क्या आप समझते हैं कि जनता को सरकार को संयुक्त हस्ताक्षर अभियान के जरिए,आदेश देने का अधिकार है?

Wednesday, October 6, 2010

अच्छे,सच्चे,इमानदार और देशभक्त लोग एकजुट हो जायें या इस देश में जुल्म सहने को तैयार रहें....आपकी रक्षा करनेवाला इस देश में कोई नहीं सिवाय आपकी एकजुटता के....

आज लोकतंत्र को सिर्फ देश भर के सच्चे,अच्छे,इमानदार और देशभक्त लोगों के एकजुटता के ताकत से तैयार किये गए परस्पर सुरक्षा व सहायता तंत्र के निर्माण से ही बचाया जा सकता है |

आज इस देश और समाज क़ी हालत ऐसी हो चुकी है क़ी कानून और व्यवस्था नैतिक पतन हो चुके लोगों के हाथो में एक वेश्या क़ी तरह है | जब चाहे भ्रष्ट लोग कानून और व्यवस्था का बलात्कार कर चलते बनते हैं और किसी को भी सजा नहीं होती है | सजा अगर किसी को होती है तो वो है एक इमानदार समाज सेवक जो कानून क़ी इज्जत और सम्मान के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा देता है ,एक इमानदार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जो अपनी जान क़ी परवाह किये वगैर कानून और व्यवस्था क़ी रक्षा करने का प्रयास करता है | ऐसे कई वाकये प्रतिदिन इस देश में होते हैं जब सत्य और ईमानदारी को खुले आम जूते तले रौंदा जाता है और इस देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण व सम्माननीय पदों पर बैठा व्यक्ति भी सत्य और ईमानदारी क़ी रक्षा में व्यक्तिगत रूचि नहीं दिखा पा रहा है | मेरी समझ में नहीं आता क़ी इन पदों क़ी गरिमा को ये लोग अपने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही दिखाकर अपमानित क्यों कर रहें हैं ..? कोई भी बुद्धिजीवी यही कहेगा क़ी इन पदों पर बैठे व्यक्ति क़ी पहली प्राथमिकता सत्य,न्याय और ईमानदारी क़ी रक्षा करना होना चाहिए ...लेकिन ऐसा होता इन दोनों पदों पर बैठे व्यक्तियों क़ी ओर से दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है और ना ही देश यह महसूस कर रहा है क़ी इन पदों पर बैठे व्यक्ति आज सत्य,न्याय और ईमानदारी क़ी ह़र हाल में रक्षा के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहें हैं ...

इस तरह क़ी स्थिति के लिए दोषी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का पद नहीं बल्कि इन पदों पर बैठा व्यक्ति है ....? आज इन पदों पर बैठे व्यक्ति अपने अधिकारों का सदुपयोग देशहित और समाज क़ी भलाई के लिए कम बल्कि अपने निहित स्वार्थों और अपने चहेतों के स्वार्थों क़ी पूर्ति के लिए दुरूपयोग के रूप में ज्यादा कर रहें हैं | यही वजह है क़ी देश में 90प्रतिशत सांसद चाहे वो राज्यसभा के हों या लोकसभा के भ्रष्ट,चोर,बेईमान,चरित्रहीन तथा देश के गद्दार हैं | अगर इन सब क़ी ब्रेनमेपिंग तथा लाईडिटेक्टर  टेस्ट कराया जाय तो ये 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हो सकता है | 


इन भ्रष्ट मंत्रियों और जन प्रतिनिधियों क़ी वजह से देश में ज्यादातर उद्योगपति भी भ्रष्ट,चरित्रहीन,चोर,बेईमान तथा गद्दार होते जा रहें हैं | इन जनप्रतिनिधियों के द्वारा इनको नकली समान बनाने,श्रम कानून को तोड़ने,टेक्स क़ी चोरी करने इत्यादि के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ संरक्षित  भी किया जा रहा है और बदले में उनसे अडबों रूपये क़ी रिश्वत पार्टी या व्यक्तिगत रूप में लिया जा रहा है | पूरी क़ी पूरी व्यवस्था चोरी,भ्रष्टाचार,ठगी,अनैतिक आचरण पर आधारित होती जा रही है | सरकारी खजाने का उपयोग जनहित के वजाय इन भ्रष्ट मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के व्यक्तिगत हितों पे खर्च किया जा रहा है ,नीतियाँ ऐसी बनायीं जा रही है क़ी आम लोग भूखे मरें और भ्रष्ट तथा सत्ता के दलाल जो पूरे देश में 10 प्रतिशत हैं मालामाल हों ,देश और समाज क़ी हालत खस्ताहाल होती जा रही है लेकिन देश विकाश कर रहा है ...?
ह़र व्यक्ति चोरी और ठगी कर अपना जीवन बचाने को मजबूर है लेकिन देश का विकाश हो रहा है ....?
देश में नैतिक चरित्र नाम क़ी कोई चीज बची ही नहीं है लेकिन देश विकाश कर रहा है....?
शासन और प्रशासन में अनुशासन हीनता का बोलबाला है लेकिन देश विकाश कर रहा है ...?
सरकार सामाजिक सरोकार और जनहित को भूलकर व्यवसायी और दलाल बन चुकी है लेकिन देश विकाश कर रहा है ....? 



इन सब बातों के खिलाप कोई आवाज उठाता है तो चाहे वह समाज सेवक हो या पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी ,उसे ह़र तरह से परेशान और प्रतारित किया जाता है और पूरी क़ी पूरी व्यवस्था अंधी ,बहरी और गूंगी होकर देखती रह जाती है | अभी हाल क़ी घटना एक समाज सेवी ब्लोगर श्री राम बंसल के साथ घटी है जिसके सत्य और ईमानदारी भरे सामाजिक कार्यों के बदले उसे धार्मिक उन्माद फ़ैलाने वाला घोषित कर दिया गया है ,पढ़ें इस ब्लॉग पर -http://khandoi.blogspot.com/  
श्री राम बंसल जो पूरी ईमानदारी से देश और समाज क़ी सेवा में लगे है तथा अपने गांव में असामाजिक तत्वों के खिलाप अभियान चलाये हुयें है | लेकिन पुलिस ऐसे सच्चे और इमानदार लोगों को ही परेशान कर रही है | पूरे देश के लोगों को राम बंसल जी जैसे लोगों क़ी सुरक्षा और सहायता में आगे आना चाहिए तथा देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को ऐसे मामलों को व्यक्तिगत रूप से देखना चाहिए तथा दोषी पुलिस वालों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए ...
अब सवाल उठता है क़ी राम बंसल जैसे लोग क्यों चले सत्य और ईमानदारी के राह पर ...?
इनकी रक्षा कौन करेगा ,इस देश का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ...?
इनके ऊपर झूठा और बेबुनियाद आरोप पत्र तैयार करने वाले पुलिस वालों के खिलाप सख्त कार्यवाही कर उनको नौकरी से निकालकर उनकी पेंशन और सभी सुविधाओं को कौन रोकेगा ...?
ऐसा हो सकता है अगर पूरे देश के अच्छे,सच्चे,इमानदार और देशभक्त लोग एकजुट होकर एक दूसरे के सुरक्षा व सहायता में अपने आप को लगा दें | अगर हमलोग अब भी एकजुट नहीं होतें हैं तो वो दिन दूर नहीं जब इस देश से सच्चाई,अच्छाई,ईमानदारी और देशभक्ति का नाम मिट जायेगा....तथा सच्चे,अच्छे,इमानदार व देशभक्त लोगों पर ह़र तरफ अंग्रेजों से भी ज्यादा जुल्म ढाया जायेगा...?

4 comments:

  1. सच्चाई की राह में काँटे तो हमेशा से ही रहे हैं । फिर भी इस धरती पर महापुरुष सच्चाई की राह पर चलते रहे हैं और चलते रहेंगे ।

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  2. सार्थक लेख के लिए आभार। बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    मध्यकालीन भारत-धार्मिक सहनशीलता का काल (भाग-२), राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

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  3. सार्थक लेख के लिए आभार।

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  4. अच्छा लगता है इस तरह की बातें करने में ... जोश भी आता है .. लेकिन एक साधारण इंसान रोटी की ज़द्दोज़हद फंस कर सारी ईमानदारी और नैतिकता का दम घुट जाता है ... कोई सुनने वाला नहीं होता उसका ... और अंततः न चाहते हुए भी भ्रष्टाचार की बहती धारा में ही नहाना पड़ता है

    झा जी ... क्या कोई ऐसा पोर्टल या साईट बनाई जा सकती है जिस पर हर व्यक्ति अपने विभाग अपने आसपास में पनप रहे भ्रष्टाचार को उजागर कर सके और फिर उसे जांच के घेरे में ला कर समाज का शुद्धिकरण किया जा सके. यद्यपि यह एक साहसिक संकल्प हो सकता है लेकिन असंभव नहीं है. इस माध्यम से क्या एक यूनियन नहीं बन सकती जिसके द्वारा RTI के तहत प्रश्न पूछे जाएँ. और आवश्यकता पड़ने पर लड़ाई लड़ी जा सके. इस विषय पर विचार करना आवश्यक हो गया है ... केवल अच्छी अच्छी नीतिगत बातें करने से कुछ भी नहीं होने वाला .. कम से कम इतना तो सशक्त होना होगा संगठित होना होगा कि हमारी बात सरकार और प्रशासन के कानों में गूंजे.

    धन्यवाद

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