने जान कि भी परवाह नहीं कि ,आज लोग सत्य,न्याय,देशभक्ति व ईमानदारी के लिए पदों का मोह त्यागने तक को तैयार नहीं ,क्या होगा इस देश और समाज का ? |
कहते है कि राजा ऐसा होता है या होना चाहिए जिसे अपने जनता के दुखों कि ह़र पल कि जानकारी हो और जिसे दूर करने के लिए उसे अपने स्वार्थ व सुविधा कि परवाह किये वगैर ह़र पल ईमानदारी से प्रयास करना चाहिए | इस देश का इतिहास कहता है कि यहाँ ऐसे भी जिन्दा जमीर वाले राजा हुए जिन्होंने अपने जनता के दुखों को सही मायने में जानने के लिए वेश बदलकर जनता के बीच कई दिनों तक रहकर उनके दुखों और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के लापरवाही व अन्याय का पता लगाया और उसके ऊपर ईमानदारी से कार्यवाही करते हुए दोषियों को न्यायसंगत सजा दी और वर्षों तक एक न्यायसंगत व तर्कसंगत शासन को चलाया जिससे हमारा देश कभी सोने कि चिड़िया कहा जाता था और एक उच्च सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था के लिए पूरे विश्व में जाना जाता था |
अगर हम इन स्वर्ण युगों का अध्ययन करें तो पायेंगे कि , उस समय के राजा बेहद चरित्रवान,निःस्वार्थी,न्यायप्रिय व परोपकारी हुआ करते थे और इसी वजह से जनता,देश व समाज इतना खुशहाल था | उस वक्त के राजाओं के जमीर व अंतरात्मा जिन्दा हुआ करता था जो इंसानी उसूलों को अपने राजपाट,फायदे और नुकसान से ज्यादा तरजीह देता था | आज भी अगर देखा जाय तो किसी व्यक्ति कि गारंटी क्या है ? जवाब होगा उस व्यक्ति का जिन्दा जमीर और सच्चा इंसान होना ही उसकी गारंटी है |
कोई भी पद एक शक्ति मात्र है जैसे इंसान का दिमाग या उसकी बुद्धि एक शक्ति है और उसका सदुपयोग व दुरूपयोग दोनों उस व्यक्ति पर निर्भर करता है | उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के व्यवहार व आचरण का प्रभाव जनसाधारण पर अवश्य परता है | जब जन साधारण यह देखता है कि हमारे देश के उच्च पदों पर बैठा व्यक्ति ही तिकरम व भ्रष्टाचार के सहारे अपने स्वार्थसिद्धि को प्राथमिकता दे रहा है और जनता के कल्याण को प्राथमिकता देने के वजाय अपने भ्रष्ट सहयोगियों के कल्याण को प्राथमिकता दे रहा है तो ऐसी अवस्था में जनसाधारण का व्यवहार भी वैसा ही होने लगता है और आज हमारे देश कि अवस्था ठीक इसी प्रकार कि है |
आज जरूरत है कि हमारे देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अपने पदों के शक्ति व मर्यादाओं के अनुकूल आचरण करते हुए भ्रष्ट मंत्रियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करें ,सत्य,न्याय कि रक्षा नहीं करने वाले अधिकारियों को ह़र-हाल में सजा देने का प्रबंध करें ,देश में किसी भी इमानदार ,देशभक्त व सच्चे इंसान को कोई तकलीफ ना हो इसका ह़र हाल में प्रबंध करे | इसके लिए जरूरत हो तो इन दोनों पदों पर बैठे व्यक्तियों को देश के ह़र गांवों में महीने के बीस दिन तब तक बिताने चाहिए जबतक आम लोगों कि समस्याओं का ईमानदारी से पता ना लगाकर उनका समाधान ना कर लिया जाय |
सही मायने में इन पदों कि महत्ता तब बढ़ेगी जब लोग इन पदों पर बैठे व्यक्ति के व्यवहार और आचरण को देखकर श्रधा से सम्मान के लिए सर झुकायेंगे ना कि इनके डर से इनको कुछ भी बोलने से परहेज करेंगे और मन ही मन इनको जी भरकर कोसेंगे | आज देखा जाय तो यही हो रहा है क्योंकि संसद में कई सांसदों के गम्भीर आरोपों और सारे सबूतों के रहते हुए भी हमारे देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति सिर्फ और सिर्फ अपने पद कि लालच कि वजह से शरद पावर व अन्य भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाप कोई भी कार्यवाही नहीं कर पा रहें हैं जो ना सिर्फ देश व समाज बल्कि पूरे इंसानियत के लिए खतरे कि घंटी है | सर्वोच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के ऐसे व्यवहार से इन पदों कि गरिमा व छवि भी आम लोगों में बेहद खराब हो रही है तथा देश कि पूरी कि पूरी पुलिस,प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था सड़कर दुर्गन्ध दे रही है |
सभी ब्लोगरों से आग्रह है कि आप सब भी इस मुद्दे पर पूरी ईमानदारी से और निड़र होकर अपनी राय रखें जिससे एक बदलाव कि शुरुआत कि पहल हो |