Thursday, September 9, 2010

नीतिगत मामलों में सर्वोच्च न्यायालय व्याख्या ना करें क्योंकि ये अधिकार सोनिया गाँधी को है ....?

एक ऐसी महिला जिसके हाथ में इस देश की पूरी कमान है और पूरी व्यवस्था इसके क़दमों में है इस महिला के प्रभाव से पिछले पाँच सालों में इस देश में इंसानियत पूंजीपतियों का गुलाम बन चुकी है | ये देश एक मरता हुआ लोकतंत्र बन गया है |  सारा खेल ये खेलती है लेकिन इसका कहीं जिक्र भी नहीं होता ,जाँच करे तो कौन...?


सड़ते अनाज के मुद्दे पर अनाज को सड़ाने से अच्छा गरीबों में बाँट देने का आदेश सर्वोच्च न्यायालय के इमानदार जज ने क्या दे दिया मानो आफत आ गयी | इस आदेश के आते ही भ्रष्टाचार क़ी बैसाखी के सहारे प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे और जमे हुये हमारे मनमोहन सिंह जी ने तुरंत सर्वोच्च न्यायालय को नीतिगत मामलों से दूर रहने का बेशर्मी भरा फरमान जारी कर दिया | अगर इस बयान के लिए देश भर में सर्वे करायें जायें तो लोग इस आपराधिक और भ्रष्टाचार को बढाने वाले बयान के लिए मनमोहन सिंह को सजा देने क़ी अपील करेंगे |



अब दूसरा पहलु देखिये अभी सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी के किसानों के भूमि अधिग्रहण से सम्बंधित याचिका को ठुकरा दिया क्योंकि कानूनी दायरे में यही व्याख्या बनती थी | लेकिन अगर सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को इंसानियत के नाते स्वीकार कर इस कानून क़ी खामियों पर प्रकाश डालकर सच्ची न्यायिक व्याख्या करती तो फिर सरकार कहती क़ी नीतिगत मामलों में दखल ना दे...


अब देखिये इस सरकार क़ी बेशर्मी इधर सर्वोच्च न्यायालय ने किसानों क़ी याचिका ठुकराई और उधर जबरदस्ती इस देश क़ी महारानी बनी सोनिया गाँधी का बयान आया क़ी किसानों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए | ये है इस बेशर्म कांग्रेस सरकार का चेहरा सर्वोच्च न्यायालय से भी बड़ी है इनकी राजमाता सोनिया गाँधी | दुःख तब और हुआ जब मीडिया ने इस राजमाता के बयान पर बहस छेड़ दिया ,लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के जनहित में आये आदेश को एक निकम्मे व्यक्ति द्वारा अपमान करने को मीडिया ने उतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाया | ऐसे हालात में कैसे कोई जज कानून को इंसानियत से जोड़कर व्याख्या करने की कोशिस करेगा ...?



अब देखते हैं क़ी भूमि अधिग्रहण कानून मोटा-मोटी कहता क्या है 1894 में अंग्रेजों द्वारा सड़क,नहर,रेलवे लाइन इत्यादि बहुत जरूरी जनहित क़ी चीजों के लिए इस कानून को बनाया गया जिसे 1978 में तब थोरी और मजबूती मिली जब आजाद भारत सरकार ने सम्पत्ति के अधिकार को नागरिकों के मूल अधिकार से निकाल दिया |

दरअसल ये कानून कहिं भी किसानों से ज़मीन लेकर भारत सरकार को बेशर्मी से दलाल बनकर किसी बिल्डर माफिया को देने क़ी बात नहीं कहता है लेकिन जब इस देश क़ी तथाकथित महारानी का परिवार भी इस बिल्डर  माफिया का हिस्सा हो तो इस देश में किसानों क़ी ज़मीन ऐसे ही छीनी जाएगी और किसान बदहाल तथा दलाल मालामाल होते रहेंगे | 


शर्मनाक है इस देश में सोनिया गाँधी का राजतन्त्र जो सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर है और किसी भी कानून की व्याख्या अपने मन मुताबिक करा सकता है ,हे भगवान इस देश में ऐसा कोई नहीं जो इस परिवार से इस देश को छुटकारा दिलाये....?

6 comments:

  1. बढ़िया .............

    हमें भी पढ़े :-
    ( खुद को रम और भगवन को भांग धतुरा ....)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html

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  2. अत्यंन्त महत्वपूर्ण पोस्ट है.

    "..अगर इस बयान के लिए देश भर में सर्वे करायें जायें तो लोग इस आपराधिक और भ्रष्टाचार को बढाने वाले बयान के लिए मनमोहन सिंह को सजा देने क़ी अपील करेंगे |"

    "..कानून कहिं भी किसानों से ज़मीन लेकर भारत सरकार को बेशर्मी से दलाल बनकर किसी बिल्डर माफिया को देने क़ी बात नहीं कहता है लेकिन जब इस देश क़ी तथाकथित महारानी का परिवार भी इस बिल्डर माफिया का हिस्सा हो तो इस देश में किसानों क़ी ज़मीन ऐसे ही छीनी जाएगी और किसान बदहाल तथा दलाल मालामाल होते रहेंगे | "

    कुछ तो करना करना ही होगा सर. ये अभियान जारी रहे.

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  3. आज पहली बार मुझे आदरणीय "उड़न तश्तरी" जी का उपरोक्त कमेन्ट
    अच्छा नहीं लगा. बेहतर होता वे कमेन्ट ही न करते.

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  4. your view is realy correct because a unqualify in law, when interfare in judiciary work,definetaly it indicates some unhealthyness.

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  5. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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